स्टाइरीन लीक हो तो मुंह को गीले रुमाल से ढक हवा के विपरीत दिशा में भागें
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विशाखापट्टनम में लीक हई स्टाइरीन गैस की चपेट में 11 लोगों की मौत के बाद गृहमंत्रालय ने इस गैस से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसमें गृहमंत्रालय ने बताया कि आपातकालीन स्थिति में गैस लीक होते ही लोगों को मुंह को गीले रुमाल या कपड़े से ढक कर हवा की विपरीत दिशा में भागते हुए उस जगह से निकलना चाहिए। अगर गैस पेट में चली गई है तो खूब पानी पियें और उल्टी करने से बचें। वहीं आंख व नाक को करीब 15 मिनट तक पानी से धोएं।
गृहमंत्रालय के मुताबिक स्टाइरीन गैस के संपर्क में आने पर अलग-अलग असर दिखते हैं। पेट में गैस चली जाए तो पेट में भारीपन महसूस होता है। वहीं त्वचा और आंख के संपर्क में आने से जलन होेने लगती है। वहीं नाक से शरीर में प्रवेश करते ही दम घुटने लगता है और सांस लेने में दिक्कत होती है। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से तंत्रिका तंत्र और किडनी संबंधी बीमारी होने का खतरा होता है। मंत्रालय की एडवाइजरी के मुताबिक संयंत्रों को इस गैस के लीक होने की आपात स्थिति से बचने के लिए कई सारे सुरक्षात्मक उपकरण लगाने होते हैं। इसमें कहा गया कि गैस लीक के दौरान खुले में रखे खाद्य पदार्थों को खाने से बचें। सुरक्षित स्थान पर पहुंचते ही कपड़े बदलें और तुरंत हाथों को अच्छी तरह धोएं।
गृहमंत्रालय ने कहा, जिन संयंत्रों में गैस का इस्तेमाल होता है वहां सभी कर्मचारियों को सरकार द्वारा आयोजित सभी जागरूकता कार्यक्रमों में हिस्सा लेना चाहिए। साथ ही संयंत्रों में लोगों की सुरक्षित निकासी की व्यवस्था करनी चाहिए। वहां काम करने वाले लोगों और उनके परिजनों को इस जहरीली गैस के बारे में पूरी जानकारी देनी चाहिए साथ ही प्राथमिक उपचार की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए। एडवाइजरी के मुताबिक मिट्टी या पानी में मिलने पर यह गैस बहुत जल्दी भाप में बदल जाती है।
जबकि हवा में यह धीरे धीरे हाईड्रोक्सिल रेडिकल्स के संपर्क में आकर खत्म होती है। हवा में इसका आधा अस्तित्व करीब एक दिन तक बना रहता है। अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इस गैस के संपर्क में आने से कैंसर का भी खतरा होता है। स्टाइरीन एक बिना रंग वाली ज्वलनशील गैस है जिसका इस्तेमाल पोलीस्टाइरीन प्लास्टिक, रबड़ और फाइबर ग्लास बनाने में होता है। इसका इस्तेमाल पाइप, इंसुलेशन और गाड़ियों के पुर्जे बनाने में होता है।
- पूरी सावधानी के साथ संयंत्र दोबारा खोलें
केंद्रीय उर्वरक मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने सभी निजी एवं सार्वजनिक रसायन निर्माताओं से संयंत्र दोबारा खोलते वक्त पूरी सावधानी बरतने और सभी सुरक्षा उपाय अपनाने की हिदायत दी है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी सभी कंपनियों के लिए अलग से दिशा-निर्देश जारी किए हैं।