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जब पूर्व पीएम ने आईबी से मांगी रिफॉर्म्स विरोधी अपने ही सांसदों-मंत्रियों की लिस्ट

Sat, 25 Jun 2016 05:45 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 25 Jun 2016 05:45 PM IST
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IB gave Narasimha Rao list of Congmen, ministers against 1991 reforms.
पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। जानकारी के मुताबिक करीब 25 साल पहले, जब 1991 में उनकी सरकार बनी तो विशेष आर्थिक सुधार के लिए उन्होंने खास योजना बनाई।
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उन्होंने इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) से उन मंत्रियों और सांसदों की लिस्ट मांगी जो विशेष आर्थिक सुधार के खिलाफ थे। इसके जवाब में आईबी ने उन्हें विस्तृत रिपोर्ट भेजी थी। आईबी ने राज्यसभा और लोकसभा के उन सांसदों की लिस्ट तत्कालीन प्रधानमंत्री राव को दी जो कांग्रेस के होते हुए भी रिफॉर्म्स के खिलाफ थे।
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रिपोर्ट से साफ है कि राव सरकार ने 4 बड़े आर्थिक सुधार पर ध्यान दिया। ये सुधार थे:-
1- व्यापार और वाणिज्य के उदारीकरण, उद्योग के विनियंत्रण
2- बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रवेश उदार, विदेशी निवेश
3- सार्वजनिक क्षेत्र के कमजोर पड़ने पर निजीकरण
4- उर्वरक सब्सिडी और कृषि नीति में उदारीकरण

किताब 'हॉफ लॉयन: हाउ पीवी नरसिम्हा राव ट्रांसफॉर्म्ड इंडिया' में खुलासा

IB gave Narasimha Rao list of Congmen, ministers against 1991 reforms.
आईबी की लिस्ट में व्यापार और वाणिज्य के उदारीकरण का विरोध करने वाले 55 सांसदों के नाम शामिल थे। इनमें 7 मंत्री थे, जिनमें बलराम जाखड़ और माधवराव सिंधिया भी शामिल थे। केके बिड़ला समेत 6 कांग्रेसी सांसदों ने मल्टीनेशनल कंपनियों के भारत में प्रवेश का विरोध किया था। ये सारे खुलासे लेखक विनय सीतापति की आने वाली किताब 'हॉफ लॉयन: हाउ पीवी नरसिम्हा राव ट्रांसफॉर्म्ड इंडिया' में किया गया है।

किताब में खुलासा हुआ है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के निजीकरण के खिलाफ 18 सांसद थे। उर्वरक सब्सिडी के खिलाफ 20 सांसद थे। 22 सांसद, कांग्रेस-बीजेपी के बीच सहमति  के बाद रिफॉर्म्स के खिलाफ थे। इनमें अर्जुन सिंह और दिग्विजय सिंह भी शामिल थे।

आईबी की रिपोर्ट सामने आने के बाद पता चलता है कि आखिर नरसिम्हा राव आर्थिक सुधार लागू करने के लिए कितने उत्सुक थे। इसके लिए उन्हें अपनी पार्टी के लोगों के खिलाफ भी गए। हालांकि जब लगातार विरोध के सुर तेज होते गए उन्होंने खुद तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह को आगे कर दिया। इतना ही नहीं बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद उन्होंने सोनिया गांधी के आवास पर नजर रखने के लिए कहा था। इतना ही नहीं उन्होंने आईबी से वह रिपोर्ट भी मांगी थी जिसमें वह जानना चाहते थे कि आखिर उनकी पार्टी के कितने सांसद उनके साथ हैं और कितने सांसद सोनिया गांधी के साथ।
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