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कार्रवाई: सरकार ने मलयालम न्यूज चैनल पर फिर लगाया प्रतिबंध, हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश पर लगाई दो दिन की रोक
Mon, 31 Jan 2022 07:59 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Mon, 31 Jan 2022 07:59 PM IST
सार
केंद्र सरकार इससे पहले 2020 में मीडियावन चैनल पर प्रतिबंध लगा चुकी है। तब चैनल पर दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के गलत तरह से कवरेज करने का आरोप लगा था।
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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय।
- फोटो : Social Media
विस्तार
केंद्र सरकार ने सोमवार को मलयालम न्यूज चैनल मीडियावन के टेलिकॉस्ट पर प्रतिबंध लगा दिया। सरकार ने अपने इस कदम के पीछे सुरक्षा कारणों को वजह बताया। हालांकि, केंद्र के इस आदेश के लागू होने पर केरल हाईकोर्ट ने दो दिन की रोक लगा दी है।
सरकार ने क्यों उठाया चैनल पर प्रतिबंध लगाने का फैसला?
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों ने इस बात की तो पुष्टि की कि चैनल को प्रतिबंधित करने का फैसला सुनाया गया। हालांकि, उन्होंने इससे जुड़ी और जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया।
सरकार पहले भी लगा चुकी है चैनल पर प्रतिबंध
केंद्र सरकार इससे पहले 2020 में मीडियावन चैनल पर प्रतिबंध लगा चुकी है। तब चैनल पर दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के गलत तरह से कवरेज करने का आरोप लगा था। आईबी मंत्रालय ने कहा था कि चैनल की कवरेज इस तरह की थी कि इसमें सिर्फ पूजास्थलों पर हुए हमलों को दिखाया गया और कवरेज एक समुदाय की तरफ झुकी हुई थी।
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बैन को लेकर क्या रहा चैनल का बयान?
मीडियावन के टेलिकास्ट पर लगे प्रतिबंधों को लेकर चैनल के एडिटर प्रमोद रमन ने बयान जारी किया। उन्होंने कहा, "चैनल पर लगे बैन पर सरकार जानकारी नहीं दे रही।" हाईकोर्ट में मीडिया ग्रुप का पक्ष रख रहे वकील के राकेश ने कहा कि उन्हें सोमवार को दोपहर एक बजे मंत्रालय का आदेश मिला और 1.45 बजे हमने तत्काल सुनवाई के लिए याचिका दायर कर दी।
प्रतिबंध हटाने पर क्या रहा हाईकोर्ट का पक्ष?
केरल हाईकोर्ट के जज जस्टिस एन नगरेश ने मामले की सुनवाई करते हुए चैनल से उसका पक्ष पूछा। इस पर मीडिया ग्रुप के वकीलों ने कहा कि उनका चैनल किसी भी तरह की देशविरोधी गतिविधि में शामिल नहीं रहा है। इसलिए केंद्र सरकार को तुरंत अपना आदेश वापस लेने के निर्देश दिए जाएं।
इसके बाद जज ने केंद्र से चैनल को बैन करने की वजह पूछी। हालांकि, इस पर सहायक सॉलिसिटर जनरल एस मनु ने कहा कि वे केंद्र की तरफ से मामले में निर्देश मिलने का इंतजार कर रहे हैं, इसलिए कोर्ट उन्हें पक्ष रखने का समय दे। एएसजी की इस मांग के बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई बुधवार को रख दी और केंद्र के आदेश पर बुधवार तक रोक लगा दी।
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सरकार ने क्यों उठाया चैनल पर प्रतिबंध लगाने का फैसला?
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों ने इस बात की तो पुष्टि की कि चैनल को प्रतिबंधित करने का फैसला सुनाया गया। हालांकि, उन्होंने इससे जुड़ी और जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया।
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सरकार पहले भी लगा चुकी है चैनल पर प्रतिबंध
केंद्र सरकार इससे पहले 2020 में मीडियावन चैनल पर प्रतिबंध लगा चुकी है। तब चैनल पर दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के गलत तरह से कवरेज करने का आरोप लगा था। आईबी मंत्रालय ने कहा था कि चैनल की कवरेज इस तरह की थी कि इसमें सिर्फ पूजास्थलों पर हुए हमलों को दिखाया गया और कवरेज एक समुदाय की तरफ झुकी हुई थी।
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बैन को लेकर क्या रहा चैनल का बयान?
मीडियावन के टेलिकास्ट पर लगे प्रतिबंधों को लेकर चैनल के एडिटर प्रमोद रमन ने बयान जारी किया। उन्होंने कहा, "चैनल पर लगे बैन पर सरकार जानकारी नहीं दे रही।" हाईकोर्ट में मीडिया ग्रुप का पक्ष रख रहे वकील के राकेश ने कहा कि उन्हें सोमवार को दोपहर एक बजे मंत्रालय का आदेश मिला और 1.45 बजे हमने तत्काल सुनवाई के लिए याचिका दायर कर दी।
प्रतिबंध हटाने पर क्या रहा हाईकोर्ट का पक्ष?
केरल हाईकोर्ट के जज जस्टिस एन नगरेश ने मामले की सुनवाई करते हुए चैनल से उसका पक्ष पूछा। इस पर मीडिया ग्रुप के वकीलों ने कहा कि उनका चैनल किसी भी तरह की देशविरोधी गतिविधि में शामिल नहीं रहा है। इसलिए केंद्र सरकार को तुरंत अपना आदेश वापस लेने के निर्देश दिए जाएं।
इसके बाद जज ने केंद्र से चैनल को बैन करने की वजह पूछी। हालांकि, इस पर सहायक सॉलिसिटर जनरल एस मनु ने कहा कि वे केंद्र की तरफ से मामले में निर्देश मिलने का इंतजार कर रहे हैं, इसलिए कोर्ट उन्हें पक्ष रखने का समय दे। एएसजी की इस मांग के बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई बुधवार को रख दी और केंद्र के आदेश पर बुधवार तक रोक लगा दी।