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कोरोना वायरस: देश के हर राज्य में नाइट कर्फ्यू लगाने की तैयारी, वीकेंड पर लग सकता है फुल लॉकडाउन!
Thu, 08 Apr 2021 03:47 PM IST
Harendra Chaudhary
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Thu, 08 Apr 2021 03:47 PM IST
सार
- सार्वजनिक जगहों पर जहां होगी भीड़ उन्हें बंद करने का विचार
- राज्यों की कोविड मॉनिटरिंग कमेटी के साथ हुई बैठक में राज्यों ने बताई योजना
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लॉकडाउन
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
विस्तार
जिस रफ्तार से देश में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, अगर यही रफ्तार अगले कुछ दिनों तक जारी रही तो देश के सभी राज्यों के अहम शहरों और राजधानियों में नाइट कर्फ्यू लगाया जाएगा। इसके अलावा संक्रमण को रोकने के लिए मध्यप्रदेश की तर्ज पर वीकेंड पर पूरी तरह लॉकडाउन किया जा सकता है। रूटीन में होने वाली केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ बैठक में राज्यों के जिम्मेदार अधिकारियों ने कोरोना को नियंत्रित करने की योजना के बारे में चर्चा की है।
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पंजाब, महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्यों में रात का कर्फ्यू शुरू कर दिया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक सभी राज्यों को स्पष्ट दिशा निर्देश दिए गए हैं कि वह कोविड से बचाव को लेकर जो सुरक्षात्मक तरीका अपना सकते हैं उसको अपनाएं। इस संबंध में देश के ज्यादातर राज्यों ने नाइट कर्फ्यू को तरजीह दी है। अधिकारियों के मुताबिक आने वाले समय में अगर कोरोना के ऐसे ही मामले लगातार बढ़ते रहे, तो देश के ज्यादातर राज्यों में नाइट कर्फ्यू लगाया जा सकता है।
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अधिकारियों का कहना है कुछ राज्यों ने इस बात का भी सुझाव दिया कि अगर नाइट कर्फ्यू से भी हालात नहीं सुधरे तो वीकेंड पर पूर्णतया लॉकडाउन की स्थिति की जा सकती है। इसके अलावा कई राज्यों और विशेषज्ञों ने पब्लिक प्लेस, खासतौर से उन जगह पर जहां सबसे ज्यादा भीड़ आती है, ऐसी सार्वजनिक जगहों को भी लॉकडउन की स्थिति में रखा जा सकता है। वहीं राज्यों ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि वह कमर्शियल एक्टिविटी को रोकना नहीं चाहते हैं।
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दरअसल पिछले साल कोरोना की पहली लहर में लॉकडाउन के कुछ महीनों का असर आज तक देखा जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि यही वजह है कि इस बार ऐसे कोई भी दिशानिर्देश जारी नहीं किए जा रहे हैं, जिससे कमर्शियल एक्टिविटी बंद हो और लोगों के रोजगार पर असर पड़े। उन्होंने बताया कि राज्यों की हुई समीक्षा बैठक में इस बात को लेकर जोर दिया गया कि राज्य अपने हिसाब से माइक्रो कंटेनमेंट जोन से लेकर दूसरी और सख्तियां बरत सकते हैं।