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बदलाव की नई तस्वीर: भारत में मातृ मृत्यु दर में ऐतिहासिक गिरावट, एसडीजी लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ता देश
Sun, 11 May 2025 04:28 AM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शुभम कुमार
Updated Sun, 11 May 2025 04:28 AM IST
सार
भारत में 2014 से 2021 के बीच मातृ मृत्यु दर 130 से घटकर 93 और शिशु मृत्यु दर 39 से घटकर 27 हो गई है। एसआरएस रिपोर्ट के अनुसार, भारत SDG लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। वहीं 8 राज्यों ने पहले ही मातृ मृत्यु दर को 70 से नीचे लाकर लक्ष्य हासिल कर लिया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Freepik
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विस्तार
भारत में मातृ और शिशु मृत्य दर में वर्ष 2014 से 2021 के बीच बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। स्वास्थ्य एवं परिवारण कल्याण मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2014-16 के दौरान जो मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख पर 130 थी वह 2021 में घटकर 93 रह गई है। इसी तरह शिशु मृत्यु दर में भी कमी आई है। 2014 में प्रति एक हजार शिशुओं में 39 की मौत होती थी जो अब घटकर 27 रह गई है।
यह जानकारी भारत के रजिस्ट्रार जनरल (आरजीआई) की ओर से जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) रिपोर्ट में दी गई। यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि यह 2030 तक मातृ मृत्यु दर को 70 तक कम करने के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (एसडीजी) लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। आठ राज्यों केरल (20), महाराष्ट्र (38), तेलंगाना (45), आंध्र प्रदेश (46), तमिलनाडु (49), झारखंड (51), गुजरात (53), और कर्नाटक (63) ने पहले ही इस लक्ष्य को हासिल कर लिया है। इन राज्यों ने स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और मातृ देखभाल सेवाओं में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए हैं।
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नवजात मृत्यु दर में आई कमी
नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) 2014 में 26 से घटकर 2021 में 19 हो गई, जबकि पांच वर्ष से कम आयु की मृत्यु दर 45 से घटकर 31 हो गई। ये संकेतक भारत में नवजात और बच्चों की देखभाल में महत्वपूर्ण प्रगति के दर्शाते हैं। इसके अलावा, जन्म के समय लिंगानुपात 2014 में 899 से सुधरकर 2021 में 913 हो गया। यह लैंगिक संतुलन में सकारात्मक बदलाव का संकेत है। कुल प्रजनन दर (टीएफआर) भी 2014 में 2.3 से घटकर 2021 में 2.0 पर स्थिर रही, जो जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में प्रगति को दर्शाता है।
वैश्विक स्तर पर भारत का बेहतर प्रदर्शन
संयुक्त राष्ट्र मातृ मृत्यु अनुमान इंटर-एजेंसी समूह (यूएन-एमएमईआईजी) की 2000-2023 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का एमएमआर 2020 से 2023 तक 23 अंक कम हुआ। 1990 से 2023 तक भारत में एमएमआर में 86 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह कमी केवल 48 प्रतिशत थी।
ये भी पढ़े:- AGI: एजीआई के लिए पुरानी दुश्मनी भुलाने को तैयार सैम ऑल्टमैन; एलन मस्क की तरफ बढ़ाया दोस्ती का हाथ
संयुक्त राष्ट्र शिशु मृत्यु अनुमान समूह (यूएन-आईजीएमई) की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने यू5एमआर में 78 प्रतिशत, एनएमआर में 70 प्रतिशत, और आईएमआर में 71 प्रतिशत की कमी दर्ज की, जो वैश्विक औसत से कहीं अधिक है। वहीं सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) के आंकड़ों के अनुसार, 2020 और 2021 में भारत की अतिरिक्त मृत्यु दर 9.3% रही।
आयुष्मान भारत को क्रेडिट
इस प्रगति का श्रेय सरकार की आयुष्मान भारत को दिया जा सकता है। यह विश्व का सबसे बड़ा स्वास्थ्य गारंटी कार्यक्रम है। इसके तहत प्रति परिवार 5 लाख रुपये तक की वार्षिक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान किया जाता है। मंत्रालय ने मातृ और शिशु स्वास्थ्य इकाइयों, जैसे मातृ प्रतीक्षा गृह, मातृ-शिशु स्वास्थ्य विंग, ऑब्स्टेट्रिक हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू), और नवजात स्थिरीकरण इकाइयों (एनबीएसयू) की स्थापना पर ध्यान केंद्रित किया है। गर्भवती महिलाओं के लिए मुफ्त संस्थागत प्रसव, सिजेरियन डिलीवरी, मुफ्त परिवहन, दवाएं, निदान, और पोषण सहायता सुनिश्चित की गई है।
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यह जानकारी भारत के रजिस्ट्रार जनरल (आरजीआई) की ओर से जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) रिपोर्ट में दी गई। यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि यह 2030 तक मातृ मृत्यु दर को 70 तक कम करने के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (एसडीजी) लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। आठ राज्यों केरल (20), महाराष्ट्र (38), तेलंगाना (45), आंध्र प्रदेश (46), तमिलनाडु (49), झारखंड (51), गुजरात (53), और कर्नाटक (63) ने पहले ही इस लक्ष्य को हासिल कर लिया है। इन राज्यों ने स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और मातृ देखभाल सेवाओं में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए हैं।
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नवजात मृत्यु दर में आई कमी
नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) 2014 में 26 से घटकर 2021 में 19 हो गई, जबकि पांच वर्ष से कम आयु की मृत्यु दर 45 से घटकर 31 हो गई। ये संकेतक भारत में नवजात और बच्चों की देखभाल में महत्वपूर्ण प्रगति के दर्शाते हैं। इसके अलावा, जन्म के समय लिंगानुपात 2014 में 899 से सुधरकर 2021 में 913 हो गया। यह लैंगिक संतुलन में सकारात्मक बदलाव का संकेत है। कुल प्रजनन दर (टीएफआर) भी 2014 में 2.3 से घटकर 2021 में 2.0 पर स्थिर रही, जो जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में प्रगति को दर्शाता है।
वैश्विक स्तर पर भारत का बेहतर प्रदर्शन
संयुक्त राष्ट्र मातृ मृत्यु अनुमान इंटर-एजेंसी समूह (यूएन-एमएमईआईजी) की 2000-2023 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का एमएमआर 2020 से 2023 तक 23 अंक कम हुआ। 1990 से 2023 तक भारत में एमएमआर में 86 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह कमी केवल 48 प्रतिशत थी।
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आयुष्मान भारत को क्रेडिट
इस प्रगति का श्रेय सरकार की आयुष्मान भारत को दिया जा सकता है। यह विश्व का सबसे बड़ा स्वास्थ्य गारंटी कार्यक्रम है। इसके तहत प्रति परिवार 5 लाख रुपये तक की वार्षिक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान किया जाता है। मंत्रालय ने मातृ और शिशु स्वास्थ्य इकाइयों, जैसे मातृ प्रतीक्षा गृह, मातृ-शिशु स्वास्थ्य विंग, ऑब्स्टेट्रिक हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू), और नवजात स्थिरीकरण इकाइयों (एनबीएसयू) की स्थापना पर ध्यान केंद्रित किया है। गर्भवती महिलाओं के लिए मुफ्त संस्थागत प्रसव, सिजेरियन डिलीवरी, मुफ्त परिवहन, दवाएं, निदान, और पोषण सहायता सुनिश्चित की गई है।
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