Mumbai Hostage Case: पूर्व मंत्री केसरकर बोले- 'रोहित को आर्थिक मदद दी थी’; पत्नी का इनकार; खड़े हो रहे सवाल
केसरकर ने कहा कि रोहित आर्य राज्य शिक्षा विभाग की एक पहल ‘लेट्स चेंज प्रोजेक्ट’ में प्रोजेक्ट डायरेक्टर रह चुका था। इस प्रोजेक्ट के तहत उसने ‘स्वच्छता मॉनिटर’ अभियान चलाया था, जिसमें 64,000 स्कूलों और करीब 59 लाख छात्रों ने भाग लिया था। इसका उद्देश्य बच्चों के माध्यम से स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाना था।
उन्होंने कहा कि रोहित आर्य ने विभाग से बकाया राशि का दावा किया था। इस बारे में उसने मुझसे भी मुलाकात की थी और अपनी आर्थिक दिक्कत बताई। इसके बाद मैंने उसे शिष्टाचारवश उसकी आर्थिक मदद की थी। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि उसे कितने रुपये दिए गए थे।
केसरकर ने यह भी बताया कि उस पहल को लेकर विभाग ने यह आपत्ति दर्ज की थी कि उसने छात्रों से सीधे वेबसाइट के माध्यम से धन एकत्र किया था, जिसके लिए उससे स्पष्टीकरण मांगा गया था। केसरकर ने कहा कि विभाग ने उसे अवसर दिया था कि वह अपना पक्ष रखे, लेकिन उसने बातचीत का रास्ता नहीं चुना।
लेट्स चेंज’ परियोजना का निदेशक था रोहित आर्य
गौरतलब है कि 25 जनवरी 2024 को जारी हुए सरकारी प्रस्ताव (जीआर) के मुताबिक, रोहित आर्य ‘लेट्स चेंज’ परियोजना के निदेशक थे और उन्होंने जुलाई 2023 से अक्टूबर 2023 तक स्वच्छता मॉनिटर अभियान चलाया था। इसके दूसरे चरण के लिए ‘मुख्यमंत्री माझी शाळा, सुंदर शाळा’ योजना के तहत 20.63 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे, जिनमें से 2 करोड़ रुपये इसी परियोजना के लिए आवंटित थे।
पिछले साल भी दिया था बकाया भुगतान की मांग को लेकर धरना
गौरतलब है कि रोहित आर्य ने पिछले साल पुणे में भी अपने बकाया भुगतान की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना दिया था। तब उसेमिर्गी का दौरा पड़ा था और राहगीरों ने उसे अस्पताल पहुंचाया था।
पत्नी की ये प्रतिक्रिया
वहीं, मामले में उसकी पत्नी अंजलि आर्य ने मीडिया से कहा कि मेरे पति ने परियोजना पूरी कर दी थी, लेकिन न तो उन्हें भुगतान मिला और न ही कोई मान्यता। उन्होंने कई बार सरकारी अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
बच्चों को बचाया गया
पुणे निवासी रोहित आर्य ने एक वीडियो जारी कर बच्चों को वेब सीरीज में एक्टिंग के लिए ऑडिशन पर बुलाया था। उसने 15 वर्ष की उम्र के करीब 100 बच्चों को बुलाया था। इनमें लड़के-लड़कियां दोनों शामिल थीं। बाद में उसने 17 बच्चों व दो अन्य लोगों को बंधक बना लिया। पुलिस उपायुक्त दत्ता नलावडे ने बताया कि पुलिस को दोपहर करीब 1:30 बजे सूचना मिली कि महावीर क्लासिक बिल्डिंग में आरए स्टूडियो के अंदर एक व्यक्ति ने बच्चों को बंधक बना लिया है। पवई पुलिस के अधिकारी त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी), बम निरोधक दस्ते और दमकल विभाग की एक टीम के साथ मौके पर पहुंचे। आर्य के पास एक एयर गन और कुछ रसायन भी थे। इसलिए बेहद सावधानी से ऑपरेशन चलाकर बच्चों को मुक्त कराया गया। पुलिस की गोलीबारी में घायल रोहित को अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) सत्यनारायण ने कहा कि सभी बच्चे सुरक्षित हैं, उन्हें उनके अभिभावकों को सौंप दिया गया है।
आर्य ने वीडियो जारी कर दी स्टूडियो में आग लगाने की धमकी भी दी
बच्चों को बंधक बनाने के बाद रोहित आर्य ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर स्टूडियो में आग लगाने की धमकी दी। उसने कहा, मैं रोहित आर्य हूं। आत्महत्या करने के बजाय, मैंने एक योजना बनाई और कुछ बच्चों को बंधक बना लिया। मेरी बहुत साधारण और नैतिक मांगें हैं। मेरे कुछ सवाल हैं जिनके जवाब चाहता हूं। मैं कुछ लोगों से बात करना चाहता हूं और उनके उत्तरों के आधार पर, यदि कोई प्रति-प्रश्न हों, तो मैं उनसे पूछना चाहता हूं। लेकिन मुझे ये उत्तर चाहिए। मुझे और कुछ नहीं चाहिए। मैं आतंकवादी नहीं हूं, न ही मेरी कोई पैसों की मांग है। मैं बस साधारण बातचीत करना चाहता हूं। आर्य ने कहा अगर उसकी बात नहीं मानी गई तो वह स्टूडियो में आग लगा देगा।
ये सवाल अकेले मेरे नहीं, इनसे बहुत लोगों का समाधान होगा
आर्य ने वीडियो में कहा, मैं जो सवाल पूछना चाहता हूं वह अकेले मेरे सवाल नहीं हैं, बहुत सारे लोग इन्हें पूछना चाहते हैं। मैं कुछ लोगों से इनके जवाब मांगकर बहुत सारे लोगों की मदद करना चाहता हूं। इससे बहुत लोगों की समस्याओं का समाधान होगा। अगर मेरी बात नहीं मानी जाती तो मैं यहां आग लगा दूंगा और उसके बाद मैं नहीं जानता क्या होगा। बच्चे मर सकते हैं, उन्हें ट्रॉमा हो सकता है और इस सबका जिम्मेदार मैं नहीं होऊंगा।
पुलिस उपायुक्त ने बताया कि पुलिस ने आर्य से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन जब बातचीत में कोई प्रगति नहीं हुई, तो पुलिस की टीम बाथरूम के रास्ते स्टूडियो में घुसी और अंदर मौजूद एक अन्य व्यक्ति की मदद से उसे काबू कर लिया। उन्होंने बताया कि 17 बच्चों, एक वरिष्ठ नागरिक और एक अन्य व्यक्ति को बचा लिया गया। डीसीपी नलावडे ने कहा कि यह एक चुनौतीपूर्ण अभियान था, क्योंकि हम उससे बिना किसी सकारात्मक नतीजे के बातचीत कर रहे थे। बच्चों की जान बचाना हमारी प्राथमिकता थी। पुलिस आर्य के बारे में जानकारी जुटा रही है।