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Lok Sabha: लोकसभा में पेश हुआ अप्रवास और विदेशी विषयक विधेयक; कांग्रेस ने कहा- ये मौलिक अधिकारों का उल्लंघन
Tue, 11 Mar 2025 03:43 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Tue, 11 Mar 2025 03:43 PM IST
सार
भारत के प्रवासन कानूनों को आधुनिक बनाने और मजबूत करने के लिए आज लोकसभा में 'अप्रवास और विदेशी विषयक विधेयक, 2025' पेश किया गया। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने गृह मंत्री अमित शाह की ओर से यह बिल सदन में पेश किया। जिसका कांग्रेस और टीएमसी की तरफ से विरोध किया गया।
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नित्यानंद राय, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री
- फोटो : ANI
विस्तार
केंद्र सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में आप्रवासन और विदेशी नागरिकों के भारत में आने से संबंधित प्रावधान वाला विधेयक पेश किया। विपक्ष के कुछ सदस्यों के विरोध के बीच गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने 'अप्रवास और विदेशी विषयक विधेयक, 2025' पेश किया गया।
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कांग्रेस-टीएमसी ने दिया नियमों का हवाला
वहीं कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने नियमों का हवाला देते हुए विधेयक को पेश किए जाने का विरोध किया। उन्होंने दावा किया कि यह विधेयक कई मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को वापस लिया जाए या फिर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजा जाए ताकि इस पर गहन विचार-विमर्श किया जा सके। इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने भी नियमों का हवाला देते हुए विधेयक को प्रस्तुत किए जाने का विरोध किया।
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गृह राज्य मंत्री ने विपक्ष को दिया जवाब
इस पर गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि विपक्ष की ओर से विधायी क्षमता पर सवाल उठाया गया है, लेकिन यह विधेयक सदन की क्षमता के अंतर्गत लाया गया है। उन्होंने कहा कि यह विषय संविधान की सातवीं अनुसूची में आता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसी भी विदेशी के प्रवेश या प्रस्थान का आदेश देना सरकार का संप्रभु अधिकार है। उनका कहना था कि चार अधिनियमों-पासपोर्ट अधिनियम 1920, विदेशियों का पंजीकरण अधिनियम 1939, विदेशी अधिनियम 1946 और आप्रवास अधिनियम 2000 को निरस्त कर एक व्यापक अधिनियम बनाया जा रहा है।
बिल का उद्देश्य क्या है?
इस विधेयक का उद्देश्य भारत में आने और जाने वाले लोगों के लिए पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेजों की अनिवार्यता को स्पष्ट करना, केंद्र सरकार को कुछ विशेष अधिकार देना और विदेशी नागरिकों के वीजा, रजिस्ट्रेशन और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं को विनियमित करना है।
बिल में क्या प्रावधान हैं?
संसद का बजट सत्र जारी
संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण सोमवार (10 मार्च) से शुरू हुआ है और यह 4 अप्रैल तक चलेगा। इस दौरान कई अहम विधेयकों पर चर्चा होगी।
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कांग्रेस-टीएमसी ने दिया नियमों का हवाला
वहीं कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने नियमों का हवाला देते हुए विधेयक को पेश किए जाने का विरोध किया। उन्होंने दावा किया कि यह विधेयक कई मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को वापस लिया जाए या फिर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजा जाए ताकि इस पर गहन विचार-विमर्श किया जा सके। इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने भी नियमों का हवाला देते हुए विधेयक को प्रस्तुत किए जाने का विरोध किया।
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गृह राज्य मंत्री ने विपक्ष को दिया जवाब
इस पर गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि विपक्ष की ओर से विधायी क्षमता पर सवाल उठाया गया है, लेकिन यह विधेयक सदन की क्षमता के अंतर्गत लाया गया है। उन्होंने कहा कि यह विषय संविधान की सातवीं अनुसूची में आता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसी भी विदेशी के प्रवेश या प्रस्थान का आदेश देना सरकार का संप्रभु अधिकार है। उनका कहना था कि चार अधिनियमों-पासपोर्ट अधिनियम 1920, विदेशियों का पंजीकरण अधिनियम 1939, विदेशी अधिनियम 1946 और आप्रवास अधिनियम 2000 को निरस्त कर एक व्यापक अधिनियम बनाया जा रहा है।
बिल का उद्देश्य क्या है?
इस विधेयक का उद्देश्य भारत में आने और जाने वाले लोगों के लिए पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेजों की अनिवार्यता को स्पष्ट करना, केंद्र सरकार को कुछ विशेष अधिकार देना और विदेशी नागरिकों के वीजा, रजिस्ट्रेशन और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं को विनियमित करना है।
बिल में क्या प्रावधान हैं?
- भारत में आने और जाने वालों के लिए पासपोर्ट और अन्य यात्रा दस्तावेजों की अनिवार्यता तय की जाएगी।
- विदेशियों के वीजा और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को नए सिरे से तय किया जाएगा।
- केंद्र सरकार को विदेशी नागरिकों से जुड़े मामलों में अधिक अधिकार दिए जाएंगे।
संसद का बजट सत्र जारी
संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण सोमवार (10 मार्च) से शुरू हुआ है और यह 4 अप्रैल तक चलेगा। इस दौरान कई अहम विधेयकों पर चर्चा होगी।
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