फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Home Ministry Reviewing Risk and Hardship Allowance in CAPF

Home Ministry: CAPF में हो रही 'रिस्क एंड हार्डशिप अलाउंस' की समीक्षा, क्या जवानों के भत्तों में होगी कटौती?

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 14 Apr 2023 05:43 PM IST
विज्ञापन
सार
Home Ministry: 06 अप्रैल 2023 को गृह मंत्रालय में हुई एक बैठक में विभिन्न केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में तैनाती वाले ऐसे क्षेत्रों के वर्गीकरण की समीक्षा की गई थी, जहां पर जवानों-अफसरों को रिस्क एंड हार्डशिप अलाउंस दिया जाता है। इनमें जम्मू-कश्मीर, नक्सल प्रभावित जिले और उत्तर पूर्व के क्षेत्र शामिल हैं...
loader
Home Ministry Reviewing Risk and Hardship Allowance in CAPF
Home Ministry: CAPF - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

केंद्रीय गृह मंत्रालय, विभिन्न सुरक्षा बलों सीएपीएफ/असम राइफल्स को मिलने वाले 'रिस्क एंड हार्डशिप अलाउंस' की समीक्षा कर रहा है। सभी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों से उन इलाकों की जानकारी मांगी गई है, जहां पर 'रिस्क एंड हार्डशिप अलाउंस' प्रदान किया जाता है। देश में ऐसी कितनी लोकेशन हैं, जहां पर ये भत्ता मिलता है। वहां पर कौन से बल के कितने जवान तैनात हैं। भत्ता दिए जाने के क्या मानदंड हैं। सूत्रों का कहना है कि उन लोकेशन पर 'रिस्क एंड हार्डशिप अलाउंस' को खत्म किया जा सकता है, जहां पर अब स्थितियां बेहतर हो रही हैं। नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। जम्मू कश्मीर और उत्तर पूर्व में भी आतंकवाद की घटनाओं में कमी आई है। कई जगहों से सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) हटाया गया है।

यह भी पढ़ें: Jammu Kashmir: पूर्व राज्यपालों के 'सिक्योरिटी' कवर को लेकर MHA से पूछे गए सवालों का मिला ये जवाब

06 अप्रैल 2023 को गृह मंत्रालय में हुई एक बैठक में विभिन्न केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में तैनाती वाले ऐसे क्षेत्रों के वर्गीकरण की समीक्षा की गई थी, जहां पर जवानों-अफसरों को रिस्क एंड हार्डशिप अलाउंस दिया जाता है। इनमें जम्मू-कश्मीर, नक्सल प्रभावित जिले और उत्तर पूर्व के क्षेत्र शामिल हैं। इस बैठक की अध्यक्षता एडीशनल सेक्रेटरी/फाइनेंशियल एडवाइजर ने की थी। सीएपीएफ कर्मियों को रिस्क एंड हार्डशिप अलाउंस देने की प्रक्रिया को किस तरह से आसान बनाया जाए, बैठक में इस पर चर्चा हुई। इसके बाद सीएपीएफ और असम राइफल्स से उनके जवानों की तैनाती वाले क्षेत्रों की जानकारी मांगी गई है। एडीशनल सेक्रेटरी/फाइनेंशियल एडवाइजर की ओर से इस बात पर जोर दिया गया कि उक्त विषय के संबंध में उद्देश्य मानदंड विकसित जाने की आवश्यकता है। इसके जरिए ही आरएच मैट्रिक्स जैसे आर1एच1, आर2एच2 और आर3एच3 में सीएपीएफ तैनाती के वर्गीकरण की समीक्षा हो सकती है।

सीएपीएफ/असम राइफल से मांगी गई थी यह जानकारी

तैनाती वाले क्षेत्रों की जानकारी में प्लाटून, पोस्ट, कंपनी, बटालियन, फ्रंटियर, सेक्टर हेडक्वार्टर व स्टैटिक लोकेशन आदि शामिल है। जवानों की तैनाती का ब्लॉक, तहसील, सब डिवीजन, जिला और राज्य के अलावा स्थान का अक्षांश देशांतर और संबंधित पोस्ट पर किस तरह की ड्यूटी दी जा रही है, ये जानकारी भी मांगी गई है। असम राइफल्स, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, सीआरपीएफ और एसएसबी की कितनी लोकेशन पर आरएच मेट्रिक्स और एससीए स्वीकार्य है, ये भी बताना है। साथ ही ये जानकारी भी देनी होगी कि तैनाती वाले क्षेत्र में किस तरह का रिस्क है। वहां पर किस तरह की 'हार्डशिप' शामिल है। अगर उस क्षेत्र में आर्मी भी तैनात है, तो उसके जवानों को किस तरह का भत्ता प्रदान किया जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed