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14 सालों में इकनॉमिक ग्रोथ में देखी गई गिरावट, बेरोजगार भी बढ़े

Thu, 02 Feb 2017 04:26 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 02 Feb 2017 04:26 PM IST
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In 14 years economic growth on downfall, unemployment on rise

2014 तक पूरे विश्व में विकास दर ऊपर जाने के बजाए नीचे चली गई है। इसके कारण बेरोजगारी में इजाफा हुआ है, जिससे पार पाना मुश्किल दिख रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, 2000 से 2014 के बीच वार्षिक अर्थव्यवस्था की विकास दर 3 फीसदी से घटकर 1.3 फीसदी हो गई है। पूरे विश्व की आधी से ज्यादा आबादी लगभग 140 रुपये (दो डॉलर) से कम में प्रतिदन जीवन यापन करने को मजबूर है। 

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20.2 करोड़ लोग हैं बेरोजगार

ग्लोबल इंडेक्स के अनुसार, 2007 से 2012 तक पिछले पांच सालों के दौरान बेरोजगारों की संख्या में भी काफी इजाफा हुआ है। जहां 2007 में यह संख्या 17 करोड़ थी, वहीं 2012 तक यह संख्या 20.2 करोड़ पहुंच गई थी। इसका कारण यह है कि लोगों को काम नही मिल रहा है, क्योंकि कंपनियां नया निवेश भी नहीं कर रही हैं। 

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बच्चों से करवाएं जा रहे हैं खतरनाक काम

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2012 में पूरी दुनिया में करीब 8.5 करोड़ बच्चों से खतरनाक काम करवाए जा रहे थे। सतत विकास कार्यक्रम का मिशन है कि 2030 तक सभी विकासशील देश 7 फीसदी विकास दर पर आ जाएं।

लेकिन यह तभी मुमकिन होगा जब सभी महिलाओं और पुरुषों को अगले 15 सालों में बढ़िया तरीके से काम करने का मौका मिल सके। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे लोगों को अगर गरीबी से मुक्त करना है तो सबसे पहले उनको बेहतर और स्थायी रुप से रोजगार मिले, इसके लिए प्रयास करने होगे।

एक अनुमान के मुताबिक, 2016 से 2030 के बीच पूरे विश्व में करीब 47 करोड़ नई नौकरियाों देनी होगी जिससे लोग आसानी से कमा सकें। 

36 करोड़ युवा हैं भारत में 

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यूएनडीपी के अनुसार, भारत में पूरे विश्व की तुलना में सबसे ज्यादा आबादी युवाओं की है। 130 करोड़ की आबादी में 36 करोड़ लोग युवा हैं, जिनकी उम्र 10 से 24 साल के बीच है। लेकिन इनमें से केवल 23 फीसदी ही उच्च शिक्षा पूरी कर पाते हैं, जो कि विश्व में सबसे कम दर है।

एक अनुमान है कि देश में प्रतिवर्ष 8 लाख नए लोग मजदूरी करने के लिए आएंगे। इस हिसाब से 2050 तक 28 करोड़ नई नौकरियां निकालनी होगी।

सरकार जॉब गारंटी से जुड़े तीन कार्यक्रम पहले से चला रही है जिनमें, नेशनल स्किल डेवलपमेंट मिशन, नेशनल सर्विस स्कीम और महात्मा गांधी नेशनल रुरल इंप्लाइमेंट गारंटी स्कीम शामिल हैं। 

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1 करोड़ से अधिक बच्चे करते हैं मजदूरी

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फाइल फोटो - फोटो : social media

यूएनडीपी के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 1 करोड़ से अधिक बच्चे स्कूलों में पढ़ने के बजाय किसी न किसी रुप में मजदूरी करने को विवश हैं। इन बच्चों में 20.7 फीसदी बच्चे किसी न किसी खतरनाक काम कर रहे हैं।

यह आंकड़ा तब है जब देश में फैक्ट्रियों के अंदर चाइल्ड लेबर पर पांबंदी लगी हुई है।  पूरे देश में 47.5 करोड़ लोग मजदूरी करते हैं, जिसमें हर साल 1.28 करोड़ लोग हर साल बढ़ जाते हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो 2050 तक 28 करोड़ नई नौकरियों की आवश्यकता पड़ेगी। 

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