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नोटबंदी का असरः होगी नौकरियों में कटौती, नहीं होगा ज्यादा इंक्रीमेंट
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 06 Jan 2017 05:44 PM IST
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नोटबंदी का सबसे बुरा असर अब पड़ना शुरू होगा, जब इस साल नौकरियों में कटौती देखने को मिलेगी और तनख्वाह में भी बढ़ोतरी देखने को नहीं मिलेगी। रिसर्च फर्म एओएन हैविट के अनुसार इस साल के शुरूआती दो तिमाही में जॉब मार्केट में सबसे नकरात्मक असर देखने को मिलेगा।
नोटबंदी के बाद से ज्यादातर सेक्टर्स में नई नौकरियां नहीं निकल रही है और इसके अभी आगे तक जारी रहने की संभावना है। इसके साथ ही मार्च-अप्रैल में होने वाले इंक्रीमेंट पर भी कमी आ सकती है। नोटबंदी के बाद से कंपनियों के मालिक काफी सजग हो गए हैं।
लोग कम छोड़ेंगे नौकरियां
चूंकि इस बार बाहर भी नौकरियां कम रहेंगी, इसलिए इंप्लाई भी जहां पर हैं वहीं पर आगे भी काम करते रहेंगे। 2016 में जहां फिनटेक और डिजिटल पमेंट कंपनियों में जॉब मिलने के अवसर काफी ज्यादा रहे थे, वहीं इस साल के शुरूआती 6 महीनों में ऐसा बहुत कम देखने को मिलेगा।
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नोटबंदी के बाद से ज्यादातर सेक्टर्स में नई नौकरियां नहीं निकल रही है और इसके अभी आगे तक जारी रहने की संभावना है। इसके साथ ही मार्च-अप्रैल में होने वाले इंक्रीमेंट पर भी कमी आ सकती है। नोटबंदी के बाद से कंपनियों के मालिक काफी सजग हो गए हैं।
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लोग कम छोड़ेंगे नौकरियां
चूंकि इस बार बाहर भी नौकरियां कम रहेंगी, इसलिए इंप्लाई भी जहां पर हैं वहीं पर आगे भी काम करते रहेंगे। 2016 में जहां फिनटेक और डिजिटल पमेंट कंपनियों में जॉब मिलने के अवसर काफी ज्यादा रहे थे, वहीं इस साल के शुरूआती 6 महीनों में ऐसा बहुत कम देखने को मिलेगा।
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अच्छे काम करने वालों को रिटेन करना चाहेगी कंपनी
2017 में कंपनियों के एचआर डिपार्टमेंट के पास सबसे बड़ी मुश्किल अच्छे इंप्लाई को रिटेन रखने में होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि कंपनियों को नए इंप्लाई को तैयार करने में उनकी सैलरी से पांच गुना ज्यादा खर्च करना पड़ता है। नोटबंदी से इंप्लाई को पहले से पता है कि बाहर भी किसी कंपनी में उतना ज्यादा पैसा नहीं मिलेगा, जितना वो मिलने का सोच रहे हैं। ऐसे में भलाई यह है कि जिस कंपनी में वो फिलहाल काम कर रहे हैं, उसी में टिके रहें।
सैलरी में होगी केवल सिंगल डिजिट ग्रोथ
रिसर्च फर्म का मानना है कि इस साल इंक्रीमेंट केवल सिंगल डिजिट में रहेगा, क्योंकि कंपनियां अपने सैलरी बजट में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं करेगी। जॉब स्विच करने वाले इंप्लाई को सैलरी पर काफी ज्यादा निगोशिएट करना होगा, क्योंकि कंपनियां नए टैलेंट को हायर करने में ज्यादा पैसा नहीं खर्च करना चाहेगी।
2017 में कंपनियों के एचआर डिपार्टमेंट के पास सबसे बड़ी मुश्किल अच्छे इंप्लाई को रिटेन रखने में होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि कंपनियों को नए इंप्लाई को तैयार करने में उनकी सैलरी से पांच गुना ज्यादा खर्च करना पड़ता है। नोटबंदी से इंप्लाई को पहले से पता है कि बाहर भी किसी कंपनी में उतना ज्यादा पैसा नहीं मिलेगा, जितना वो मिलने का सोच रहे हैं। ऐसे में भलाई यह है कि जिस कंपनी में वो फिलहाल काम कर रहे हैं, उसी में टिके रहें।
सैलरी में होगी केवल सिंगल डिजिट ग्रोथ
रिसर्च फर्म का मानना है कि इस साल इंक्रीमेंट केवल सिंगल डिजिट में रहेगा, क्योंकि कंपनियां अपने सैलरी बजट में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं करेगी। जॉब स्विच करने वाले इंप्लाई को सैलरी पर काफी ज्यादा निगोशिएट करना होगा, क्योंकि कंपनियां नए टैलेंट को हायर करने में ज्यादा पैसा नहीं खर्च करना चाहेगी।