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Par Panel: बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ अब भी गंभीर चिंता, भारत-बांग्लादेश के बीच संयुक्त तंत्र बनाने की सिफारिश
Fri, 31 Jul 2026 02:03 AM IST
Pavan
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Fri, 31 Jul 2026 02:03 AM IST
सार
कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने गुरुवार को संसद में अपनी रिपोर्ट पेश की। यह रिपोर्ट भारत-बांग्लादेश संबंधों पर पहले दी गई सिफारिशों पर सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा से जुड़ी है।
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नया संसद भवन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
संसद की विदेश मामलों की स्थायी समिति ने कहा है कि बांग्लादेश से भारत में होने वाली अवैध घुसपैठ अब भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। समिति ने सुझाव दिया है कि भारत और बांग्लादेश के बीच एक संयुक्त कार्य समूह (जॉइंट वर्किंग ग्रुप) या स्थायी द्विपक्षीय तंत्र बनाया जाए, ताकि संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों की राष्ट्रीयता की पुष्टि और उन्हें वापस भेजने (प्रत्यावर्तन) की प्रक्रिया पर नियमित निगरानी रखी जा सके।
2,369 मामलों का सत्यापन अभी बाकी
समिति ने कहा कि वर्तमान में 2,369 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों के मामलों में उनकी राष्ट्रीयता की पुष्टि बांग्लादेश सरकार से होना बाकी है। समिति का मानना है कि दोनों देशों के बीच एक समर्पित तंत्र बनने से यह प्रक्रिया तेज होगी और लंबित मामलों का जल्द निपटारा हो सकेगा।
यह भी पढ़ें- बांग्लादेश में चीन की बढ़ती चाल: संसदीय समिति ने केंद्र को किया सतर्क; चौबीसों घंटे निगरानी की सिफारिश
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भारतीय नागरिकों को गलती से न भेजा जाए
समिति ने इस बात पर भी जोर दिया कि जांच के दौरान पूरी सावधानी बरती जाए, ताकि किसी भारतीय नागरिक को गलती से बांग्लादेश न भेज दिया जाए। साथ ही हिरासत में रखे गए सभी लोगों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाए और कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन हो।
पश्चिम बंगाल और असम में ज्यादा चिंता
रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ का सबसे ज्यादा असर पश्चिम बंगाल और असम जैसे सीमावर्ती राज्यों में देखा जा रहा है। हालांकि अवैध प्रवासियों की पहचान और उन्हें वापस भेजने की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय और राज्य सरकारों की है, लेकिन विदेश मंत्रालय भी राष्ट्रीयता की पुष्टि और प्रत्यावर्तन में अहम भूमिका निभाता है।
बांग्लादेश के रास्ते चीनी सामान आने पर चिंता
समिति ने बांग्लादेश के रास्ते भारत में चीनी सामान, खासकर कपड़ों के कपड़े (फैब्रिक) आने पर भी चिंता जताई। रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ चीनी उत्पाद दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (SAFTA) के तहत बांग्लादेश को मिली व्यापारिक रियायतों का फायदा उठाकर भारत पहुंच रहे हैं। समिति के अनुसार, इससे भारतीय उद्योगों को नुकसान होता है और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है। इसलिए भारत सरकार को इस मुद्दे पर बांग्लादेश के सामने उच्च स्तर पर अपनी आपत्ति दर्ज करानी चाहिए।
व्यापार नियम और सख्त करने की सलाह
समिति ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और विदेश मंत्रालय से कहा है कि वे ऐसे सख्त नियम लागू करें, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि SAFTA या भविष्य में होने वाले किसी भी व्यापार समझौते का फायदा तीसरे देशों की कंपनियां गलत तरीके से न उठा सकें।
सांस्कृतिक रिश्तों को फिर मजबूत करने पर जोर
रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक कार्यक्रम, साहित्यिक सहयोग और युवा आदान-प्रदान जैसी पहल ने वर्षों से आपसी विश्वास बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। हालांकि हाल के घटनाक्रमों के कारण दोनों देशों के लोगों के बीच भरोसे का माहौल कुछ कमजोर हुआ है। समिति ने सुझाव दिया कि भारत और बांग्लादेश हर साल संयुक्त सांस्कृतिक कार्यक्रम, रवींद्रनाथ टैगोर–काजी नजरुल साहित्य महोत्सव, फिल्म समारोह और कला आदान-प्रदान जैसे कार्यक्रम आयोजित करें। साथ ही असम, मेघालय, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल जैसे सीमावर्ती राज्यों के माध्यम से सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत किया जाए।
यह भी पढ़ें- West Bengal: आरजी कर दुष्कर्म और हत्या केस में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, जानें क्यों बदल दिए गए जांच अधिकारी
वीजा व्यवस्था सामान्य करने की सिफारिश
समिति ने कहा कि जैसे ही हालात सामान्य हों, भारत को बांग्लादेश में वीजा सेवाओं को धीरे-धीरे सामान्य करना चाहिए। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच एक ऐसा तंत्र विकसित किया जाए, जो वीजा से जुड़ी समस्याओं का समाधान करे और वास्तविक यात्रियों को अनावश्यक परेशानी से बचाए।
864 किलोमीटर सीमा अब भी बिना बाड़
रिपोर्ट के अनुसार, भारत-बांग्लादेश की कुल 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा में से करीब 3,231 किलोमीटर हिस्से में बाड़ लगाई जा चुकी है, जबकि 864 किलोमीटर सीमा अब भी बिना बाड़ के है। इसका मुख्य कारण कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और नदी वाले क्षेत्र हैं।
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2,369 मामलों का सत्यापन अभी बाकी
समिति ने कहा कि वर्तमान में 2,369 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों के मामलों में उनकी राष्ट्रीयता की पुष्टि बांग्लादेश सरकार से होना बाकी है। समिति का मानना है कि दोनों देशों के बीच एक समर्पित तंत्र बनने से यह प्रक्रिया तेज होगी और लंबित मामलों का जल्द निपटारा हो सकेगा।
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भारतीय नागरिकों को गलती से न भेजा जाए
समिति ने इस बात पर भी जोर दिया कि जांच के दौरान पूरी सावधानी बरती जाए, ताकि किसी भारतीय नागरिक को गलती से बांग्लादेश न भेज दिया जाए। साथ ही हिरासत में रखे गए सभी लोगों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाए और कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन हो।
पश्चिम बंगाल और असम में ज्यादा चिंता
रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ का सबसे ज्यादा असर पश्चिम बंगाल और असम जैसे सीमावर्ती राज्यों में देखा जा रहा है। हालांकि अवैध प्रवासियों की पहचान और उन्हें वापस भेजने की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय और राज्य सरकारों की है, लेकिन विदेश मंत्रालय भी राष्ट्रीयता की पुष्टि और प्रत्यावर्तन में अहम भूमिका निभाता है।
बांग्लादेश के रास्ते चीनी सामान आने पर चिंता
समिति ने बांग्लादेश के रास्ते भारत में चीनी सामान, खासकर कपड़ों के कपड़े (फैब्रिक) आने पर भी चिंता जताई। रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ चीनी उत्पाद दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (SAFTA) के तहत बांग्लादेश को मिली व्यापारिक रियायतों का फायदा उठाकर भारत पहुंच रहे हैं। समिति के अनुसार, इससे भारतीय उद्योगों को नुकसान होता है और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है। इसलिए भारत सरकार को इस मुद्दे पर बांग्लादेश के सामने उच्च स्तर पर अपनी आपत्ति दर्ज करानी चाहिए।
व्यापार नियम और सख्त करने की सलाह
समिति ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और विदेश मंत्रालय से कहा है कि वे ऐसे सख्त नियम लागू करें, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि SAFTA या भविष्य में होने वाले किसी भी व्यापार समझौते का फायदा तीसरे देशों की कंपनियां गलत तरीके से न उठा सकें।
सांस्कृतिक रिश्तों को फिर मजबूत करने पर जोर
रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक कार्यक्रम, साहित्यिक सहयोग और युवा आदान-प्रदान जैसी पहल ने वर्षों से आपसी विश्वास बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। हालांकि हाल के घटनाक्रमों के कारण दोनों देशों के लोगों के बीच भरोसे का माहौल कुछ कमजोर हुआ है। समिति ने सुझाव दिया कि भारत और बांग्लादेश हर साल संयुक्त सांस्कृतिक कार्यक्रम, रवींद्रनाथ टैगोर–काजी नजरुल साहित्य महोत्सव, फिल्म समारोह और कला आदान-प्रदान जैसे कार्यक्रम आयोजित करें। साथ ही असम, मेघालय, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल जैसे सीमावर्ती राज्यों के माध्यम से सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत किया जाए।
यह भी पढ़ें- West Bengal: आरजी कर दुष्कर्म और हत्या केस में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, जानें क्यों बदल दिए गए जांच अधिकारी
वीजा व्यवस्था सामान्य करने की सिफारिश
समिति ने कहा कि जैसे ही हालात सामान्य हों, भारत को बांग्लादेश में वीजा सेवाओं को धीरे-धीरे सामान्य करना चाहिए। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच एक ऐसा तंत्र विकसित किया जाए, जो वीजा से जुड़ी समस्याओं का समाधान करे और वास्तविक यात्रियों को अनावश्यक परेशानी से बचाए।
864 किलोमीटर सीमा अब भी बिना बाड़
रिपोर्ट के अनुसार, भारत-बांग्लादेश की कुल 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा में से करीब 3,231 किलोमीटर हिस्से में बाड़ लगाई जा चुकी है, जबकि 864 किलोमीटर सीमा अब भी बिना बाड़ के है। इसका मुख्य कारण कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और नदी वाले क्षेत्र हैं।
केंद्र को ध्रुवीय राजदूत नियुक्त करने पर विचार करने की सिफारिश
वहीं, समिति ने केंद्र सरकार को 'पोलर एंबेसडर' (ध्रुवीय राजदूत) नियुक्त करने पर विचार करने की सिफारिश की है। शशि थरूर की अध्यक्षता वाली समिति का कहना है कि इससे आर्कटिक और अंटार्कटिक क्षेत्रों में भारत की विदेश नीति को मजबूती मिलेगी और 'पोलर डिप्लोमेसी' अधिक प्रभावी होगी। समिति ने इन क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक नीति बनाने और अंटार्कटिका में नए 'मैत्री' अनुसंधान केंद्र के निर्माण में तेजी लाने की भी सिफारिश की। रिपोर्ट में कहा गया कि समुद्र के बढ़ते जलस्तर और जलवायु परिवर्तन का भारत पर बड़ा असर पड़ सकता है, इसलिए इन क्षेत्रों में भारत की सक्रिय मौजूदगी जरूरी है।
वहीं, समिति ने केंद्र सरकार को 'पोलर एंबेसडर' (ध्रुवीय राजदूत) नियुक्त करने पर विचार करने की सिफारिश की है। शशि थरूर की अध्यक्षता वाली समिति का कहना है कि इससे आर्कटिक और अंटार्कटिक क्षेत्रों में भारत की विदेश नीति को मजबूती मिलेगी और 'पोलर डिप्लोमेसी' अधिक प्रभावी होगी। समिति ने इन क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक नीति बनाने और अंटार्कटिका में नए 'मैत्री' अनुसंधान केंद्र के निर्माण में तेजी लाने की भी सिफारिश की। रिपोर्ट में कहा गया कि समुद्र के बढ़ते जलस्तर और जलवायु परिवर्तन का भारत पर बड़ा असर पड़ सकता है, इसलिए इन क्षेत्रों में भारत की सक्रिय मौजूदगी जरूरी है।