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Politics: लोकसभा में फेल अरविंद केजरीवाल हरियाणा-दिल्ली में कितना बड़ा मुद्दा बनेंगे? कैसे बढ़ेगी AAP की राजनीति

Sun, 21 Jul 2024 04:50 PM IST
निर्मल कांत डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 21 Jul 2024 04:50 PM IST
सार

Politics: हरियाणा में भाजपा तीसरी बार सत्ता में आने के लिए हर संभव दांव खेल रही है, तो कांग्रेस इस बार अपने लिए बेहद अनुकूल माहौल देख रही है। इसके बीच आम आदमी पार्टी हरियाणा में कितनी जगह बना पाएगी, कहना मुश्किल है।

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How big an issue will Arvind Kejriwal fail in Lok Sabha become in Haryana-Delhi? How will AAP's politics grow?
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

लोकसभा चुनाव में सर्वोच्च न्यायालय से मिली जमानत के बाद अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के लिए जमकर चुनाव प्रचार किया था। उन्होंने घूम-घूम कर लोगों से कहा कि यदि वे इंडिया गठबंधन यानी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों को वोट देंगे, तो उन्हें जेल नहीं जाना पड़ेगा। चुनाव परिणाम बताते हैं कि दिल्ली की जनता ने अरविंद केजरीवाल की इस भावनात्मक अपील पर कोई ध्यान नहीं दिया। भाजपा ने दिल्ली की सभी सातों सीटें जीत लीं और अरविंद केजरीवाल की अपील पूरी तरह से नाकाम रही। 

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लेकिन अब आम आदमी पार्टी हरियाणा विधानसभा चुनाव के मैदान में कूद चुकी है। उसने सभी सीटों पर अकेले दम पर अपने प्रत्याशी खड़ा करने का फैसला किया है। लोकसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस के नेताओं ने यह आरोप लगाया था कि उन्हें आम आदमी पार्टी के नेताओं-कार्यकर्ताओं का सहयोग नहीं मिला, जिसके कारण उन्हें हार का सामना करना पड़ा। सूत्रों के अनुसार, लोकसभा चुनाव से सबक सीखते हुए कांग्रेस, आम आदमी पार्टी से हरियाणा में किसी तरह का गठबंधन नहीं करेगी। फरवरी में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी आम आदमी पार्टी का कांग्रेस के साथ गठबंधन होने की कोई संभावना नहीं है। 
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इन परिस्थितियों में आम आदमी पार्टी एक बार फिर हरियाणा और दिल्ली के चुनावी रण में उतरेगी। आम आदमी पार्टी दिल्ली मॉडल और केजरीवाल का 'विक्टिम कार्ड' खेलते हुए अपने चुनाव प्रचार में आगे बढ़ रही है। शनिवार को सुनीता केजरीवाल ने हरियाणा के लोगों से वादा किया कि यदि आम आदमी पार्टी हरियाणा की सत्ता में आती है, तो उन्हें भी दिल्ली की तरह मुफ्त बिजली, पानी, शिक्षा-स्वास्थ्य का लाभ मिलेगा। लेकिन जिस तरह आम आदमी पार्टी घोटालों के आरोपों में फंसी हुई है, उसके तमाम बड़े नेता जेल में हैं, आम आदमी पार्टी इसमें कितनी सफल रहेगी? 
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क्या यही मॉडल हरियाणा को मिलेगा?
दिल्ली भाजपा प्रवक्ता शुभेंदु शेखर अवस्थी ने अमर उजाला से कहा कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में नवीं क्लास में एक लाख से ज्यादा बच्चे फेल हुए हैं। इनमें 17302 बच्चे दूसरी बार फेल हुए हैं। बच्चों को सरकारी स्कूलों से बाहर फेंक दिया है। उन्हें ओपन स्कूल से शिक्षा लेने के लिए कहा गया है। भाजपा नेता ने प्रश्न किया है कि क्या यही शिक्षा व्यवस्था आम आदमी पार्टी हरियाणा के लोगों को भी देना चाहती है? 

शुभेंदु शेखर अवस्थी ने आरोप लगाया है कि दिल्ली के 76 फीसदी स्कूलों में विज्ञान की पढ़ाई नहीं होती। यानी इन स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चे कभी डॉक्टर-इंजीनियर नहीं बन सकते। उनके अनुसार दिल्ली के 81 फीसदी स्कूलों में प्रधानाध्यापक नहीं हैं, 72 फीसदी स्कूलों में वाइस प्रिंसिपल नहीं हैं, और 63 हजार अध्यापकों की कमी है। उन्होंने कहा कि क्या इसी शिक्षा मॉडल को दिल्ली सरकार की मंत्री वर्ल्ड क्लास कह रही हैं। उन्होंने इसे थर्ड क्लास शिक्षा बताया और कहा कि आम आदमी पार्टी की कलई खुल चुकी है और उसे हरियाणा या दिल्ली में कोई सफलता नहीं मिलेगी। 

हरियाणा में कांग्रेस को नुकसान?
राजनीतिक विश्लेषक कुमार राकेश ने कहा कि लोकसभा में हार के बाद भी दिल्ली के विधानसभा चुनावों में अरविंद केजरीवाल 2013 से अब तक अजेय रहे हैं। लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी के सामने चुनौती ज्यादा कड़ी है। अब तक आम आदमी पार्टी अपना चुनाव अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन जैसे नेताओं के चुनाव प्रचार का लाभ लेती रही है लेकिन इस बार हो सकता है कि उसे अपने इन दिग्गज नेताओं के बिना ही चुनाव मैदान में उतरना पड़े। ऐसे में उसे कितनी सफलता मिल पाएगी, यह कहना मुश्किल है। 

हरियाणा में कांग्रेस की स्थिति मजबूत है। मतदाता भी मुख्य रूप से भाजपा, कांग्रेस और चौटाला परिवार के साथ भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं। भाजपा तीसरी बार सत्ता में आने के लिए हर संभव दांव खेल रही है, तो कांग्रेस इस बार अपने लिए बेहद अनुकूल माहौल देख रही है। इसके बीच आम आदमी पार्टी हरियाणा में कितनी जगह बना पाएगी, कहना मुश्किल है। वहीं, यदि दिल्ली में भी दलित-मुसलमान मतदाता का एक हिस्सा भी कांग्रेस के पक्ष में एकजुट हुआ, तो आम आदमी पार्टी को मुश्किल हो सकती है। 


'आप' नेताओं के लिए चुनौती
यह आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, आतिशी मार्लेना, सौरभ भारद्वाज, दुर्गेश पाठक और संदीप पाठक जैसे नेताओं के लिए कड़ी अग्निपरीक्षा की घड़ी होगी कि वे अपने दिग्गज नेताओं की कमी के बाद भी अपना चुनाव प्रचार कितनी मजबूती से आगे बढ़ा पाते हैं। सुनीता केजरीवाल की भावनात्मक अपील केजरीवाल के बिखरते जनाधार को संभालने में कितनी सफल हो पाती है, यह भी देखने वाली बात होगी। हालांकि, लोकसभा चुनावों में भी वे हर पल केजरीवाल के साथ खड़ी रहीं, लेकिन उनकी कोई भी अपील आम आदमी पार्टी की उम्मीदवारों को हार से नहीं बचा सकी।

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