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गंभीर बीमारी से पीड़ित 9 साल की बच्ची को लोकनायक अस्पताल ने दी 2020 में एमआरआई की तारीख

Tue, 09 Oct 2018 07:48 PM IST
अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Updated Tue, 09 Oct 2018 07:48 PM IST
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hospital gave the 9 year old girl with serious illness in 2020, the date of MRI
Lok nayak Hospital
नौ साल की प्रिया के सिर में गांठ है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय पर उसका इलाज नहीं हुआ तो इसका गंभीर परिणाम हो सकता है। लेकिन ऐसी गंभीर स्थिति में भी दिल्ली के लोकनायक अस्पताल ने एमआरआई के लिए उसे मई 2020 का समय दे दिया। हद तो तब हो गई जब गंभीर बीमारी से जूझ रही प्रिया को यह बता दिया गया कि चूंकि वह दिल्ली की रहने वाली नहीं है, इसलिए उसका इलाज पहले नहीं किया जा सकता।
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एक चाय की दुकान चलाने वाले प्रिया के पिता राज राठौर ने अमर उजाला को बताया कि प्रिया के सिर में तेज दर्द रहता था। अक्सर वह बेहोश हो जाती थी। पहले तो उन्होंने बेटी को स्थानीय डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन कोई लाभ न होने पर दिल्ली के लोकनायक अस्पताल से संपर्क किया। प्राथमिक स्तर पर जांच के बाद ही प्रिया को गंभीर परेशानी होने की जानकारी मिल गयी। 
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डॉक्टर ने अपनी शंका को कंफर्म करने के लिये प्रिया का सीटी स्कैन कराने का निर्णय लिया। दिल्ली के अस्पतालों में हर टेस्ट फ्री कराने का दावा कराने के केजरीवाल सरकार के आदेश के बावजूद प्रिया को सीटी स्कैन की तारीख नहीं मिली। मजबूर पिता ने गाजियाबाद के सर्वोदय अस्पताल से 4,000 रुपये में सीटी स्कैन कराया। एक चाय बेचने वाले पिता के लिए यह एक बड़ी रकम थी, लेकिन बेटी के इलाज के लिए उसे सबकुछ करना पड़ा।
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एमआरआई के लिए 2020 की तारीख

सीटी स्कैन से यह पता चल गया कि प्रिया के सिर में गांठ है जो उसके लिए खतरनाक साबित हो सकती है। गांठ की स्थिति की ज्यादा जानकारी के लिए डॉक्टर ने प्रिया का एमआरआई कराने का निर्णय लिया और प्रिया को एमआरआई कराने के लिए भेज दिया। लेकिन इतने गंभीर मामले में भी अस्पताल के टेस्ट सेक्शन ने प्रिया को एमआरआई के लिए 14 मई 2020 की तारीख दे दी। 

राज राठौर के मुताबिक उसने अस्पताल के लोगों से खूब मिन्नतें की और टेस्ट जल्दी कराने की विनती की लेकिन किसी पर उसका कोई असर नहीं हुआ। अंत में, अपने एक परिचित के माध्यम से वह केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के पास पहुंचे जहां उन्होंने एक सिफारिशी पत्र लिख दिया। मंत्री के पत्र के बाद प्रिया का लगभग महीने भर बाद टेस्ट हो सका।

फिर मिली तीन महीने बाद की तारीख

प्रिया की जांच के लिए डाक्टरों ने एक बार फिर अल्ट्रासाउंड कराने के लिए लिखा है। लेकिन सीटी स्कैन और एमआरआई की तरह उन्हें इस बार भी तीन महीने बाद दिसंबर की तारीख मिली है। राज का कहना है कि हर बात पर अस्पताल के कर्मचारी उन्हें बता देते हैं कि चूंकि वह दिल्ली का नहीं है, इसलिए उनकी बेटी का इलाज पहले नहीं हो सकता। यह सरकार का आदेश है और उसे मानने के लिए वे बाध्य हैं। 

मजबूर पिता सिर्फ इतना पूछ पाता है कि अगर टेस्ट फ्री नहीं हो सकता, समय पर टेस्ट नहीं कराया जा सकता तो दिल्ली सरकार इसका ढिंढोरा क्यों पीट रही है। मजबूर पिता की आवाज न सरकार के कानों तक पहुंचती है, न अस्पताल के कर्मचारियों तक। राज के मुताबिक वे हेल्पलाइन नंबर पर भी कई बार फोन कर चुके हैं, लेकिन उन्हें कोई मदद नहीं मिली है।

क्यों हो रहा है ऐसा

अस्पताल के मरीजों को टेस्ट की सुविधा न मिलती हो, ऐसा बिल्कुल नहीं है। दरअसल, जैसे ही कोई डॉक्टर किसी टेस्ट के लिए लिखता है, आपको अस्पताल के ही अन्य कर्मचारियों से एक नंबर मिल जाता है। आप बस उस नंबर पर फोन कर दीजिए। टेस्ट क्लीनिक के लोग अस्पताल आकर टेस्ट के लिए ब्लड या यूरिन का सैंपल ले जाते हैं और शाम तक रिपोर्ट आपके हाथ में आ जाती है। लेकिन इसके लिए आपको फीस चुकानी पड़ती है। 


दिल्ली सरकार के दावों के विपरीत यहां हर टेस्ट के लिए मरीजों को पूरा पैसा देना पड़ता है। उसी लोकनायक अस्पताल में कई जगहों पर बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगे हैं जिसमें वे यह दावा कर रहे हैं कि उनके अस्पतालों में सभी टेस्ट फ्री हैं।
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