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Artificial Intelligence: स्वास्थ्य क्षेत्र में AI के इस्तेमाल के लिए नैतिक ढांचा जरूरी, इन चुनौतियों की आशंका
Mon, 27 Mar 2023 05:57 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Mon, 27 Mar 2023 05:57 AM IST
सार
टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) के प्रमुख डॉ. एनके अरोड़ा ने कहा कि एआई पर दिशा-निर्देश जारी करने का उद्देश्य एक नैतिक ढांचा मुहैया करवाना है, जिससे जैव चिकित्सा व स्वास्थ्य क्षेत्र में विकास और एआई आधारित समाधान मिल सके।
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Artificial intelligence
विस्तार
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) व स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) का कहना है कि स्वास्थ्य के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) काफी हद तक मानव प्रतिभागियों से प्राप्त डाटा पर निर्भर करता है। इन्हीं सब बातों को देखते हुए जैव चिकित्सा और स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई के इस्तेमाल को लेकर एक नैतिक ढांचा होना काफी जरूरी है, जो इससे जुड़े मुद्दों का समाधान करे। इसी को देखते हुए एआई के उपयोग पर आईसीएमआर ने पहली बार देश में नैतिक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इससे सभी हितधारकों को फायदा होगा। दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि इसमें संभावित पक्षपात, डाटा प्रबंधन, व्याख्या, स्वायत्तता, जोखिम को कम करना, पेशेवर क्षमता, डाटा साझा करना और गोपनीयता से संबंधित अतिरिक्त चिंता रहती है।
ताकि मिल सके समाधान
टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) के प्रमुख डॉ. एनके अरोड़ा ने कहा कि एआई पर दिशा-निर्देश जारी करने का उद्देश्य एक नैतिक ढांचा मुहैया करवाना है, जिससे जैव चिकित्सा व स्वास्थ्य क्षेत्र में विकास और एआई आधारित समाधान मिल सके।
इसलिए जारी किए गए दिशा-निर्देश
आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा, भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई तकनीक को अपनाने में काफी तेजी आई है। फिर भी डाटा से जुड़ी इस प्रौद्योगिकी में पारदर्शिता और व्याख्यात्मकता, जिम्मेदारी को लेकर स्पष्टता, जवाबदेही और निरीक्षण, पूर्वाग्रह और भेदभाव जैसी नैतिक चुनौतियों की आशंका है। डीएचआर और आईसीएमआर ने इस क्षेत्र में शोध में एआई के इस्तेमाल को लेकर नैतिक सिद्धांतों की जरूरत महसूस की इसीलिए नैतिक दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।
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ताकि मिल सके समाधान
टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) के प्रमुख डॉ. एनके अरोड़ा ने कहा कि एआई पर दिशा-निर्देश जारी करने का उद्देश्य एक नैतिक ढांचा मुहैया करवाना है, जिससे जैव चिकित्सा व स्वास्थ्य क्षेत्र में विकास और एआई आधारित समाधान मिल सके।
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इसलिए जारी किए गए दिशा-निर्देश
आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा, भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई तकनीक को अपनाने में काफी तेजी आई है। फिर भी डाटा से जुड़ी इस प्रौद्योगिकी में पारदर्शिता और व्याख्यात्मकता, जिम्मेदारी को लेकर स्पष्टता, जवाबदेही और निरीक्षण, पूर्वाग्रह और भेदभाव जैसी नैतिक चुनौतियों की आशंका है। डीएचआर और आईसीएमआर ने इस क्षेत्र में शोध में एआई के इस्तेमाल को लेकर नैतिक सिद्धांतों की जरूरत महसूस की इसीलिए नैतिक दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।
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