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Emergency: आपातकाल के वो काले किस्से जिन्होंने हिला दिया था पूरा देश; प्रेस पर भी लगी थीं पाबंदियां

Fri, 12 Jul 2024 08:52 PM IST
शिवेंद्र तिवारी स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Fri, 12 Jul 2024 08:52 PM IST
सार

Emergency: 1975 में 25 और 26 जून की दरमियानी रात से 21 मार्च 1977 तक (21 महीने) तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा की थी। तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार की सिफारिश पर संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत देश में आपातकाल की घोषणा की थी। 

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how Emergency was imposed in 1975 its reason news in hindi
अमर उजाला के अंकों में आपातकाल - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में संविधान सत्ता और विपक्ष दोनों की ओर से बड़ा मुद्दा था। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों ने अपने-अपने तरीके से इस मुद्दे को उठाया। यही बानगी 18वीं लोकसभा के पहले संसद सत्र में दिखी। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी संसद में संविधान के प्रति लिए दिखे। वहीं भाजपा ने संसद में कांग्रेस को इंदिरा गांधी के शासन में लगाए गए आपातकाल को याद दिलाया। 
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इन्हीं आरोप-प्रत्यारोपों के बीच केंद्र सरकार ने 25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में घोषित कर दिया है। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक ट्वीट यह दिन उन सभी लोगों के विराट योगदान का स्मरण करायेगा, जिन्होंने 1975 के आपातकाल के अमानवीय दर्द को झेला था। 
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अमर उजाला के पन्नों में भी आपातकाल की हर खबर दर्ज है। 25 जून को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आपातकाल लगाने से लेकर 1977 में हटने तक हर खबर अमर उजाला के अंकों में नजर आती है। आइये जानते हैं कि 1975 में देश में कैसे लगाया गया था आपातकाल? इसके क्या कारण थे? आपातकाल के दौरान क्या-क्या हुआ? बाद में इसे कैसे हटाया गया?  
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अमर उजाला के अंकों में आपातकाल - फोटो : AMAR UJALA
25 जून 1975 की स्याह रात, जब आपातकाल की घोषणा की गई, उस रात से ही पुलिस ने विरोधी दलों के नेताओं, बच्चों पर जो जुल्म किए, उन्हें याद कर लोकतंत्र सेनानी अब भी सिहर उठते हैं। शहर में 150 से ज्यादा लोकतंत्र सेनानी और हजारों लोग ऐसे हैं, जिन्होंने 21 महीने के आपातकाल में पुलिस के जुल्म झेले और जेल में यातनाएं सहीं। लोकतंत्र सेनानी और अब विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल बताते हैं कि जाट हाउस से निकलते ही लोहामंडी थाने की पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। वह 15 साल के थे। जेल में पिटाई और केवल सूखी रोटी मिलती थी। दिनभर प्यासा रखा जाता था कि मनोबल तोड़ा जा सके।

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अमर उजाला के अंकों में आपातकाल - फोटो : AMAR UJALA
कई दिनों के बाद वह जेल से रिहा हुए। आपातकाल का एक-एक दिन उनके जेहन में बसा है। लोकतंत्र सेनानी विजय गोयल और उनके छोटे भाई संजय गोयल पर भी जुल्म हुआ। संजय गोयल तब सेंट जोंस इंटर कॉलेज के सातवीं के छात्र थे। पुलिस ने उन्हें पकड़ा और डेढ़ महीने जेल में रखा। वह तब 12 साल के थे और सबसे छोटे आंदोलनकारी थे। उनके बड़े भाई और संघ के स्वयंसेवक विजय गोयल बताते हैं कि इंदिरा गांधी के खिलाफ नारे लगाने पर पुलिस ऐसी यातनाएं देती थी कि रूह कांप जाए। उन्होंने जेल से ही परीक्षा दी थी।

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अमर उजाला के अंकों में आपातकाल - फोटो : AMAR UJALA
अमर उजाला ने खाली रखा था संपादकीय
अमर उजाला के पुराने पन्नों में दर्ज है कि तत्कालीन सरकार ने आपातकाल में जब प्रेस पर सेंसरशिप और पाबंदियां लगाईं तो अमर उजाला ने अपने संपादकीय की जगह खाली छोड़कर विरोध दर्ज कराया था। आपातकाल के समर्थन में पूरी सरकार के मंत्री जुट गए थे, जो जगह-जगह जाकर आपातकाल की खूबियां गिना रहे थे।

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अमर उजाला के अंकों में आपातकाल - फोटो : AMAR UJALA
शाह आयोग का किया था गठन
जनता सरकार आने पर मार्च 1977 में आपातकाल हटाने की घोषणा नई सरकार के प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने की थी। 21 महीने के आपातकाल में सरकारी मशीनरी ने जो दुरुपयोग किए, उनकी जानकारी के लिए तत्कालीन सरकार ने शाह आयोग का गठन 20 मई 1977 को किया। सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत न्यायमूर्ति जेसी शाह को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया था।
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