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Report: ‘140 प्रमुख शहर रात में आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में 60% अधिक गर्म’, IIT भुवनेश्वर का दावा
Tue, 28 May 2024 05:22 PM IST
जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जलज मिश्रा
Updated Tue, 28 May 2024 05:22 PM IST
सार
कंक्रीट और डामर की सड़कें और फुटपाथ की सतहें दिन में गर्मी जमा करती हैं तो वहीं, शाम को वे गर्मी छोड़ती हैं। इससे रात में तापमान बढ़ जाता है।
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गर्मी का ताप।
- फोटो : amarujala
विस्तार
भारत के कई इलाके इन दिनों सूरज की ताप झेल रहे हैं। लोग गर्मी से बेहाल हैं। इस बीच आईआईटी भुवनेश्वर की एक रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शहरीकरण के कारण 140 से अधिक प्रमुख भारतीय शहर आस पास के ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले रात में अधिक तपते हैं। रात में शहरी क्षेत्रों के तापमान में 60 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है।
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यह शहर सबसे अधिक प्रभावित
कंक्रीट और डामर की सड़कें और फुटपाथ की सतहें दिन में गर्मी जमा करती हैं तो वहीं, शाम को वे गर्मी छोड़ती हैं। इससे रात में तापमान बढ़ जाता है। समय के साथ, यह गर्मी वर्षा और प्रदूषण सहित जलवायु के अन्य पहलुओं को प्रभावित करती है। शोध के अनुसार, रात में तापमान बढ़ने से अहमदाबाद, जयपुर और राजकोट सबसे अधिक प्रभावित हैं। वहीं, दिल्ली-एनसीआर चौथे तो पुणे पांचवे स्थान पर हैं।
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हर दशक में औसतन 0.26 डिग्री सेल्सियस गर्म
रिपोर्ट में कहा गया कि उत्तर-पश्चिमी, उत्तरपूर्वी और दक्षिणी क्षेत्र के शहरों में अन्य क्षेत्रों के मुकाबले रात के तापमान में अधिक स्पष्ट वृद्धि देखी गई है। रिपोर्ट में शामिल सभी शहरों में रात के समय तापमान बढ़ रहा है। यह हर दशक में औसतन लगभग 0.53 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है। रात के समय तापमान बढ़ना सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है। अध्ययन की अवधि के दौरान भारत का अधिकांश हिस्सा हर दशक में औसतन 0.26 डिग्री सेल्सियस गर्म हुआ। रिपोर्ट में तापमान को प्रभावी ढंग से कम करने के लिए अलग-अलग प्रयासों पर जोर डाला गया है।
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अन्य रिपोर्टों को भी देखें
वहीं, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई), नई दिल्ली की एक रिपोर्ट के अनुसार, शहर रात में उतने ठंडे नहीं हो रहे, जितने 2001-2010 के दौरान हुआ करते थे। वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (डब्ल्यूआरआई) इंडिया रॉस सेंटर के अनुसार, 2050 तक दुनिया भर में 10 में से सात लोग शहरी क्षेत्रों में रह सकते हैं। इसमें लगभग 90 प्रतिशत वृद्धि ग्लोबल साउथ में होगी। भारत में इसका सबसे अधिक असर होगा। डब्ल्यूआरआई इंडिया रॉस सेंटर के अनुसार, वर्तमान में भारत की 35 प्रतिशत आबादी यानी करीब 40 करोड़ लोग शहरी क्षेत्रों में रह रहे हैं। वहीं, 2050 तक दोगुनी होकर 80 करोड़ हो जाएगी।