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SC: रेलवे से शीर्ष अदालत ने पूछा सवाल, 'बिना उचित सत्यापन के किसी को कैसे दी जा सकती है सरकारी नौकरी?'

Thu, 01 Aug 2024 08:35 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Thu, 01 Aug 2024 08:35 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जाली दस्तावेजों के जरिए रेलवे में कुछ लोगों को नौकरी पर रखे जाने के मामले में पर आश्चर्य जताते हुए पूछा कि दस्तावेजों के उचित सत्यापन के बिना सरकारी नौकरी पर किसी को कैसे नियुक्त किया जा सकता है?

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How can someone be appointed to govt job without proper verification of documents? asks SC
Supreme Court - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी और संजय करोल की पीठ ने पूर्वी रेलवे में अनुकंपा के आधार पर नियुक्त कुछ कर्मचारियों की सेवा समाप्ति से संबंधित मामले पर सुनवाई के दौरान कहा कि दस्तावेजों के उचित सत्यापन के बिना सरकारी नौकरी पर किसी को कैसे नियुक्त किया जा सकता है? शीर्ष अदालत ने आगे कहा कि भारत के सबसे बड़े नियोक्ताओं में से एक रेलवे में इस तरह के मामलों की जांच होनी चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले पर जताया आश्चर्य
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पाया कि उन सभी कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया क्योंकि उनकी नियुक्ति फर्जी और फर्जी दस्तावेजों पर आधारित पाई गई। वहीं पीठ ने अपने फैसले में कहा, हालांकि इस मामले के तथ्यों को देखते हुए, हम अपीलकर्ता-नियोक्ता के कार्यों पर आश्चर्य व्यक्त करते हैं, जिन्होंने प्रतिवादी-कर्मचारियों को संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर नियुक्त किया था, जो बाद में जाली, मनगढ़ंत और फर्जी पाए गए।
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कर्मचारियों ने आवेदन खारिज होने बाद किया HC का रूख
यह पीठ कलकत्ता उच्च न्यायालय के अगस्त 2012 के फैसले को चुनौती देने वाली केंद्र की अपीलों पर विचार कर रही थी, जिसमें केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण, कलकत्ता पीठ की तरफ से पारित आदेश को पलट दिया गया था। और इन कर्मचारियों ने बर्खास्तगी आदेश के खिलाफ न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया था। न्यायाधिकरण ने उनके आवेदनों को खारिज कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय का रुख किया था।
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रेलवे ने कर्मचारियों को भेजे थे कारण बताओ नोटिस
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि जांच से पता चलता है कि रेलवे ने इन कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस भेजे थे, जिसमें अनुकंपा के आधार पर उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाए गए थे। विशेष रूप से यह बताते हुए कि ये पद उनके पिता की नौकरी के संबंध में जाली और मनगढ़ंत दस्तावेजों का उपयोग करके हासिल किए गए थे।

अनुकंपा नियुक्ति का नहीं किया जा सकता है दावा
पीठ ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का सिद्धांत कमाने वाले सदस्य की अचानक मृत्यु के बाद परिवार के सदस्यों पर पड़ने वाले दुख को कम करने के लिए बनाया गया है। हालांकि इसे अधिकार के रूप में दावा नहीं किया जा सकता है। इसलिए यह स्पष्ट है कि इस तरह के आधार पर नियुक्ति का दावा करने वाले व्यक्ति को मृतक व्यक्ति के साथ अपने संबंध और नियुक्ति के लिए पात्रता का प्रदर्शन करना होगा।


पीठ ने कहा अनुकंपा नियुक्ति उन व्यक्तियों को दी जाती है जिनके परिवार मुख्य कमाने वाले के अक्षम होने या निधन के कारण बहुत परेशान या बेसहारा हो जाते हैं। इसलिए जब ऐसे आधार पर नियुक्ति चाहने वाले व्यक्ति अपनी योग्यता को गलत तरीके से साबित करने का प्रयास करते हैं, जैसा कि इस मामले में किया गया है, तो ऐसे पदों को बरकरार रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
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