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जानलेवा कोरोना: ये सेंचुरी लगाकर शर्मसार है दिल्ली, दूसरी लहर में देशभर के 420 तो राजधानी के 100 डॉक्टरों ने गंवाई जान

Sat, 22 May 2021 06:32 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 22 May 2021 06:32 PM IST
सार

कोरोना की पहली लहर में भी भारी संख्या में डॉक्टरों की मौत हुई थी। उस समय पर्याप्त संख्या में पीपीई किट्स न होना इसकी बड़ी वजह मानी गई थी। अब जबकि पीपीई किट्स और मास्क पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हैं, डॉक्टरों की मौत देश के लिए चिंताजनक स्थिति पैदा कर रही है...

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IMA claims more than 420 doctors died from coronavirus second wave, 100 died in delhi
मरीज का इलाज करते डॉक्टर। - फोटो : Amar Ujala (File)

विस्तार

कोरोना की दूसरी लहर आम लोगों के लिए ही नहीं, डॉक्टरों के लिए भी जानलेवा साबित हुई है। दूसरी लहर में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से जुड़े 420 डॉक्टरों की जान जा चुकी है। मरने वालों में सबसे ज्यादा 100 डॉक्टर दिल्ली से हैं, तो बिहार इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर है, जिसके 96 डॉक्टर अब तक कोरोना की भेंट चढ़ चुके हैं। इनके आलावा उत्तर प्रदेश के 41, गुजरात के 31, आंध्र प्रदेश के 26 और तेलंगाना के 20 डॉक्टरों की मौत हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश में डॉक्टरों की मौत की संख्या बहुत अधिक है, लेकिन कोई स्पष्ट आंकड़ा न होने की वजह से पूरी तस्वीर सामने नहीं आ रही है।

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कोरोना की पहली लहर में भी भारी संख्या में डॉक्टरों की मौत हुई थी। उस समय पर्याप्त संख्या में पीपीई किट्स न होना इसकी बड़ी वजह मानी गई थी। अब जबकि पीपीई किट्स और मास्क पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हैं, डॉक्टरों की मौत देश के लिए चिंताजनक स्थिति पैदा कर रही है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (Indian Medical Association) के अनुसार कोरोना की पहली लहर में देश के 747 डॉक्टरों ने अपनी जान गंवाई थी। पहली लहर में सबसे ज्यादा तमिलनाडू के 91 डक्टरों की मौत कोरोना वायरस की चपेट में आने के कारण हुई थी। इसके आलावा महाराष्ट्र के 81, पश्चिम बंगाल के 71, आंध्र प्रदेश के 70, कर्नाटक के 68, उत्तर प्रदेश के 65, गुजरात के 62, बिहार के 38 और दिल्ली के 23 डॉक्टरों की मौत हुई थी।

इन्हें कोरोना योद्धा का दर्जा है भी नहीं

डॉक्टरों की कमी को देखते हुए सरकार ने दंत चिकिस्तकों को भी कोविड ड्यूटी पर लगा दिया था। लेकिन इन डॉक्टरों को अभी भी पता नहीं है कि सरकार इन्हें कोरोना योद्धा मान रही है या नहीं। मौलाना आज़ाद डेंटल मेडिकल कॉलेज के एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर अभिषेक भयाना की पिछले वर्ष कोरोना से मौत हो गई थी। रोहतक हरियाणा के रहने वाले इस डॉक्टर की मां की मौत भी कोरोना संक्रमण के कारण हो चुकी है, लेकिन अभी तक डॉक्टर के परिवार को सरकार की तरफ से कोई राहत नहीं मिल पाई है।

दन्त चिकित्सकों का कहना है कि सरकार हमसे कोरोना काल में ड्यूटी ले रही है, हम लोगों को RT-पीसीआर टेस्ट से लेकर संक्रमण की दृष्टि से संवेदनशील जगहों पर लगाया जा रहा है, लेकिन अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि वे कोरोना योद्धाओं की श्रेणी में आते हैं, या नहीं। अगर इस परिस्थितियों में उनके साथ कुछ हो जाता है तो उनके बाद उनके परिवार का क्या होगा?

डॉक्टरों की मांग है कि केवल डॉक्टरों को ही नहीं, उनके साथ काम करने वाले टेक्नीशियन भी कोरोना योद्धा माने जाने चाहिए क्योंकि कोरोना की लड़ाई में उनकी भूमिका भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। लेकिन इन्हें कोरोना योद्धा का दर्जा देने के मामले में सरकार की स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है।

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पर्याप्त हैं इंतजाम

मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर सचिन मोघा ने अमर उजाला को बताया कि कोरोना की पहली लहर में देश में पीपीई किट्स और N-95 मास्क की भारी कमी थी। इस कारण मरीजों का इलाज करने के दौरान भारी संख्या में डॉक्टर संक्रमित हो रहे थे। इस बार पीपीई किट्स और मास्क की कोई कमी नहीं है, लेकिन वायरस की आक्रामकता बढ़ जाने से भारी संख्या में डॉक्टर संक्रमित हो रहे हैं। इनमें अनेक लोगों की जान भी जा रही है।

देश के सामने चिंता

बीएलके अस्पताल के डॉक्टर संदीप नायर के अनुसार देश में मेडिकल एक्सपर्ट्स की भारी कमी है। इस लहर के दौरान भी देखा जा रहा है कि दिल्ली सहित देश के अनेक राज्यों में प्रशिक्षित डॉक्टरों की भारी कमी है। कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका भी जताई जा रही है, जो अब तक की सभी लहर से कहीं ज्यादा खतरनाक हो सकती है। इस दौरान देश को भारी संख्या में चिकित्सकों की आवश्यकता पड़ेगी। ऐसे स्थिति में डॉक्टरों की मौत देश के लिए चिंता पैदा करने वाली है।

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