{"_id":"68745dafb8e85a7c28088ca7","slug":"home-ministry-called-growing-radicalism-in-prisons-serious-challenge-instructed-states-uts-to-keep-eye-on-it-2025-07-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Home Ministry: जेलों में बढ़ता कट्टरपंथ बड़ी चुनौती, सरकार का निर्देश- कड़ी नजर रखें राज्य-केंद्र शासित प्रदेश","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Home Ministry: जेलों में बढ़ता कट्टरपंथ बड़ी चुनौती, सरकार का निर्देश- कड़ी नजर रखें राज्य-केंद्र शासित प्रदेश
Mon, 14 Jul 2025 07:00 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Mon, 14 Jul 2025 07:00 AM IST
सार
गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे एक पत्र में कैदियों की जांच, समय-समय पर जोखिम मूल्यांकन और उच्च जोखिम वाले कैदियों को अधिक निगरानी के साथ अलग रखने सहित विभिन्न उपायों की सूची समेत कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मंत्रालय ने ऐसे कैदियों को कट्टरपंथ से मुक्त करने के लिए एक अभियान चलाने के लिए भी कहा है।
विज्ञापन
केंद्रीय गृह मंत्रालय
- फोटो : ANI
विस्तार
गृह मंत्रालय ने जेलों में बढ़ते कट्टरपंथ को गंभीर चुनौती बताया है। मंत्रालय ने जेलों में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने एवं आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कट्टरपंथ की बढ़ती प्रवृत्ति पर तत्काल अंकुश लगाने की जरूरत बताई है। मंत्रालय ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे एक पत्र में कैदियों की जांच, समय-समय पर जोखिम मूल्यांकन और उच्च जोखिम वाले कैदियों को अधिक निगरानी के साथ अलग रखने सहित विभिन्न उपायों की सूची समेत कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मंत्रालय ने ऐसे कैदियों को कट्टरपंथ से मुक्त करने के लिए एक अभियान चलाने के लिए भी कहा है।
विज्ञापन
पत्र में कहा गया है, जेलों में कट्टरपंथ ज्यादा खतरनाक हो सकता है क्योंकि समाज से कटे होने के कारण यहां सामूहिक गतिशीलता और निगरानी की कमी होती है। कुछ मामलों में, कट्टरपंथी कैदी हिंसा में शामिल हो सकते हैं या जेल कर्मचारियों, साथी कैदियों और यहां तक कि बाहरी लक्ष्यों के खिलाफ हमले की योजना बना सकते हैं। मंत्रालय ने कहा, कट्टरपंथ अक्सर यह कई आपराधिक गतिविधियों की पहली वजह पाया गया है। इसलिए, जेलों में कमजोर व्यक्तित्व वालों में कट्टरपंथ की जांच और उनके अंदर की कट्टर सोच को खत्म करने के लिए एक अभ्यास शुरू करने की तत्काल आवश्यकता है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: ED Summon To Lawyers: आज CJI गवई अहम मामले की करेंगे सुनवाई, कानूनी सलाह देने वाले वकीलों को ईडी के समन का केस
विज्ञापन
पहचान करने के लिए लें खुफिया मदद
पत्र में कहा गया है कि कैदी के जेल में प्रवेश के समय और उसकी कारावास अवधि के दौरान, समय-समय पर व्यक्तिगत जोखिम का आकलन किया जाना चाहिए। इसके लिए जेल विभाग, कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय कर सकते हैं ताकि ऐसे कैदियों की पहचान की जा सके जो अन्य कैदियों पर कट्टरपंथी प्रभाव डालने का जोखिम पैदा कर सकते हैं।
ये भी पढ़ें: Supreme Court: केरल की नर्स निमिषा को फांसी से बचाने का मामला, आज सुप्रीम कोर्ट में दो जजों की पीठ में सुनवाई
कट्टरपंथ फैलाने वालों को अलग रखें
दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि उच्च जोखिम वाले कैदी जो कट्टरपंथ की विचारधारा का प्रचार करने के लिए प्रवृत्त हैं, उन्हें सामान्य कैदियों से अलग रखा जाना चाहिए। राज्य अपने एक स्वतंत्र उच्च सुरक्षा जेल परिसर स्थापित करने पर विचार कर सकते हैं जहां उग्र कट्टरपंथी कैदियों, आतंकवादियों को अलग से रखा जा सके।