Horticulture Nursery: सरकार साथ दे तो चीन को पछाड़ सकते हैं हमारे 'माली', मॉडर्न नर्सरी पर बर्बाद हो रहे पैसे
Horticulture Nursery: इंडियन नर्सरीमैन एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष वाईपी सिंह का कहना है, देश के नर्सरी संचालकों को इतना काबिल बनाया जा रहा है कि वे अपने पौधों को दूसरे देशों के बाजार में पहुंचा सकें। उनका मुकाबला अब विदेशी कंपनियों से है। भारत में दूसरे मुल्कों के मुकाबले पौधे सस्ते हैं। अब यहां गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
देश में पौधों की नर्सरी का कारोबार अब बढ़ता जा रहा है। कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार का साथ मिल जाए तो भारत इस व्यवसाय में चीन सहित कई बड़े राष्ट्रों को पछाड़ सकता है। देश में अब यह कारोबार 50 हजार करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुका है। इंडियन नर्सरीमैन एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष वाईपी सिंह का कहना है, देश में तकरीबन पांच लाख से अधिक नर्सरी खुल चुकी हैं। खास बात है कि कोविड संक्रमण के बाद इस कारोबार में करीब पचास फीसदी का उछाल आया है। मंदी का असर रहा है, लेकिन अब धीरे-धीरे यह कारोबार रफ्तार पकड़ रहा है। एसोसिएशन द्वारा सात सितंबर को दिल्ली के महिपालपुर इलाके में 'मॉडर्नाइजेशन ऑफ हॉर्टिकल्चर नर्सरी' विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया जा रहा है। इसमें उन तकनीकों पर विचार होगा, जिसकी मदद से लोग अपने घरों में ही फल व सब्जियां उगा सकेंगे।
मुकाबला अब विदेशी कंपनियों से है
एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष वाईपी सिंह ने बताया, देश में हॉर्टिकल्चर नर्सरी को लेकर काम शुरू किया गया है। चूंकि अब यह कारोबार देश की सीमाओं से बाहर जा चुका है, इसलिए इसे मॉडर्न नर्सरी की प्रक्रिया में ढालना अनिवार्य है। देश के नर्सरी संचालकों को इतना काबिल बनाया जा रहा है कि वे अपने पौधों को दूसरे देशों के बाजार में पहुंचा सकें। उनका मुकाबला अब विदेशी कंपनियों से है। हालांकि इस पहल में अगर सरकार थोड़ा बहुत साथ दे, तो भारत के नर्सरीमैन चीन ही नहीं, बल्कि कई बड़े देशों को पीछे छोड़ सकते हैं। वजह, भारत में दूसरे मुल्कों के मुकाबले पौधे सस्ते हैं। अब यहां गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार ने अपनी नर्सरी खोलकर इस कारोबार को आगे बढ़ाने की कोशिश की थी, लेकिन वह सफल नहीं हुई। सरकार की मॉडर्न नर्सरी योजना, आगे नहीं बढ़ सकी। पैसे की बर्बादी हो रही है।
निजी क्षेत्र ही ज्यादा अच्छा कर रहे हैं
बतौर वाईपी सिंह, केंद्र सरकार एक मॉडर्न नर्सरी तैयार करने के 10 से 15 करोड़ रुपये खर्च करती है। यह बात लोग अच्छे से जानते हैं कि इस मामले में प्राइवेट प्लेयर ही ज्यादा अच्छा कर रहे हैं। इंडियन नर्सरीमैन एसोसिएशन को सरकार से कोई सहायता नहीं मिलती। इसके बावजूद प्राइवेट प्लेयर अपनी मेहनत से विदेशी कंपनियों से मुकाबला करने को तैयार हो रहे हैं। चीन में यह व्यवस्था बनाई गई है कि वहां नर्सरीमैन को एक ही जगह पर सारी सुविधाएं मुहैया करा दी जाती हैं। देश विदेश के नर्सरी संचालक वहां पहुंचकर कारोबार कर सकते हैं। अपना माल बेच सकते हैं या खरीद सकते हैं। कोविड के बाद यह कारोबार तेजी से बढ़ा है। खासतौर पर सजावटी और फल वाले पौधे की सेल बढ़ गई है। लोग, अपने घर पर ही सब्जियां उगाना चाहते हैं। अब ऐसा तो सभी लोग नहीं कर सकते कि कहीं पर कोई खाली जगह ले ली जाए और वहां बागवानी करें। इसके लिए जरूरी है कि लोगों को ऐसे पौधे और तकनीक मुहैया कराई जाए, जिससे वे अपने घर की थोड़ी बहुत जगह पर ही फल सब्ज़ी तैयार कर सकें।
अगले वर्ष होगा 'इंडिया इंटरनेशनल हॉर्टि एक्सपो'
फरवरी 2023 में नोएडा में 'इंडिया इंटरनेशनल हॉर्टि एक्सपो' आयोजित किया जाएगा। यह एक ऐसा प्लेटफार्म होता है, जहां पर सभी 'हॉर्टिकल्चर' एक्टिविस्ट एकत्रित होते हैं। एसोसिएशन द्वारा बिना सरकारी मदद के यह प्रोग्राम आयोजित किया जाएगा। करीब 12 साल पहले सरकार ने एक्सपोर्ट के लिए नासिक व दिल्ली में इंटरनेशनल हब शुरू किया था। अब उसका कोई अस्तित्व ही नहीं है। एसोसिएशन का प्रयास है कि एक ऐसा प्लेटफार्म विकसित किया जाए, जहां पर देश विदेश के सभी नर्सरीमैन को अपनी बात रखने का मौका मिल सके। वे अपने उत्पाद का बेहतर रेट हासिल कर सकें। नर्सरी में तकनीक का योगदान, इस विषय पर आदान प्रदान हो सके।
विदेशी कारोबारियों को टक्कर देने के लिए इस तरह की पहल बहुत जरूरी है। सात सितंबर को आयोजित सेमिनार में तीन सौ नर्सरीमैन, उद्यान विशेषज्ञ और गार्डन तैयार करने वाले लोग यानी लैंड स्कीपर हिस्सा लेंगे। दूसरे देशों के कौन से पौधे भारत की जलवायु में बढ़ सकते हैं, इस पर चर्चा होगी। सेमिनार में 'इंडिया इंटरनेशनल हॉर्टि एक्सपो' की ग्लोबल लॉंचिंग की जाएगी। सेमिनार में परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद, राज्यसभा सदस्य हरनाथ सिंह यादव, लोकसभा सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया व पूर्व राज्यसभा सदस्य आरके सिन्हा सहित अनेक विशेषज्ञ एवं नर्सरीमैन उपस्थित रहेंगे।