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भुगतान विवाद पर मरीज या शव को रखना अस्पतालों को पड़ेगा भारी, मोदी सरकार ला रही सख्त कानून

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 16 Sep 2018 06:27 PM IST
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भुगतान न होने की स्थिति में मरीज या मरीज के शव को अस्पताल में रोके जाने जैसी अमानवीय घटनाओं पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार जल्द ही सख्त कानून लाने जा रही है। अस्पतालों की इन अमानवीय हरकतों को अपराध की श्रेणी में लाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मरीजों के अधिकारों को लेकर एक चार्टर जारी किया है।
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जानिए क्या है मरीज चार्टर
मरीज चार्टर के मसौदे के अनुसार अस्पताल भुगतान को लेकर विवाद जैसे प्रक्रियात्मक आधार पर किसी मरीज को रोक कर नहीं रख सकता और उसे अस्पताल से छुट्टी देने से इनकार नहीं कर सकता। इसमें कहा गया है कि यह अस्पताल की जिम्मेदारी है कि वह अस्पताल में इलाज कराने वाले किसी मरीज को गलत तरीके से नहीं रोके अथवा उसका शव देने से इनकार नहीं करे।

15 दिन में विवादों का निपटारा
चार्टर राष्ट्रीय मानाधिकार आयोग द्वारा अन्य अंतर्राष्ट्रीय चार्टरों से प्रभावित होकर बनाया गया है। इसका उद्देश्य भारत में मरीज के अधिकारों से सम्बंधित कानूनों को मजबूत बनाना है। इसमें मरीज को आपातकालीन स्वास्थ्य देखभाल का अधिकार, मंजूरी, किसी प्रकार के भेदभाव की मनाही, दूसरी राय तथा उपलब्ध होने पर वैकल्पिक उपचार के विकल्प को चुनना इत्यादि शामिल हैं। 

मसौदे के अनुसार, मरीजों और उनके परिजनों को अपनी शिकायतों के निष्पक्ष और शीघ्र निपटारे का अधिकार है। शिकायत दर्ज होने के 15 दिन के अंदर उन्हें लिखित में शिकायत के निस्तारण की जानकारी मिलनी चाहिए। प्रत्येक अस्पताल में एक आंतरिक निवारण तंत्र स्थापित होना चाहिए।

संयुक्त सचिव सुधीर कुमार की ओर से जारी नोटिस के अनुसार मंत्रालय राज्य सरकारों के माध्यम से इस चार्टर को लागू कराना चाहता है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) द्वारा तैयार इस चार्टर को स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट पर डाला गया है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने अब राज्य सरकारों द्वारा लागू 'रोगी अधिकारों का चार्टर' प्रस्तावित किया है। यह मसौदा अब सार्वजनिक अधिकार क्षेत्र में उपलब्ध है। वहीं इस संबंध में आम लोगों और पक्षकारों से 30 सितंबर 2018 तक टिप्पणियां, सुझाव और विचार मांगे गए हैं। 

दूसरी राय लेने का अधिकार 
प्रत्येक रोगी या उसकी देखभाल करने वालों की पसंद के उपयुक्त अन्य चिकित्सक से दूसरी राय लेने का अधिकार है। अस्पताल प्रबंधन के पास दूसरी राय के रोगी के अधिकार का सम्मान करने का कर्तव्य है और रोगी के देखभाल करने वालों को बिना किसी अतिरिक्त लागत या देरी के इस तरह की राय मांगने के लिए सभी आवश्यक रिकॉर्ड और जानकारी प्रदान की जाए।
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जानिए मरीज चार्टर ड्राफ्ट में दिए गए 17 अधिकारों के बारे में

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