फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Home Ministry Issues Guidelines To States to ensure strict action against atrocities against women

पीड़िता का मृत्यु पूर्व बयान अहम, भले ही मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज न हुआ हो

Sun, 11 Oct 2020 06:04 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 11 Oct 2020 06:04 AM IST
विज्ञापन
Home Ministry Issues Guidelines To States to ensure strict action against atrocities against women
गृह मंत्रालय - फोटो : ANI

दुष्कर्म और यौन हमलों के मामलों में भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 32 (1) के तहत मृतका का लिखित या मौखिक बयान एक अहम तथ्य के तौर पर माना जाएगा। इसे इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता है कि ऐसे बयान को मजिस्ट्रेट या किसी पुलिस अफसर के सामने रिकॉर्ड नहीं किया गया।

विज्ञापन


केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के पुरुषोत्तम चोपड़ा बनाम दिल्ली सरकार मामले में सात जनवरी, 2020 के एक आदेश के मुताबिक, मरने के पहले का दिया गया बयान बेहद अहम तथ्य है और यह न्यायिक जांच के लिए सभी जरूरतों को पूरा करता है।
विज्ञापन



एडवाइजरी के मुताबिक, महिलाओं के खिलाफ अत्याचार पर त्वरित व सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। इन मामलों से जुड़े सभी अधिकारी और पुलिस संबंधित कानून का कड़ाई से पालन करें। सीआरपीसी की धारा 173 के तहत दुष्कर्म के मामलों में दो महीनों में जांच पूरी की जानी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस सिलसिले में गृह मंत्रालय ने इनवेस्टिगेशन ट्रैकिंग सिस्टम फॉर सेक्सुअल ऑफेंसेज (आईटीएसएसओ) नाम से एक ऑनलाइन पोर्टल भी बनाया है जहां ऐसे मामलों की प्रगति पर नजर रखी जा सकती है।

इस एडवाइजरी में गृह मंत्रालय की पांच दिसंबर 2019 की एडवाइजरी का भी संदर्भ दिया गया है जिसमें महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में समय पर और सक्रिय रूप से कार्रवाई की बात की गई थी। साथ ही इसमें दुष्कर्म मामलों की जांच की तय प्रक्रियाओं और यौन अपराध के साक्ष्यों को इकट्ठा करने की किट के संबंध में जारी किए गए दिशा-निर्देशों का भी हवाला दिया गया है।

साक्ष्यों को जुटाने, संग्रह करने या संभालने के लिए प्रशिक्षण
यौन हमलों के मामलों में जांच अधिकारियों या चिकित्सा अधिकारियों के लिए फोरेंसिक साक्ष्य जुटाने, सुरक्षित रखने और उसे ले जाने के संबंध में गृह मंत्रालय के तहत फोरेंसिक विज्ञान सेवा महानिदेशालय ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

ऐसे मामलों की जांच के लिए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की पुलिस को यौन हमला साक्ष्य संग्रह (एसएईसी) किट्स दी गई हैं। हर यौन हमला मामले में इस किट का इस्तेमाल अनिवार्य रूप से हो। जांच में लगे अधिकारियों, पुलिस को साक्ष्य जुटाने, संरक्षित करने और उसे संभालने का नियमित तौर पर प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए।

...ताकि समय पर दोषी के खिलाफ आरोपपत्र तैयार किया जा सके
राज्य और केंद्रशासित प्रदेश सभी संबंधित अधिकारियों को इस बारे में जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर सकते हैं, ताकि इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित हो सके। ऐसे सभी मामलों की प्रगति की ऑनलाइन पोर्टल के जरिये निगरानी भी रखी जाए, ताकि कानून के मुताबिक समय पर दोषी के खिलाफ आरोपपत्र तैयार करने के लिए कार्रवाई की जा सके।


महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 7.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा हाल ही में जारी 2019 के आपराधिक आंकड़ों के अनुसार, देश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 7.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 2018 में देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 3,78,236 मामले दर्ज हुए थे, जो 2019 में बढ़कर 4,05,861 पहुंच गए। 2019 में दुष्कर्म के कुल 32,033 मामले दर्ज हुए हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed