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BJP-Congress: भाजपा के आरोपों पर बोले राहुल गांधी, 'मैं व्यापार नहीं, बल्कि एकाधिकार विरोधी हूं'
Thu, 07 Nov 2024 04:07 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: पवन पांडेय
Updated Thu, 07 Nov 2024 04:07 PM IST
सार
सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में राहुल गांधी ने कहा, मैं एक बात बिल्कुल स्पष्ट करना चाहता हूं, मुझे भाजपा में मेरे विरोधियों की तरफ से व्यापार विरोधी के रूप में पेश किया गया है। मैं बिल्कुल भी व्यापार विरोधी नहीं हूं, मैं एकाधिकार विरोधी हूं, मैं अल्पाधिकार बनाने का विरोधी हूं, मैं एक या दो या पांच लोगों की तरफ से व्यापार पर वर्चस्व का विरोधी हूं।
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राहुल गांधी, नेता, कांग्रेस
- फोटो : ANI
विस्तार
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को कहा कि वह व्यापार विरोधी नहीं हैं, जैसा कि भाजपा कह रही है, बल्कि वह एकाधिकार और अल्पाधिकार बनाने के विरोधी हैं।
समाचार पत्र में लेख लिखने के बाद की टिप्पणी
राहुल गांधी की ये टिप्पणी एक समाचार पत्र में एक लेख लिखने के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मूल ईस्ट इंडिया कंपनी 150 साल पहले खत्म हो गई थी, लेकिन उसके बाद पैदा हुआ डर फिर से वापस आ गया है, क्योंकि एकाधिकारियों की एक नई नस्ल ने उसकी जगह ले ली है। हालांकि, राहुल गांधी ने जोर देकर कहा था कि प्रगतिशील भारतीय व्यापार के लिए एक नया सौदा एक ऐसा विचार है जिसका समय आ गया है।
राहुल गांधी ने कहा, मैंने अपना करियर एक प्रबंधन सलाहकार के रूप में शुरू किया और मैं समझता हूं कि किसी व्यवसाय को सफल बनाने के लिए किस तरह की चीजों की आवश्यकता होती है। इसलिए मैं बस दोहराना चाहता हूं, मैं व्यापार विरोधी नहीं हूं, मैं एकाधिकार विरोधी हूं। वीडियो के साथ अपने पोस्ट में गांधी ने कहा, मैं नौकरियों का समर्थक हूं, व्यापार का समर्थक हूं, नवाचार का समर्थक हूं, प्रतिस्पर्धा का समर्थक हूं। मैं एकाधिकार का विरोधी हूं।
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राहुल गांधी ने अपने लेख में क्या लिखा था?
दरअसल, राहुल गांधी का 'भारतीय कारोबार के लिए एक सौदा' शीर्षक के साथ लेख एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित हुआ। इसे उन्होंने अपने आधिकारिक 'एक्स' खाते पर साझा करते हुए लिखा, 'अपना भारत चुनिए: नौकरियां या कुलीन तंत्र? योग्यता या संबंध? नवाचार या डराना-धमकाना? पैसा बहुत लोगों के लिए या कुछ लोगों के लिए? मैंने इस पर लिखा है कि क्यों कारोबार के लिए नया सौदा एकमात्र विकल्प नहीं है। यह भारत का भविष्य है।'
ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत को चुप कराया था- राहुल
राहुल गांधी ने जोर देकर कहा, हमारी अर्थव्यवस्था तभी फलेगी-फूलेगी जब सभी व्यवसायों के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष स्थान होगा। अपने लेख में गांधी ने कहा था कि ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत को चुप करा दिया था और यह उसकी व्यापारिक ताकत से नहीं, बल्कि उसके नियंत्रण से चुप कराया गया था। उन्होंने बताया कि कंपनी ने भारत को अपने से अधिक दब्बू महाराजाओं और नवाबों के साथ साझेदारी करके, उन्हें रिश्वत देकर और धमकाकर चुप करा दिया। उन्होंने कहा, इसने हमारे बैंकिंग, नौकरशाही और सूचना नेटवर्क को नियंत्रित किया। हमने अपनी स्वतंत्रता किसी दूसरे देश के हाथों नहीं खोई; हमने इसे एक एकाधिकारवादी निगम के हाथों खो दिया, जो एक दमनकारी तंत्र चलाता था।
भाजपा ने राहुल गांधी पर किया पलटवार
वहीं भाजपा ने पीएम मोदी के खिलाफ निराधार आरोप लगाने के लिए राहुल गांधी की आलोचना की थी और उनसे निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों की जांच करने को कहा था। इस पर पलटवार करते हुए भाजपा ने एक्स पर लिखा: तथाकथित 'मैच फिक्सिंग एकाधिकार समूहों बनाम निष्पक्ष व्यापार' के माध्यम से मोदी सरकार के खिलाफ एक और निराधार आरोप केवल भ्रामक है। भाजपा ने राहुल गांधी पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा, प्रिय बालक बुद्धि, तथ्यों की जांच किए बिना निष्कर्ष पर न पहुंचें।
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समाचार पत्र में लेख लिखने के बाद की टिप्पणी
राहुल गांधी की ये टिप्पणी एक समाचार पत्र में एक लेख लिखने के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मूल ईस्ट इंडिया कंपनी 150 साल पहले खत्म हो गई थी, लेकिन उसके बाद पैदा हुआ डर फिर से वापस आ गया है, क्योंकि एकाधिकारियों की एक नई नस्ल ने उसकी जगह ले ली है। हालांकि, राहुल गांधी ने जोर देकर कहा था कि प्रगतिशील भारतीय व्यापार के लिए एक नया सौदा एक ऐसा विचार है जिसका समय आ गया है।
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राहुल गांधी ने कहा, मैंने अपना करियर एक प्रबंधन सलाहकार के रूप में शुरू किया और मैं समझता हूं कि किसी व्यवसाय को सफल बनाने के लिए किस तरह की चीजों की आवश्यकता होती है। इसलिए मैं बस दोहराना चाहता हूं, मैं व्यापार विरोधी नहीं हूं, मैं एकाधिकार विरोधी हूं। वीडियो के साथ अपने पोस्ट में गांधी ने कहा, मैं नौकरियों का समर्थक हूं, व्यापार का समर्थक हूं, नवाचार का समर्थक हूं, प्रतिस्पर्धा का समर्थक हूं। मैं एकाधिकार का विरोधी हूं।
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राहुल गांधी ने अपने लेख में क्या लिखा था?
दरअसल, राहुल गांधी का 'भारतीय कारोबार के लिए एक सौदा' शीर्षक के साथ लेख एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित हुआ। इसे उन्होंने अपने आधिकारिक 'एक्स' खाते पर साझा करते हुए लिखा, 'अपना भारत चुनिए: नौकरियां या कुलीन तंत्र? योग्यता या संबंध? नवाचार या डराना-धमकाना? पैसा बहुत लोगों के लिए या कुछ लोगों के लिए? मैंने इस पर लिखा है कि क्यों कारोबार के लिए नया सौदा एकमात्र विकल्प नहीं है। यह भारत का भविष्य है।'
ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत को चुप कराया था- राहुल
राहुल गांधी ने जोर देकर कहा, हमारी अर्थव्यवस्था तभी फलेगी-फूलेगी जब सभी व्यवसायों के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष स्थान होगा। अपने लेख में गांधी ने कहा था कि ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत को चुप करा दिया था और यह उसकी व्यापारिक ताकत से नहीं, बल्कि उसके नियंत्रण से चुप कराया गया था। उन्होंने बताया कि कंपनी ने भारत को अपने से अधिक दब्बू महाराजाओं और नवाबों के साथ साझेदारी करके, उन्हें रिश्वत देकर और धमकाकर चुप करा दिया। उन्होंने कहा, इसने हमारे बैंकिंग, नौकरशाही और सूचना नेटवर्क को नियंत्रित किया। हमने अपनी स्वतंत्रता किसी दूसरे देश के हाथों नहीं खोई; हमने इसे एक एकाधिकारवादी निगम के हाथों खो दिया, जो एक दमनकारी तंत्र चलाता था।
भाजपा ने राहुल गांधी पर किया पलटवार
वहीं भाजपा ने पीएम मोदी के खिलाफ निराधार आरोप लगाने के लिए राहुल गांधी की आलोचना की थी और उनसे निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों की जांच करने को कहा था। इस पर पलटवार करते हुए भाजपा ने एक्स पर लिखा: तथाकथित 'मैच फिक्सिंग एकाधिकार समूहों बनाम निष्पक्ष व्यापार' के माध्यम से मोदी सरकार के खिलाफ एक और निराधार आरोप केवल भ्रामक है। भाजपा ने राहुल गांधी पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा, प्रिय बालक बुद्धि, तथ्यों की जांच किए बिना निष्कर्ष पर न पहुंचें।
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