{"_id":"67c39424c6df7f67960d4a65","slug":"humans-are-disturbing-the-biological-clock-of-animals-know-all-updates-2025-03-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"चिंताजनक: पशुओं की जैविक घड़ी को बिगाड़ रहे इन्सान; महज इतनी स्तनधारी प्रजातियां ही कर रहीं पहले जैसा व्यवहार","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
चिंताजनक: पशुओं की जैविक घड़ी को बिगाड़ रहे इन्सान; महज इतनी स्तनधारी प्रजातियां ही कर रहीं पहले जैसा व्यवहार
Sun, 02 Mar 2025 04:41 AM IST
शिव शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शुक्ला
Updated Sun, 02 Mar 2025 04:41 AM IST
सार
सभी जानवरों में सर्कैडियन रिदम यानी जैविक घड़ी होती है। शरीर की यह आंतरिक घड़ी 24 घंटे के दौरान उसकी दैनिक गतिविधियों को नियंत्रित करती है। प्रत्येक प्रजाति के लिए वक्त के साथ यह एक सामान्य व्यवहार बन जाता है, लेकिन जलवायु परिवर्तन इस प्राकृतिक चक्र को बाधित कर रहा है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : Meta AI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इन्सान केवल अपना ही नहीं, जानवरों की जैविक घड़ी का रिदम भी बिगाड़ रहे हैं। एक वैश्विक अध्ययन में सामने आया कि इन्सानी गतिविधियां, जिसमें जलवायु परिवर्तन भी शामिल है, स्तनधारी जीवों की जैविक घड़ी को प्रभावित कर सकती हैं। महज 39 फीसदी स्तनधारी प्रजातियां ही अब पहले के शोधों में देखे गए उनके व्यवहार के मुताबिक व्यवहार कर रही हैं। सिडनी विश्वविद्यालय, ऑस्ट्रेलिया सहित कई शोधकर्ताओं का यह अध्ययन साइंस एडवांसेस जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, सभी जानवरों में सर्कैडियन रिदम यानी जैविक घड़ी होती है। शरीर की यह आंतरिक घड़ी 24 घंटे के दौरान उसकी दैनिक गतिविधियों को नियंत्रित करती है। प्रत्येक प्रजाति के लिए वक्त के साथ यह एक सामान्य व्यवहार बन जाता है, लेकिन जलवायु परिवर्तन इस प्राकृतिक चक्र को बाधित कर रहा है, जिससे अप्रत्याशित परिणाम हो सकते हैं।
445 स्तनधारी प्रजातियों का किया विश्लेषण
इस बदलाव को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने 445 स्तनधारी प्रजातियों के वीडियो फुटेज का विश्लेषण कर उनकी 24 घंटे की दैनिक गतिविधियों का अध्ययन किया। इसमें 38 देशों के 20,080 जगहों पर लगे कैमरों से मिली फुटेज शामिल थी। इसके बाद इन निष्कर्षों की तुलना पुराने शोधों से की गई। इसमें पाया गया कि केवल 39 फीसदी प्रजातियों का व्यवहार ही पहले किए गए शोधों के नतीजों से मेल खाता है।
विज्ञापन
बदलाव के अनुरूप खुद को ढाल रहे
अध्ययन ने यह भी जांचा कि क्या स्तनधारियों की दैनिक दिनचर्या स्थिर रहती है या फिर वे पर्यावरणीय बदलावों के अनुसार इसे समायोजित कर सकते हैं। परिणामों से पता चला कि ज्यादातर प्रजातियां अनुकूलनशील हैं और वे अपने दैनिक व्यवहार को परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती हैं। इससे पता चलता है कि कई जानवर बदलते पर्यावरण में जीवित रहने के लिए अपने संचालन पैटर्न को समायोजित कर रहे हैं।
उजाले की अवधि का भी असर
शोधकर्ताओं ने 126 प्रजातियों का और गहन अध्ययन किया और यह समझने की कोशिश की कि भूगोल उनके व्यवहार को कैसे प्रभावित करता है। उन्होंने पाया कि भूमध्य रेखा से दूरी दिन के उजाले की अवधि और मानव गतिविधियों का प्रभाव 74 फीसदी प्रजातियों के दैनिक व्यवहार पर पड़ता है।
विज्ञापन
शोधकर्ताओं के मुताबिक, सभी जानवरों में सर्कैडियन रिदम यानी जैविक घड़ी होती है। शरीर की यह आंतरिक घड़ी 24 घंटे के दौरान उसकी दैनिक गतिविधियों को नियंत्रित करती है। प्रत्येक प्रजाति के लिए वक्त के साथ यह एक सामान्य व्यवहार बन जाता है, लेकिन जलवायु परिवर्तन इस प्राकृतिक चक्र को बाधित कर रहा है, जिससे अप्रत्याशित परिणाम हो सकते हैं।
विज्ञापन
445 स्तनधारी प्रजातियों का किया विश्लेषण
इस बदलाव को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने 445 स्तनधारी प्रजातियों के वीडियो फुटेज का विश्लेषण कर उनकी 24 घंटे की दैनिक गतिविधियों का अध्ययन किया। इसमें 38 देशों के 20,080 जगहों पर लगे कैमरों से मिली फुटेज शामिल थी। इसके बाद इन निष्कर्षों की तुलना पुराने शोधों से की गई। इसमें पाया गया कि केवल 39 फीसदी प्रजातियों का व्यवहार ही पहले किए गए शोधों के नतीजों से मेल खाता है।
विज्ञापन
बदलाव के अनुरूप खुद को ढाल रहे
अध्ययन ने यह भी जांचा कि क्या स्तनधारियों की दैनिक दिनचर्या स्थिर रहती है या फिर वे पर्यावरणीय बदलावों के अनुसार इसे समायोजित कर सकते हैं। परिणामों से पता चला कि ज्यादातर प्रजातियां अनुकूलनशील हैं और वे अपने दैनिक व्यवहार को परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती हैं। इससे पता चलता है कि कई जानवर बदलते पर्यावरण में जीवित रहने के लिए अपने संचालन पैटर्न को समायोजित कर रहे हैं।
उजाले की अवधि का भी असर
शोधकर्ताओं ने 126 प्रजातियों का और गहन अध्ययन किया और यह समझने की कोशिश की कि भूगोल उनके व्यवहार को कैसे प्रभावित करता है। उन्होंने पाया कि भूमध्य रेखा से दूरी दिन के उजाले की अवधि और मानव गतिविधियों का प्रभाव 74 फीसदी प्रजातियों के दैनिक व्यवहार पर पड़ता है।