कोरोनावायरस महामारी बनी तो पैदा हो सकता है वैश्विक मंदी का खतरा : मूडीज एनालिटिक्स
मूडीज एनालिटिक्स ने कहा है कि चीन की अर्थव्यवस्था के बाद कोरोना अब पूरी दुनिया के लिए खतरा बन चुका है। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था को कई तरीके से नुकसान पहुंचा रहा है। बंद कारखाने चीन की विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भर देशों और कंपनियों के लिए बड़ी समस्या हैं।
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कोरोनावायरस संक्रमण का असर न सिर्फ चीन की अर्थव्यवस्था पर बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। मूडीज एनालिटिक्स का कहना है कि कोरोनावायरस अगर महामारी का रूप धारणा कर लेता है तो वैश्विक मंदी का खतरा पैदा हो सकता है। यह संक्रमण अब इटली और कोरिया में भी पहुंच चुका है। ऐसे में इसके महामारी का रूप लेने की आशंका बढ़ गई है। कोरोनावायरस का आधिकारिक नाम कोविड-19 है।
मूडीज एनालिटिक्स के मुख्य अर्थशास्त्री मार्क जैंडी ने बुधवार को कहा कि कोरोनावायरस से चीन की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। इस पर काबू नहीं पाया गया तो स्थिति और भयावह हो सकती है। अब यह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन चुका है। इसकी शुरुआत दिसंबर, 2019 में चीन के वुहान से हुई थी। इसके बाद से दुनियाभर के हजारों लोग इसकी चपेट में आए हैं, जबकि 2,663 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
यात्रा-पर्यटन कारोबार पूरी तरह ठप
मूडीज एनालिटिक्स का कहना है कि कोविड-19 वैश्विक अर्थव्यवस्था को कई तरीके से नुकसान पहुंचा रहा है। चीन में कारोबार के लिहाज से यात्रा और पर्यटन पूरी तरह ठप हो चुका है। वैश्विक एयरलाइंस कंपनियों ने चीन के लिए उड़ानें रद्द कर दी हैं। क्रूज का परिचालन भी अधिकांश एशिया-प्रशांत मार्गों पर ठप है। अमेरिका जैसे प्रमुख यात्रा गंतव्यों के लिए भी समस्या खड़ी हो गई है। चीन से सालाना 30 लाख पर्यटक अमेरिका जाते हैं। अमेरिका में विदेशी पर्यटकों की ओर से खर्च करने के मामले में चीन के पर्यटक सबसे आगे हैं। इटली और मिलान जैसे शहरों के संक्रमण की चपेट में आने से यूरोपीय देशों की यात्रा पर भी असर पड़ा है।
आपूर्ति प्रभावित होने से बढ़ेंगी कीमतें
मूडीज एनालिटिक्स ने कहा कि कारखानों में कामकाज ठप होना चीन की विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भर देशों और कंपनियों के लिए बड़ी समस्या हैं। एपल, नाइक और जनरल मोटर्स जैसी अमेरिकी कंपनियां इससे प्रभावित हुई हैं। आपूर्ति घटने से कुछ वस्तुओं की कीमतों बढ़ेंगी। जैंडी ने कहा कि चीन में मांग घटने से अमेरिकी निर्यात भी प्रभावित होगा। पिछले साल दोनों देशों के बीच हुए पहले चरण के समझौते के तहत चीन को अमेरिका से आयात बढ़ाना था। उन्होंने कहा कि पहले से यह सवाल खड़ा हो रहा था कि चीन वास्तव में अमेरिका से कितनी खरीद करता है। कोविड-19 के बाद यह सवाल और बड़ा हो गया है।