फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   IECC report There may be huge power cut in country after three years demand increased over six percent

आईईसीसी रिपोर्ट: देश में तीन साल बाद हो सकती है बिजली की भारी कटौती, 6.5 फीसदी बढ़ी मांग

Mon, 12 Aug 2024 05:42 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 12 Aug 2024 05:42 AM IST
सार

बिजली की बढ़ती मांग में 2023 के दौरान 6.5 की वृद्धि दर्ज की गई थी। यह वृद्धि वैश्विक रूप से बढ़ रही बिजली की मांग से ज्यादा है। उल्लेखनीय है कि इस दौरान वैश्विक स्तर पर बिजली की मांग में 2.2 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है।

विज्ञापन
IECC report There may be huge power cut in country after three years demand increased over six percent
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई

विस्तार

भारत में जिस तेजी से बिजली की मांग बढ़ रही है उसके कारण लोगों को आने वाले वर्षों में भारी  बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है। इंडिया एनर्जी एंड क्लाइमेट सेंटर (आईईसीसी) ने अपनी नई टेक्निकल रिपोर्ट में खुलासा किया है कि 2027 तक भारत को खासतौर पर शाम के समय 20 से 40 गीगावाट तक बिजली की कमी का सामना करना पड़ सकता है। यह स्थिति तब भी उत्पन्न होगी जब वर्तमान में निर्माणाधीन सभी थर्मल और पनबिजली परियोजनाएं योजना के अनुसार समय पर पूरी हो जाएंगी।

विज्ञापन


भारत की योजना 2027 तक अक्षय ऊर्जा में 100 गीगावाट और पावर क्षमता में 28 गीगावाट तक इजाफा करने की है। मौजूदा समय में देश की कुल ऊर्जा उत्पादन क्षमता 446.2 गीगावाट है। इसमें से 48.8 फीसदी ऊर्जा, कोयला आधारित है। इसके अलावा 19.2 फीसदी सौर, 10.5 फीसदी पवन ऊर्जा और 10.5 फीसदी पनबिजली पर निर्भर है। शेष अन्य स्रोतों जैसे न्यूक्लियर, तेल एवं गैस और बायोपावर से प्राप्त हो रही है।
विज्ञापन


वैश्विक मांग से ज्यादा बढ़ रही भारत में खपत
रिपोर्ट के अनुसार, बिजली की बढ़ती मांग में 2023 के दौरान 6.5 की वृद्धि दर्ज की गई थी। यह वृद्धि वैश्विक रूप से बढ़ रही बिजली की मांग से ज्यादा है। उल्लेखनीय है कि इस दौरान वैश्विक स्तर पर बिजली की मांग में 2.2 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। देश में 2019 से 2024 के बीच पीक समय में बिजली की मांग में सालाना साढ़े छह फीसदी की वृद्धि हुई है। मई 2019 में पीक समय में बिजली की मांग 182 गीगावाट थी जो मई 2024 में 68 गीगावाट के इजाफे के साथ बढ़कर 250 गीगावाट तक पहुंच गई। यदि यह प्रवत्ति जारी रहती है तो पीक समय में बिजली की मांग 2027 तक 50 से 80 गीगावाट तक बढ़ सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन




सौर ऊर्जा व भंडारण क्षमता बढ़ाना बेहतर विकल्प
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि बिजली की इस कमी को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा के साथ भंडारण क्षमता को बढ़ाने पर ध्यान देना सबसे अच्छा विकल्प है। सौर ऊर्जा संयंत्रों को नए थर्मल और हाइड्रो प्लांट्स की तुलना में अधिक तेजी से स्थापित किया जा सकता है। इसके अलावा 2027 तक 100 से 120 गीगावाट नई सौर ऊर्जा जोड़ने से जिसमें 50 से 100 गीगावाट की भंडारण क्षमता चार से छह घंटे होगी, बिजली की कमी से निपटने में मदद मिल सकती है। अनुमान के अनुसार देश में बिजली की मांग 2047 तक चार गुना बढ़ सकती है।

सालाना मांग छह फीसदी से अधिक दर से बढ़ेगी तो गहराएगा संकट
17 से 31 मई 2024 के बीच भीषण गर्मी के दौरान देश की बिजली व्यवस्था गहरे दबाव में थी। हालांकि, इस दौरान पन बिजली को छोड़कर 140 गीगावाट से अधिक अक्षय ऊर्जा क्षमता मौजूद थी, लेकिन मई 2024 की शुरुआत में शाम के पीक समय के दौरान केवल आठ से दस गीगावाट अक्षय ऊर्जा उत्पादन ही उपलब्ध था। बिजली की मांग में हो रही यह वृद्धि 2025 में भी जारी रह सकती है। हालात को देखते हुए आईईसीसी का कहना है कि यदि सालाना मांग छह फीसदी से अधिक की दर से बढ़ती है तो देश को आने वाले वर्षों में बिजली की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed