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आईएएस का 'खेला': 40 लाख में राजपत्रित अधिकारी का पद; विला बुक किया, फिर परीक्षा से पहले रटाए 80 सवालों के जवाब

Thu, 08 Oct 2026 03:07 PM IST
पवन पांडेय डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Thu, 08 Oct 2026 03:07 PM IST
सार

ईडी ने कर्नाटक में केपीएससी की वेटनरी ऑफिसर्स भर्ती परीक्षा में कथित बड़े भर्ती घोटाले का खुलासा किया है। जांच में प्रश्नपत्र और 80 सवालों की उत्तर कुंजी लीक कर उम्मीदवारों से 20-50 लाख रुपये तक रिश्वत लेने की बात सामने आई। केपीएससी के निलंबित चेयरमैन शिवशंकरप्पा साहूकार, सदस्य बीवी गीता और तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आईएएस ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

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IAS scam: Gazetted officer post for ₹40 lakh; answers to 80 questions were memorized before exam.
ED

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का बंगलूरू जोनल ऑफिस, कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन (केपीएससी) द्वारा 400 पदों के लिए आयोजित वेटनरी ऑफिसर्स भर्ती परीक्षा में हुई गड़बड़ियों और उससे हुई अवैध कमाई की जांच कर रहा है। यह जांच बंगलूरू के विधान सौधा पुलिस स्टेशन में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर की जा रही है, जिनमें भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 318(3), 318(4), 336(2), 336(3) और 340(2) के तहत अपराधों का ज़िक्र है। अब तक की जांच और सबूतों से पता चला है कि केपीएससी भर्ती प्रक्रिया, खासकर वेटनरी ऑफिसर्स भर्ती परीक्षा में हेरफेर करके अवैध कमाई करने का एक संगठित तरीका अपनाया गया था। सबूतों के आधार पर, केपीएससी के सदस्यों और अधिकारियों ने भर्ती परीक्षा के उम्मीदवारों से रिश्वत वसूलने के लिए कई तरीके अपनाए थे।
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प्रश्न पत्र लीक करना
उम्मीदवार-विशिष्ट उत्तर कुंजियां लीक करना, और रिश्वत की मांग के लिए 1:3 मेरिट लिस्ट का गलत इस्तेमाल करना। जांच में पता चला कि वेटनरी ऑफिसर्स परीक्षा में कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से ठीक एक दिन पहले, यानी 08/01/2026 को, सही उत्तर कुंजियां दी गई थीं। इसके लिए प्रति उम्मीदवार 20 लाख रुपये से 40 लाख रुपये तक की रिश्वत ली गई थी। निलंबित केपीएससी चेयरमैन शिवशंकरप्पा साहूकार और केपीएससी सदस्य बी.वी. गीता ने अवैध लाभ के लिए कुछ उम्मीदवारों को लीक हुई उत्तर कुंजियाँ उपलब्ध कराई थीं।
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परीक्षा नियंत्रक (सीओई) आईएएस की भूमिका
यह भी पता चला है कि बी.वी. गीता ने लीक हुई उत्तर कुंजियां केपीएससी के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक (सीओई) आईएएस ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार से हासिल की थीं, जिनके पास परीक्षा की गोपनीय सामग्री की सुरक्षा और देखरेख की जिम्मेदारी थी। उम्मीदवारों के बैठने की व्यवस्था और आगे-पीछे किए गए प्रश्न पत्रों और उत्तर कुंजियों का इस्तेमाल करके, सीओई ने बी.वी. गीता को (पहले 80 सवालों के लिए) सही उत्तर कुंजियां उपलब्ध कराई थीं। बीवी गीता ने रुपये जमा किए। कुल तय 40 लाख रुपये की रकम में से, ऐसे ही एक उम्मीदवार से 20 लाख रुपये नकद एडवांस के तौर पर लिए गए। 
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फाइनल सिलेक्शन लिस्ट में ज्यादा स्कोर हासिल
इसी तरह, शिवशंकरप्पा साहूकार ने कुल तय 20 लाख रुपये की रिश्वत की रकम में से एक उम्मीदवार से 10 लाख रुपये नकद एडवांस के तौर पर लिए। अब तक ऐसे 06 उम्मीदवारों की पहचान की गई है जिन्होंने फाइनल सिलेक्शन लिस्ट में ज्यादा स्कोर हासिल किया है, और ऐसे उम्मीदवारों की पूरी लिस्ट का पता लगाने के लिए आगे की जांच चल रही है।

साहूकार और बी.वी गीता के ठिकानों पर छापेमारी
ऊपर बताई गई बातों और जांच के दौरान इकट्ठा की गई जानकारी के आधार पर, 06/10/2026 को शिवशंकरप्पा साहूकार और बी.वी. गीता के ठिकानों पर धारा 17 के तहत तलाशी ली गई। इसके अलावा, पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत दर्ज कारणों के आधार पर, केपीएससी के सस्पेंड किए गए चेयरमैन शिवशंकरप्पा साहूकार और केपीएससी की सदस्य बी.वी. गीता को 06/10/2026 को गिरफ्तार किया गया। उन पर आरोप है कि वे ऊपर बताई गई आपराधिक गतिविधि से हुई अवैध कमाई को बनाने, इकट्ठा करने और संभालने में शामिल थे। कोर्ट ने जांच के लिए शिवशंकरप्पा साहूकार और बी.वी. गीता को 14 दिन की कस्टडी में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को सौंप दिया।

80 सवालों के सही जवाब की प्रैक्टिस
इससे पहले, ईडी की तलाशी और जब्ती की कार्रवाई में एक सफल उम्मीदवार के पास से 80 लाख रुपये के खाली साइन किए हुए चेक और खाली साइन किए हुए प्रॉमिसरी नोट जब्त किए गए थे। आगे की जांच से पता चला कि परीक्षा से एक दिन पहले 10 सफल उम्मीदवारों को बंगलूरू के बाहरी इलाके में एक रिसॉर्ट/एयरबीएनबी विला में ले जाया गया था। वहां उन्हें एक प्रश्न पत्र दिया गया, जिसमें 80 सवालों के सही जवाब थे। उम्मीदवारों को उनकी प्रैक्टिस करवाई गई। उन्हें याद करवाया गया। 

आईएएस अफसर ने पहुंचाया था प्रश्न पत्र
सही जवाबों वाला यह प्रश्न पत्र (जिसमें 80 सवाल थे) परीक्षा के तत्कालीन कंट्रोलर ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार (आईएएस) ने अपने करीबी सहयोगी बसवराज कन्नाले के जरिए इन 10 उम्मीदवारों तक पहुंचाया था। बसवराज कन्नाले ने वेटनरी ऑफिसर भर्ती परीक्षा में उम्मीदवारों के फाइनल सिलेक्शन में मदद करने के बदले हर उम्मीदवार से 40 लाख से 50 लाख रुपये की रिश्वत ली थी। इन तथ्यों और सबूतों के आधार पर, सीओई ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार और बसवराज कन्नाले को गिरफ्तार किया गया है। 

न्यायिक हिरासत में हैं कुमार गंगवार
पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत, क्रमशः 18/09/2026 और 17/09/2026 को कार्रवाई की गई। विशेष अदालत ने उन्हें 14 दिनों के लिए ईडी की कस्टडी में भेज दिया। ईडी की कस्टडी के बाद, ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को पीएमएलए मामलों की विशेष अदालत, बंगलूरू ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया। ईडी की कस्टडी के दौरान, ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार ने केपीएससी की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के आयोजन में हुई अनियमितताओं से जुड़ी अहम जानकारी दी। केपीएससी के एक अधिकारी से जब्त किए गए सामान और ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार से की गई पूछताछ से पता चला कि केपीएससी के कुछ सदस्य और अधिकारी गोपनीय 1:3 मेरिट लिस्ट का गलत इस्तेमाल कर रहे थे।


गोपनीय मेरिट पोजिशन की जानकारी हासिल की
वे उम्मीदवारों को केपीएससी भर्ती परीक्षाओं में पक्का सिलेक्शन का भरोसा दिलाकर उनसे रिश्वत लेते थे। आम तौर पर, 1:3 एलिजिबिलिटी लिस्ट जारी करते समय केपीएससी उम्मीदवारों के अलग-अलग मार्क्स नहीं बताता है। लेकिन, केपीएससी के सदस्यों और अधिकारियों ने सीओई ऑफिस से उम्मीदवारों की गोपनीय मेरिट पोजिशन की जानकारी हासिल की। उनके फाइनल सिलेक्शन की संभावना का एनालिसिस किया। फिर उन्होंने इस गोपनीय जानकारी का गलत इस्तेमाल करके उम्मीदवारों से संपर्क किया। उम्मीदवारों को गैर-कानूनी तरीके से पैसे लेकर उनके सिलेक्शन का भरोसा दिलाया। जांच में यह भी पता चला है कि पोस्ट के प्रकार और लेवल के आधार पर, सिलेक्शन का भरोसा दिलाने के लिए उम्मीदवारों से 10 लाख रुपये से 50 लाख रुपये तक की रिश्वत मांगी जाती थी। इस तरह, केपीएससी के पास मौजूद गोपनीय मेरिट जानकारी का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल करके गैर-कानूनी तरीके से पैसे वसूले गए और अपराध से कमाई की गई। 
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