I.N.D.I. Alliance: पीएम के तौर पर खरगे का नाम पेश करने की चाल किसने चली, क्या नीतीश को तोड़ने की है कोशिश?
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
विस्तार
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मल्लिकार्जुन खरगे को इंडिया गठबंधन की ओर से प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनाने का प्रस्ताव गठबंधन की बैठक के दौरान रखा था। कांग्रेस के धुर विरोधी अरविंद केजरीवाल की ओर से ममता बनर्जी के इस प्रस्ताव को सहमति भी मिल गई थी। पहली नजर में इसे इंडिया गठबंधन की ओर से लाया गया मजबूत राजनीतिक दांव माना गया, क्योंकि इसके सहारे दलितों-पिछड़ों के वोट बैंक को साधकर पूरे देश में केंद्र सरकार के सामने मजबूत चुनौती दिए जाने की संभावना बनती दिखाई दे रही थी।
लेकिन कुछ ही समय बाद इस प्रस्ताव के पीछे भी राजनीति की तलाश की जाने लगी। कहा जा रहा है कि खरगे को पीएम उम्मीदवार बताने का यह राजनीतिक दांव खुद कांग्रेस ने ही चला है। इसके सहारे उसने नीतीश कुमार और अरविंद केजरीवाल जैसे उन नेताओं को ठिकाने लगा दिया, जो स्वयं को इंडिया गठबंधन का उम्मीदवार बनने के सपने देख रहे थे।
चूंकि, मल्लिकार्जुन खरगे ने स्वयं ही प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनने से इनकार कर दिया, संदेश यही गया कि विपक्षी गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस भी इसी पक्ष में है कि अभी प्रधानमंत्री पद पर कोई चर्चा न की जाए। चुनाव के बाद नेतृत्व के मुद्दे पर विचार किया जाएगा। 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद यूपीए का गठन भी ठीक इसी तरीके से हुआ था।
लेकिन यह प्रस्ताव पेश करके कांग्रेस ने नीतीश कुमार और अरविंद केजरीवाल जैसे उन नेताओं की दावेदारी को पूरी तरह समाप्त कर दिया, जो स्वयं को गठबंधन का पीएम उम्मीदवार बनाने के सपने देख रहे थे। जब गठबंधन का सबसे बड़ा दल खुद ही पीएम पद पर दावेदारी नहीं ठोंक रहा है, तो ऐसे में छोटे दलों के लिए यह अनैतिक हो गया कि वे सामने आकर अपने नेता के लिए पीएम पद के लिए दावेदारी करें।
ध्यान देने की बात है कि इंडिया गठबंधन की बैठक के दिन जदयू के एक विधायक ने नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बताकर कांग्रेस पर दबाव बढ़ा दिया था। आज ही एक जदयू सांसद ने यह कहकर राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया कि नीतीश कुमार ने इस गठबंधन को आकार दिया, लेकिन कांग्रेस ने उस पर कब्जा कर लिया। इससे गठबंधन की दरारें भी सामने आ गई हैं।
इसी तरह शिवसेना ने भी अपने मुखपत्र सामना में यह कहकर कांग्रेस पर टिप्पणी की थी कि इंडिया गठबंधन में 27 घोड़े तो हैं, लेकिन इसका कोई सारथी नहीं है। यह दबाव नेता के रूप में किसी चेहरे पर सहमति बनाने के लिए थी। लेकिन माना यही जा रहा है कि इस खरगे को पीएम उम्मीदवार बनाने के दांव के सहारे कांग्रेस ने सभी पीएम पद के दावेवारों की जुबान बंद कर दी।
लालू-उद्धव क्यों नहीं करते किसी नाम का प्रस्ताव
इंडिया गठबंधन के एक नेता ने अमर उजाला से कहा कि कुछ नेताओं के मन में स्वयं को पीएम पद का उम्मीदवार बनाने की लालसा हो सकती है, लेकिन कई दल ऐसे भी हैं जिनकी ओर से इस पद के लिए अभी कोई दावेदारी नहीं है। लालू प्रसाद यादव, उमर अब्दुल्ला, स्टालिन, वाम दल और कई अन्य पार्टियों-नेताओं की ओर से इस पद के लिए कोई दावेदार नहीं है। ऐसे में उन्हें किसी नाम के प्रस्ताव के साथ सामने आना चाहिए, जिससे एक नाम पर सहमति बने और गठबंधन को एक नेता दिया जा सके।
लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है, तो इसके पीछे भी राजनीति हो सकती है। कई दल साथ में अवश्य हैं, लेकिन प्रधानमंत्री पद की बात आते ही उनकी आपसी खटास सतह पर आ सकती है। ऐसे में बेहतर यही है कि अभी इस पद पर किसी की दावेदारी सामने न आए और कांग्रेस ने यही आपसी संभावित खींचतान को समाप्त करने के लिए इस तरह की कोशिश की।
नीतीश ने कभी नहीं की दावेदारी- जदयू
जनता दल (यू) के प्रवक्ता सत्यप्रकाश मिश्रा ने अमर उजाला से कहा कि पूरा देश यह जानता है कि जब विपक्ष का कोई दल साथ आने के लिए तैयार नहीं था, तब नीतीश कुमार ने इसके बारे में सोचा, और एक दूसरे के विरोध में खड़े दलों को भी एक गठबंधन के साथ आने के लिए तैयार किया। कार्यकर्ताओं-पार्टी नेताओं की भावना चाहे जो कुछ रही हो, उन्होंने स्वयं कभी प्रधानमंत्री पद पर अपनी दावेदारी नहीं पेश की।
हालांकि, वे यह मानते हैं कि समय रहते इंडिया गठबंधन को एक नेता, एक चेहरा मिलना चाहिए। इससे गठबंधन की लड़ाई को मजबूत किया जा सकता है। अभी भी इंडिया गठबंधन के नाम से भाजपा परेशान है, यदि सही समीकरणों को ध्यान में रखते हुए किसी नेता को चुना जाए और सीट शेयरिंग की जाए, तो उनका मानना है कि 2024 में मोदी को रोकना मुश्किल नहीं है।
एक दूसरे का गला काट रहे घमंडिया गठबंधन के नेता- भाजपा
भाजपा प्रवक्ता जयराम विप्लव ने अमर उजाला से कहा कि पूरा देश जानता है कि घमंडिया गठबंधन में शामिल नेताओं की आपस में कोई बात नहीं बनती। वे केवल मोदी का विरोध करने के लिए एकजुट हो गए हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह मल्लिकार्जुन खरगे का नाम सामने लाकर नीतीश कुमार का नाम काटा गया है, उससे भी यही साबित होता है कि इंडिया गठबंधन में नीतीश कुमार को ठिकाने लगाने का काम किया गया है।
इसके पहले कर्नाटक में भी यही बात हुई थी, और नीतीश कुमार को गठबंधन का नेतृत्व नहीं दिया गया था जिसके बाद वे नाराज होकर लौट आए थे। अब यह बात एक बार और सामने आ गई है और अब नीतीश कुमार को तय करना चाहिए कि वे कितना अपमानित होने के बाद भी इंडिया गठबंधन में बने रहते हैं। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार को काटने का काम स्वयं लालू प्रसाद यादव कर रहे हैं जो चाहते हैं कि बिहार में कोई उनसे बड़ा नेता नहीं बने।