वायुसेना के लिए खतरे की घंटी, इस मामले में चीन और पाकिस्तान से पिछड़ जाएगा भारत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 24 Jan 2019 08:25 AM IST
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लड़ाकू विमान राफेल
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अगले दो सालों में भारतीय वायुसेना के पास केवल 26 स्कवाड्रन के लड़ाकू विमान रह जाएंगे। जबकि उसे 42 स्कवाड्रन का प्राधिकरण करने की अनुमति है। यदि राफेल और लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस अपने निर्धारित समय पर देश पहुंच भी जाते हैं तब भी यह कमी रह जाएगी। ठीक इसी समय पाकिस्तान की वायुसेना के पास 25 लड़ाकू स्कवाड्रन होंगे जबकि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की वायुसेना के पास 42 लड़ाकू स्कवाड्रन होंगे। 
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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार आधाकारिक दस्तावेज यह दिखाते हैं कि भारतीय वायुसेना के पास इस समय लड़ाकू स्कवाड्रन की संख्या 30 है जो 2021 और 2022 में घटकर 26 हो जाएगी। तब तक सोवियत युग के मिग एयरक्राफ्ट के 6 स्कवाड्रन को सेवा मुक्त कर दिया जाएगा। वहीं इनकी जगह केवल एक स्कवाड्रन राफेल और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा बनाए गए एलसीए तेजस को शामिल किया जाएगा। 
भारत के बेड़े में शामिल होने वाले लड़ाकू स्कवाड्रन की संख्या 2027 में 30 होगी। तबतक एलसीए तेजस के चार और स्कवाड्रन वायुसेनो को सौंप दिए जाएंगे। 83 एलसीए तेजस मार्क 1 के मसौदे पर वायुसेना और एचएएल को अभी हस्ताक्षर करना बाकी है। वर्तमान अनुमान के अनुसार, दस्तावेज दिखाते हैं कि लड़ाकू स्कवाड्रन की संख्या 2037 तक 21 और 2042 तक 19 रह जाएगी। इस कमी की भरपाई करने के लिए योजना है कि तेजस मार्क 1 और मार्क 2, के 18 स्कवाड्रन और विदेशी लड़ाकू विमान के 6 स्कवाड्रन को लाया जाए। विदेशी विमान के लिए पिछले साल एक प्रारंभिक जांच की गई थी।
वायुसेना के पास आखिरी बार 42 लड़ाकू स्कवाड्रन की संख्या 2002 में थी। हर स्कवाड्रन में आमतौर पर 18 विमान होते हैं। हालांकि पहले कारगिल युद्ध के बाद उसने आधिकारिक तौर पर 7 स्कवाड्रन मीडियम मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमएमआरसीए) की जरूरत को चिन्हित किया था ताकि उसकी लड़ाकू बढ़त बरकरार रहे। 2007 में 126 एमएमआरसीए के लिए टेंडर जारी किया गया था। वायुसेना ने इसके लिए ट्रायल भी किया। जिसके बाद राफेल को चुना गया और समझौते पर तीन साल तक बातचीत करने के बाद 2015 में सहमति बनी थी।

भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने अप्रैल 2015 में 126 के बजाय 36 राफेल लड़ाकू विमानों को खरीदने का फैसला किया। तत्कालीन रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने सिंगल इंजन वाले विदेशी लड़ाकू विमान को खरीदने की इच्छा जताई। जिसमें स्वीडिश ग्रीपन या अमेरिकन एफ-16 को रणनीतिक साझेदारी मॉडल के अंतर्गत मेक इन इंडिया योजना के तहत बनाया जाना था ताकि इस कमी से निपटा जा सके। हालांकि वह योजना सक्रिय नहीं हुई और एचएएल से दिसंबर 2017 तक 83 और एलसीए तेजस मार्क 1 की डिलीवरी करने को कहा गया।
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