{"_id":"6302322076b8b95345303590","slug":"imsd-asks-muslim-organisations-to-rethink-position-on-blasphemy-questions-silence-on-rushdie-attack","type":"story","status":"publish","title_hn":"Salman Rushdie Attacked: IMSD ने मुस्लिम संगठनों की चुप्पी पर सवाल उठाया, इस मामले पर पुनर्विचार करने की अपील","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Salman Rushdie Attacked: IMSD ने मुस्लिम संगठनों की चुप्पी पर सवाल उठाया, इस मामले पर पुनर्विचार करने की अपील
Sun, 21 Aug 2022 07:01 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 21 Aug 2022 07:01 PM IST
सार
आईएमएसडी ने बयान में कहा कि रुश्दी पर हमले को भय का शासन बनाने के लिए डिजाइन किया गया था। भारत के किसी भी प्रमुख मुस्लिम संगठन ने लेखक पर इस बर्बर हमले की निंदा नहीं की है।
विज्ञापन
सलमान रुश्दी पर हमला करने वाले को कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने ही दबोच लिया था।
- फोटो : Social Media
विस्तार
इंडियन मुस्लिम फॉर सेक्युलर डेमोक्रेसी (आईएमएसडी) ने लेखक सलमान रुश्दी पर बर्बर हमले को लेकर मुस्लिम संगठनों की चुप्पी पर सवाल उठाया है और उनसे ईशनिंदा को लेकर अपनी स्थिति पर विचार करने की अपील की है। आईएमएसडी ने कहा कि यह राजनीति का एक रूप है जो मुसलमानों को ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है।
आईएमएसडी के इस बयान का सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर, कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और मैग्सेसे पुरस्कार विजेदा संदीप पांडे समेत 60 जाने-माने लोगों ने समर्थन किया।
आईएमएसडी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, यह भारतीय मुसमानों का एक मंच है जो संयुक्त राषट्र में मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा और भारत के संविधान में निहित लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, समानता और न्याय के मूल्यों के लिए प्रतिबद्ध है।
विज्ञापन
आईएमएसडी ने बयान में कहा कि रुश्दी पर हमले को भय का शासन बनाने के लिए डिजाइन किया गया था। भारत के किसी भी प्रमुख मुस्लिम संगठन ने लेखक पर इस बर्बर हमले की निंदा नहीं की है।
बयान में कहा गया, यही चुप्पी ही इस्लामाफोबिया को धर्म को हिंसा और आंतक के पंथ के रूप में चित्रित करने के लिए प्रेरित करती है।
एक हफ्ते से ज्यादा समय पहले रुश्दी पर न्यूयॉर्क में एक चौबीस वर्षीय व्यक्ति हादी मटर ने हमला किया था। हमालवर ने उनकी गर्दन और पेट पर उस वक्त चाकू मार दिया था जब वे एक कार्यक्रम को संबोधित करने वाले थे। रुश्दी अपनी लिखी किताब 'द सैटेनिक वर्सेज' को लेकर विवादों में रहे हैं। यह किताब लिखने के बाद से वह धार्मिक कट्टरपंथियों के निशाने पर थे।
मुंबई में जन्मे विवादास्पद लेखक को हमले के बाद एक स्थानीय ट्रॉमा सेंटर में ले जाया गया। वेंटिलेटर पर रखा गया औऱ कई घंटों की सर्जरी की गई।
आईएमएसडी ने कहा कि फ्री स्पीच, पढ़ने-लिखने और असहमति के बिना हम अपने संविधान में निहित स्वतंत्रता को बरकरार नहीं रख सकते हैं। हम मानते हैं कि केवल इन स्वतंत्रतताओं में निवेश करके हम अपने गणतंत्र के मूल्यों को बनाए रख सकते हैं।
बयान में कहा, गंभीर संकट की इस घड़ी में हम सलमान रुश्दी के साथ मजबूती से खड़े हैं और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं। हम एक बार फिर सभी मुस्लिम संगठनों से ईशनिंदा पर अपनी स्थिति पर पुनर्विचार करने की अपील करते हैं, यह एक ऐसी राजनीति है जो मुसलमानों को ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है।
विज्ञापन
आईएमएसडी के इस बयान का सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर, कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और मैग्सेसे पुरस्कार विजेदा संदीप पांडे समेत 60 जाने-माने लोगों ने समर्थन किया।
विज्ञापन
आईएमएसडी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, यह भारतीय मुसमानों का एक मंच है जो संयुक्त राषट्र में मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा और भारत के संविधान में निहित लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, समानता और न्याय के मूल्यों के लिए प्रतिबद्ध है।
विज्ञापन
आईएमएसडी ने बयान में कहा कि रुश्दी पर हमले को भय का शासन बनाने के लिए डिजाइन किया गया था। भारत के किसी भी प्रमुख मुस्लिम संगठन ने लेखक पर इस बर्बर हमले की निंदा नहीं की है।
बयान में कहा गया, यही चुप्पी ही इस्लामाफोबिया को धर्म को हिंसा और आंतक के पंथ के रूप में चित्रित करने के लिए प्रेरित करती है।
एक हफ्ते से ज्यादा समय पहले रुश्दी पर न्यूयॉर्क में एक चौबीस वर्षीय व्यक्ति हादी मटर ने हमला किया था। हमालवर ने उनकी गर्दन और पेट पर उस वक्त चाकू मार दिया था जब वे एक कार्यक्रम को संबोधित करने वाले थे। रुश्दी अपनी लिखी किताब 'द सैटेनिक वर्सेज' को लेकर विवादों में रहे हैं। यह किताब लिखने के बाद से वह धार्मिक कट्टरपंथियों के निशाने पर थे।
मुंबई में जन्मे विवादास्पद लेखक को हमले के बाद एक स्थानीय ट्रॉमा सेंटर में ले जाया गया। वेंटिलेटर पर रखा गया औऱ कई घंटों की सर्जरी की गई।
आईएमएसडी ने कहा कि फ्री स्पीच, पढ़ने-लिखने और असहमति के बिना हम अपने संविधान में निहित स्वतंत्रता को बरकरार नहीं रख सकते हैं। हम मानते हैं कि केवल इन स्वतंत्रतताओं में निवेश करके हम अपने गणतंत्र के मूल्यों को बनाए रख सकते हैं।
बयान में कहा, गंभीर संकट की इस घड़ी में हम सलमान रुश्दी के साथ मजबूती से खड़े हैं और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं। हम एक बार फिर सभी मुस्लिम संगठनों से ईशनिंदा पर अपनी स्थिति पर पुनर्विचार करने की अपील करते हैं, यह एक ऐसी राजनीति है जो मुसलमानों को ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है।