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Modi Cabinet: कृषि सुधार को कैसे पंख लगाएंगे शिवराज चौहान? बढ़ती महंगाई से निपटना 'मामा' के लिए चुनौती
Tue, 11 Jun 2024 03:49 PM IST
अभिषेक दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Tue, 11 Jun 2024 03:49 PM IST
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Shivraj Singh Chauhan
- फोटो :
Amar Ujala
विस्तार
देश की 18वीं लोकसभा का गठन हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीसरी कैबिनेट में मंत्रियों को मंत्रालय सौंप दिए गए हैं। इसमें मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली है। मंगलवार को शिवराज चौहान ने अपना कार्यभार भी संभाल लिया।
नए कृषि मंत्री बने शिवराज चौहान के समक्ष खाद्य व कृषि क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती खाद्य वस्तुओं की महंगाई को काबू करना होगा। साल 2023 में आपूर्ति के दबाव के कारण खाद्य वस्तुओं की महंगाई के मामले में हालत खराब रही है। इसके अलावा ग्रामीण विकास अंसतोष से निपटना प्रमुख किसी चुनौती से कम नहीं होगा। दरअसल, नौकरियों में आ रही कमी और गैर कृषि क्षेत्र में धीमी वृद्धि के कारण गांवों में असंतोष कई गुना बढ़ गया है। लोकसभा चुनाव के दौरान विपक्ष ने भी इन मुद्दों को जोरशोर के साथ उठाया है।
हालांकि नए काम संभालने वाले कृषि मंत्री शिवराज के लिए राहत की खबर है कि दक्षिण पश्चिम मानसून 2024 का पूर्वानुमान देश के लिए अच्छा है। कई राज्यों में अच्छी बारिश का अनुमान है। मौसम विभाग ने भी अनुमान जताया है कि अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है। दक्षिण पश्चिम मानसून देश के वर्षा आधारित क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। इस मानसून से मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, ओडिशा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में बारिश होती है और इन क्षेत्रों में अच्छी बारिश देश के दलहन और तिलहन क्षेत्रों के लिए अच्छा संकेत है।
कृषि विशेषज्ञों कहना है कि दलहन, तिलहन और अनाज का उत्पादन बढ़ने से घरेलू आपूर्ति को बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे आने वाले महीनों में महंगाई घटाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा अच्छे मानसून से रबी फसल के लिए जलाशयों और मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा शिवराज के सामने कृषि में विविधता लाकर किसानों की स्थिति में सुधार के लिए मध्य प्रदेश मॉडल को लागू करने की बड़ी चुनौती होगी। मध्यप्रदेश की राजनीति में रहते हुए उन्होंने बड़ा चमत्कार एमएसपी पर गेहूं खरीद में किया है। कांग्रेस सरकार में मध्यप्रदेश में गेहूं की अधिकतम खरीद 50 हजार टन से शायद ही ज्यादा हो पाती थी, किंतु चालू वित्त वर्ष में यह बढ़कर लगभग 48 लाख टन हो गई है। यह पंजाब एवं हरियाणा के बाद किसी अन्य प्रदेश की तुलना में सबसे ज्यादा खरीद है।
विशेषज्ञों के अनुसार महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और बिहार के कई ग्रामीण लोकसभा क्षेत्रों में भाजपा की हार का कारण किसानों को अपने खेत पर उपज का उचित मूल्य नहीं मिलना है। इसलिए नई सरकार को नीति के स्तर पर कृषि क्षेत्रों के सुधार पर ध्यान देने की जरूरत है। वहीं सरकार को बीज और संयंत्र उर्वरक के मामले में कई सुधार तत्काल किए जाने की जरूरत है। इसका कारण यह है कि भारत में कई साझेदारों के शामिल होने के कारण विनियमन और मंजूरी प्रक्रियाएं लंबा समय लेती हैं। सरकार को कृषि रसायन क्षेत्र के लिए उचित नीतिगत वातावरण बनाना चाहिए। इसके अलावा इस क्षेत्र के निर्यात को बढ़ावा देने की सुविधा देनी चाहिए।