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रामसेतु मानव निर्मित है या कुदरती, सुलझेगी गुत्थी?
amarujala.com-presented by: संदीप भट्ट
Updated Sat, 25 Mar 2017 09:28 AM IST
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रामसेतु प्राकृतिक है या इसे किसी इंसान ने बनाया है इस गुत्थी को सुलझाने के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च (आईसीएचआर) शोध करेगा। शोध के जरिये यह पता लगाया जाएगा कि रामसेतु से जुड़ी बातें मिथ हैं या फिर हकीकत। शोध के काम में देशभर से 20 रिसर्च स्कॉलर को शामिल किया जाएगा। शोध में भारतीय पुरातत्व विभाग के पूर्व निदेशक भी सहयोग करेंगे।
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत आने वाले निकाय आईसीएचआर के चेयरमैन प्रो. वाई सुदर्शन राव ने शुक्रवार को बताया कि रामसेतु मानव निर्मित है या नहीं, इस बात पर अक्सर विवाद होता है। इसी के चलते आईसीएचआर इस पर दो महीने का पायलट प्रोजेक्ट अक्तूबर से नवंबर में शुरू करने जा रहा है। इस शोध में जो भी बातें सामने आएंगी, उन्हें प्रकाशित किया जाएगा। प्रो. राव के मुताबिक अभी तक रामसेतु को लेकर कई बयान आते रहे हैं, लेकिन उससे संबंधित कोई पुख्ता सबूत नहीं है।
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दो महीने का शोध असम स्थित सिल्चर यूनिवर्सिटी के आर्कियॉलजी के प्रोफेसर व भारतीय पुरातत्व विभाग के पूर्व निदेशक आलोक त्रिपाठी की अध्यक्षता में शुरू होगा। रिसर्च स्कॉलर्स के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञापन निकाला जाएगा। इस प्रोजेक्ट के तहत यूनेस्को से गोताखोरी का लाइसेंस लेने के बाद पुद्दुचेरी में पानी के नीचे कोर्स भी करवाया जाएगा।
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धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ भाजपा का भी मानना है कि रामसेतु को भगवान श्रीराम ने बनवाया था। इसी के चलते वर्ष 2007 में रामसेतु पर विवाद शुरू हुआ था, जब यूपीए सरकार ने प्रस्ताव दिया था कि सेतुसमुद्रम परियोजना के लिए रामसेतु के अलावा कोई विकल्प आर्थिक तौर पर लाभदायक नहीं है। हालांकि धार्मिक और पर्यावरण कार्यकर्ता इस परियोजना का विरोध कर रहे थे। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया था।
ईसा पूर्व दस लाख साल पहले भारत में सभ्यता व संस्कृति के विकास पर मंथन
आईसीएचआर के सदस्य सचिव आनंद शंकर सिंह के मुताबिक, इस संबंध में दिल्ली में 27 से 29 मार्च तक तीन दिवसीय सेमिनार भी आयोजित किया जा रहा है। इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य डार्क पीरियड की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की जाएगी। इसके अलावा ईसा पूर्व दस लाख साल पहले भारत में सिविलाइजेशन और कल्चर के विकास की बात होगी। इस सेमिनार में अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ वैदिक स्टडीज के डायरेक्टर डेविड फ्रॉली सहित ऑर्कियोलॉजी ऑफ इंडिया के पूर्व डीजी बीबी लाल सहित अन्य 26 स्कॉलर अपने रिसर्च पेपर पेश करेंगे।