केंद्रीय मंत्री बोले- अगर राम मंदिर भारत में नहीं बनेगा तो क्या पाकिस्तान में बनेगा?
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भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राम मंदिर मसले पर सियासत को एक बार फिर गर्म कर दिया है। ऑनलाइन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्रीय मंत्री ने राम मंदिर पर शिया समुदाय ने अपना समर्थन देने का ऐलान किया है, इसके साथ ही उन्होने सुन्नियों के भी समर्थन देने की उम्मीद जताई है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने आगे कहा कि हिंदू और मुसलमान राम मंदिर के निर्माण के लिए आगे आएंगे। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि अगर राम मंदिर भारत में नहीं बनेगा तो कहां पाकिस्तान में बनेगा? उन्होंने यह बातें शनिवार (3 जनवरी) को ठाणे में 25वें राष्ट्रीय कवि सम्मेलन के उद्घाटन के मौके पर कही।
Shias gave their support for Ram Temple, Sunnis must lend their support too. Every Indian is descendant of Ram. Hindus & Muslims will come together to build the temple. If Ram Temple is not built in India where else will that be? Pakistan?: Union Minister Giriraj Singh (3.2.2018) pic.twitter.com/Crhdp30GUL
— ANI (@ANI) February 4, 2018विज्ञापन
बता दें कि पिछले साल नवंबर महीने में उत्तर प्रदेश शिया केंद्रीय वक्फ बोर्ड ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थल को लेकर दशकों से चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए उच्चतम न्यायालय में एक प्रपोजल सौंपते हुए कहा था कि अयोध्या में मंदिर बनाया जा सकता है और मस्जिद लखनऊ में बनाई जा सकती है।
केंद्रीय मंत्री ने देश की आबादी के बारे में बोलते हुए कहा कि मैं हर दिन सोशल मीडिया पर लिखता हूं कि जनसंख्या वृद्धि विकास के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा है। चीन में हर मिनट 11 बच्चे पैदा होते हैं और भारत में 29। दुनिया की 18% फीसदी आबादी भारत में है।
I've been posting on social media everyday. Rise in population is the biggest hindrance to development. In China 11 children are born every minute & in India number is 29. 18% of world's population is in India: Union Minister Giriraj Singh on his tweet on population (03.02.2018) pic.twitter.com/v87NP7MKL9
— ANI (@ANI) February 4, 2018
गौरतलब है कि विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगडिया राम मंदिर मुद्दे का समाधान बेशक संसद में कानून के जरिए चाहते हैं, मगर विहिप अभी केंद्र सरकार की मुश्किलें बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। अभी सरकार पर दबाव बनाने के बजाय विहिप को शीर्ष न्यायालय के फैसले का इंतजार है। हालांकि, राम मंदिर मामले पर 8 फरवरी से सर्वोच्च न्यायालय में शुरू होने वाली निर्णायक सुनवाई से पहले विहिप ने मीडिया में अपना पक्ष रखते हुए मामले पर माहौल गरमाने की कवायद शुरू कर दी है।
विहिप ने स्पष्ट कर दिया है कि राम मंदिर पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला चाहे जो भी हो मामला अब तय हो जाना चाहिए। विहिप चाहती है कि राम मंदिर का मामला किसी भी तरह न्यायालय की परिधि से बाहर आ जाए, ताकि सड़क पर फैसला होने का रास्ता साफ हो जाए। विहिप के अंतरराष्ट्रीय महासचिव चंपत राय ने कहा कि सरकार को जो भी फैसला देना है दे, बाद में सरकार और देश की जनता तय करेगी। हालांकि उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि राम मंदिर को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई की अंतिम बाजी भी वे ही जीतेंगे।
विहिप महासचिव का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय सबूत के आधार पर ही अपना फैसला सुनाएगी और तमाम वैज्ञानिक और अन्य पद्धतियों से यह प्रमाणित हो गया है कि अयोध्या में विवादित रामजन्म भूमि पर मंदिर था। उन्होंने कहा कि यदि न्यायालय किसी से प्रेरित या प्रभावित होता है तो वह भी मंजूर है, लेकिन उसे जो भी फैसला देना है वह जल्द दे हमें हर फैसला मंजूर होगा। बाद में देश की जनता और सरकार तय करेगी। बतौर चंपत राय, हम चाहते हैं कि सड़क पर फैसला होने का रास्ता साफ हो। पहले हाई कोर्ट ने फैसला किया। सूट खारिज की और राहत नहीं देने की बात की।