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अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीजों को हर हाल में रहना होगा मजबूत

अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली Updated Sat, 25 Jul 2020 07:37 AM IST
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coronavirus - फोटो : अमर उजाला

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अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीजों को होम क्वारंटीन मरीजों से ज्यादा मानसिक तकलीफ हो सकती है। बंगलूरू स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ के मनोरोग विभाग के डॉ. चेतन बासवरजप्पा और डॉ. गुरु एस गौड़ा का कहना है कि व्यक्ति को शारीरिक-मानसिक रूप से मजबूत होना होगा। अस्पताल में मरीजों खासकर पहले से ही मनोरोग के शिकार लोगों के लिए मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां घातक हो सकती हैं। तो जानते हैं, क्या परेशानी हो सकती है और कैसे बचाव संभव है....
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अवसाद और घबराहट
कोरोना के डर और परिवार से अलग होने पर अवसाद में जाने और घबराहट के कारण मरीज असहाय महसूस करता है और स्वभाव में भी बदलाव आने लगता है। दैनिक काम तक नहीं कर पाता है। आत्महत्या के विचार आ सकते हैं ।
लक्षणों को पहचानना होगा

मानसिक कमजोरी के साथ डर, घबराहट, चिड़चिड़ापन, गुस्सा, शून्यता, तनाव, निराशा और उदासी होगी। यह मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने का शुरुआती लक्षण है।
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