{"_id":"693df48efa16849b3e0213e3","slug":"impact-of-climate-change-rising-temperatures-are-reducing-sleep-putting-health-at-risk-2025-12-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Climate Change: जलवायु परिवर्तन का असर, बढ़ते तापमान से घट रही नींद; सेहत पर बड़ा खतरा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Climate Change: जलवायु परिवर्तन का असर, बढ़ते तापमान से घट रही नींद; सेहत पर बड़ा खतरा
Sun, 14 Dec 2025 04:49 AM IST
नितिन गौतम
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: नितिन गौतम
Updated Sun, 14 Dec 2025 04:49 AM IST
सार
नतीजों से स्पष्ट हुआ कि रात के तापमान में हर 10 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी औसतन 2.63 मिनट की नींद घटा देती है। यह कमी मामूली दिख सकती है, पर जब करोड़ों लोग समग्र रूप से अपनी नींद खोते हैं, तो यह स्थिति सीधे सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले लेती है।
विज्ञापन
जलवायु परिवर्तन का नींद पर हो रहा असर
- फोटो : Adobe Stock
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दक्षिण कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के नेतृत्व में किए गए एक विस्तृत अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने चेतावनी दी है कि रात में बढ़ता तापमान दुनिया भर की नींद पर गहरा असर डाल रहा है। नींद का समय छोटा हो रहा है, गुणवत्ता गिर रही है, और इसका सबसे तीखा प्रभाव गरीब, बीमार और कठिन परिस्थितियों में रहने वाली आबादी पर पड़ रहा है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि भविष्य में हर इंसान साल भर में केवल गर्म रातों के कारण 24 घंटे तक की नींद खो सकता है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।
रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा
दक्षिण कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल ब्रिघम एंड विमेन्स हॉस्पिटल के सहयोग से किए गए इस अध्ययन में 14,232 अमेरिकियों की 1.2 करोड़ रातों की नींद का डेटा शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने फिटबिट से रिकॉर्ड किए गए नींद के चरण, नींद टूटने की आवृत्ति, नींद आने में लगने वाला समय और मौसम संबंधी आंकड़ों का विस्तार से विश्लेषण किया। नतीजों से स्पष्ट हुआ कि रात के तापमान में हर 10 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी औसतन 2.63 मिनट की नींद घटा देती है। यह कमी मामूली दिख सकती है, पर जब करोड़ों लोग समग्र रूप से अपनी नींद खोते हैं, तो यह स्थिति सीधे सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले लेती है। खास बात यह रही कि पश्चिमी तट अर्थात वेस्ट कोस्ट में रहने वाले लोग बाकी क्षेत्रों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक नींद खो रहे हैं। जून से सितंबर के महीनों में नींद की अधिकतम गिरावट दर्ज हुई।
कौन सबसे ज्यादा प्रभावित
विश्लेषण ने दिखाया कि बढ़ते तापमान का सबसे अधिक असर महिलाओं, गरीबों और पुरानी बीमारियों से जूझ रही आबादी पर पड़ा। ऐसे लोग पहले ही स्वास्थ्य एवं आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे होते हैं, और गर्म रातों की वजह से नींद की कमी उनके लिए नई स्वास्थ्य जटिलताएँ पैदा कर रही है।विशेषज्ञों के अनुसार, रात का बढ़ता तापमान शरीर को स्वाभाविक रूप से ठंडा नहीं होने देता।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- Air Pollution Delhi: राजधानी में सांसों का आपातकाल, जहरीली हवा में घुट रहा दिल्ली का दम; उम्र हो रही है कम
भारत में भी बढ़ रहीं बेचैन रातें
क्लाइमेट सेंट्रल और क्लाइमेट ट्रेंड्स की चेतावनी, अंतरराष्ट्रीय संगठनों क्लाइमेट सेंट्रल और क्लाइमेट ट्रेंड्स के संयुक्त विश्लेषण से स्पष्ट हुआ है कि भारत में गर्म रातों में तेजी से बढ़ोतरी जलवायु परिवर्तन से सीधे जुड़ी है। उनकी 'स्लीपलेस नाइट्स' रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2018 से 2023 के बीच केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पंजाब, जम्मू कश्मीर और आंध्र प्रदेश के शहरों में 50 से 80 अतिरिक्त रातें ऐसी दर्ज की गईं जब तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया।
अन्य वीडियो
विज्ञापन
रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा
दक्षिण कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल ब्रिघम एंड विमेन्स हॉस्पिटल के सहयोग से किए गए इस अध्ययन में 14,232 अमेरिकियों की 1.2 करोड़ रातों की नींद का डेटा शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने फिटबिट से रिकॉर्ड किए गए नींद के चरण, नींद टूटने की आवृत्ति, नींद आने में लगने वाला समय और मौसम संबंधी आंकड़ों का विस्तार से विश्लेषण किया। नतीजों से स्पष्ट हुआ कि रात के तापमान में हर 10 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी औसतन 2.63 मिनट की नींद घटा देती है। यह कमी मामूली दिख सकती है, पर जब करोड़ों लोग समग्र रूप से अपनी नींद खोते हैं, तो यह स्थिति सीधे सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले लेती है। खास बात यह रही कि पश्चिमी तट अर्थात वेस्ट कोस्ट में रहने वाले लोग बाकी क्षेत्रों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक नींद खो रहे हैं। जून से सितंबर के महीनों में नींद की अधिकतम गिरावट दर्ज हुई।
विज्ञापन
कौन सबसे ज्यादा प्रभावित
विश्लेषण ने दिखाया कि बढ़ते तापमान का सबसे अधिक असर महिलाओं, गरीबों और पुरानी बीमारियों से जूझ रही आबादी पर पड़ा। ऐसे लोग पहले ही स्वास्थ्य एवं आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे होते हैं, और गर्म रातों की वजह से नींद की कमी उनके लिए नई स्वास्थ्य जटिलताएँ पैदा कर रही है।विशेषज्ञों के अनुसार, रात का बढ़ता तापमान शरीर को स्वाभाविक रूप से ठंडा नहीं होने देता।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- Air Pollution Delhi: राजधानी में सांसों का आपातकाल, जहरीली हवा में घुट रहा दिल्ली का दम; उम्र हो रही है कम
भारत में भी बढ़ रहीं बेचैन रातें
क्लाइमेट सेंट्रल और क्लाइमेट ट्रेंड्स की चेतावनी, अंतरराष्ट्रीय संगठनों क्लाइमेट सेंट्रल और क्लाइमेट ट्रेंड्स के संयुक्त विश्लेषण से स्पष्ट हुआ है कि भारत में गर्म रातों में तेजी से बढ़ोतरी जलवायु परिवर्तन से सीधे जुड़ी है। उनकी 'स्लीपलेस नाइट्स' रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2018 से 2023 के बीच केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पंजाब, जम्मू कश्मीर और आंध्र प्रदेश के शहरों में 50 से 80 अतिरिक्त रातें ऐसी दर्ज की गईं जब तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया।
अन्य वीडियो
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन