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मधुमक्खियों में भी इंसानों की तरह महामारी का डर, यहां भी अमेरिका का बुरा हाल

Wed, 20 May 2020 11:15 AM IST
Tanuja Yadav न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Wed, 20 May 2020 11:15 AM IST
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सार
  • इंसानों की तरह मधुमक्खियों में महामारी फैलने का डर
  • एशिया की मधुमक्खियों से पश्चिमी मधुमक्खियों में पहुंचा संक्रमण
  • वी डिस्ट्रक्चर नाम का परजीवी घुन फैला रहा है महामारी
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honeybees are also suffering from pandemic like human beings and america hit the most
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विस्तार

कोरोना वायरस के कोहराम से पूरी दुनिया परेशान है, इस रोकने के लिए दुनिया के कई देशों में लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे उपायों को अपनाया जा रहा है। लेकिन दुनिया में अकेले इंसान नहीं है जिन्हें किसी महामारी का सामना करना पड़ रहा है, मधुमक्खियां भी एक तरह की महामारी झेल रही हैं।



करीब एक करोड़ सालों से सफलतापूर्वक सामाजिक जीवन जी रहीं मधुमक्खियां अब एक महामारी से जूझ रही हैं। साइंटिफिक अमेरिकन मैग्जीन में प्रकाशित खबर के मुताबिक वरोआ डिस्ट्रक्टर नाम के परजीवी घुन ने यह महामारी फैलाई है। यह महामारी पहले एशिया की मधुमक्खियों में फैली थी लेकिन अब पश्चिमी प्रजातियों में फैल रही है।

पहले एशिया अब दुनियाभर में संक्रमण

यह परजीवी घुन एशिया की मधुमक्खियों से पश्चिमी मधुमक्खियों में 1950 के आसपास आया था। बाद में 1957 में जापान, 1963 में हॉन्ग कॉन्ग में फैला लेकिन अब लगभग पूरी दुनिया में फैल गया है। ऑस्ट्रेलिया और कुछ द्वीपों को छोड़कर यह महामारी मधुमक्खियों के लिए खतरा बन गई है। 

अगर इस घुन का इस्तेमाल नहीं किया गया तो मधुमक्खियों का पूरा छत्ता ही दो साल में खत्म हो सकता है। इस परजीवी के साथ दूसरे जीवाणु और खराब पोषण जैसे कारणों से मधुमक्खी पालक अपनी मधुमक्खियों को बचाने के लिए कवायद में जुटे हैं।

अकेले अमेरिका में जितनी मधुमक्खियां है उनमें से आधी इस वी डिस्ट्रक्चर परजीवी घुन से संक्रमित हैं। असल में ये संख्या और भी ज्यादा हो सकती है लेकिन अमेरिका की मधुमक्खियां इस महामारी से ज्यादा प्रभावित हैं।

मधुमक्खी पालकों की परेशानी 

मधुमक्खी पालक धीरे धीरे अपनी मधुमक्खियों की आबादी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन यह उन्हें बहुत महंगा पड़ रहा है। पश्चिमी मधुमक्खियों के साथ परेशानी की बात यह होती है कि वे इस परजीवी घुन के साथ नहीं पनप सकतीं और इनमें घुन से लड़ने की क्षमता नहीं होती।

पश्चिमी मक्खियों में लड़ने की क्षमता नहीं
एशिया की मधुमक्खियां पश्चिमी मधुमक्खियों से थोड़ी खास होती हैं। एशिया की मधुमक्खियां घुन संक्रमित अपने शिशुओं को दफना देती हैं और इनके शिशु संक्रमण आते ही खुद को खत्म कर देते हैं। ऐसा करने से संक्रमण नहीं फैलता है। 

ये गुण व्यावसायिक उत्पादन वाली मधुमक्खियों में भी आ सकते हैं लेकिन इसके लिए बड़े पैमाने पर चुनिंदा प्रजनन करना होगा और ये काफी महंगा हो सकता है।

घुननाशक का इस्तेमाल

मादा मधुमक्खी उत्पादकों ने उन मक्खियों का अमेरिका में उत्पादन किया जो घुन से लड़ सकती हैं। लेकिन समस्या यह आई कि इनके अंडे जन्मी मधुमक्खियों में घुन प्रतिरोधक क्षमता नहीं पाई गई, जिस वजह से उत्पादकों ने घुननाशक का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।

मधुमक्खी पालकों ने छत्तों में घुन को मारने के लिए घुननाशक का इस्तेमाल किया लेकिन संक्रमण दोबारा ना फैलने की संभावना कम थी। घुननाशक जल्दी ही दूसरे छत्तों में मिल जाते हैं। हालांकि अभी घुननाशक से समस्या थोड़ी काबू में है लेकिन घुन जल्दी ही घुननाशक के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने लगेंगे।

एक और परजीवी से महामारी संभव
वी डिस्ट्रक्चर के अलावा एकट्रोपिलाएलाप्स नाम का एक परजीवी घुन एक और महामारी फैला रहा है। यह भी एशिया की बड़ी मधुमक्खियों से अमेरिका की मधुमक्खियों में पहुंचा है। यह घुन वरोरा से ज्यादा घातक है। माना जा रहा है कि यह दूसरे महाद्वीपों से अमेरिका में फैल सकता है।

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