{"_id":"58ac83544f1c1b0953b2454c","slug":"home-buyers-can-directly-approach-ncdrc-supreme-court","type":"story","status":"publish","title_hn":"घर के खरीदार उपभोक्ता आयोग में कर सकते हैं शिकायत: SC","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
घर के खरीदार उपभोक्ता आयोग में कर सकते हैं शिकायत: SC
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 22 Feb 2017 10:10 AM IST
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि फ्लैट खरीदने वाले निवेशक अपना एक समूह बनाकर बिल्डर के खिलाफ सीधे तौर पर राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत का रुख कर सकते हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह निवेशकों का अधिकार है। वे सामूहिक रूप से अपनी शिकायतें उठा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के यह फैसला निवेशकों के लिए बेहद राहत भरा है।
सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली बिल्डर की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें निवेशकों द्वारा एसोसिएशन बनाकर सीधे राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग जाने को चुनौती दी गई थी। आम्रपाली का कहना था कि निवेशक सीधे राष्ट्र्रीय उपभोक्ता अदालत नहीं जा सकते हैं। उन्हें पहले राज्य उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए था।
यह मामला आम्रपाली के नोएडा स्थित सैपायर प्रोजेक्ट से संबंधित से है। प्रोजेक्ट के 100 निवेशकों ने एक एसोसिएशन का गठन कर राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत में बिल्डर के खिलाफ शिकायत की थी। इसके जवाब में आम्रपाली का कहना था कि उपभोक्ता सरंक्षण अधिनियम, 1986 के तहत एसोसिएशन को ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टेंडर्ड से मान्यता लेनी जरूरी है। साथ ही आम्रपाली का यह भी कहना था कि निवेशकों को लखनऊ स्थित राज्य उपभोक्ता अदालत में शिकायत करनी चाहिए थी।
विज्ञापन
निवेशक सीधे राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत का दरवाजा नहीं खटखटा सकते। साथ ही उसका कहना था कि उसके अपार्टपेंट की कीमत एक करोड़ रुपये से कम हैं। ऐसे में राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत को उनकी शिकायतों पर विचार नहीं करना चाहिए क्योंकि राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत में एक करोड़ रुपये से अधिक के मसले पर सुनवाई होती है। लेकिन इन तमाम दलीलों को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली बिल्डर की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें निवेशकों द्वारा एसोसिएशन बनाकर सीधे राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग जाने को चुनौती दी गई थी। आम्रपाली का कहना था कि निवेशक सीधे राष्ट्र्रीय उपभोक्ता अदालत नहीं जा सकते हैं। उन्हें पहले राज्य उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए था।
विज्ञापन
यह मामला आम्रपाली के नोएडा स्थित सैपायर प्रोजेक्ट से संबंधित से है। प्रोजेक्ट के 100 निवेशकों ने एक एसोसिएशन का गठन कर राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत में बिल्डर के खिलाफ शिकायत की थी। इसके जवाब में आम्रपाली का कहना था कि उपभोक्ता सरंक्षण अधिनियम, 1986 के तहत एसोसिएशन को ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टेंडर्ड से मान्यता लेनी जरूरी है। साथ ही आम्रपाली का यह भी कहना था कि निवेशकों को लखनऊ स्थित राज्य उपभोक्ता अदालत में शिकायत करनी चाहिए थी।
विज्ञापन
निवेशक सीधे राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत का दरवाजा नहीं खटखटा सकते। साथ ही उसका कहना था कि उसके अपार्टपेंट की कीमत एक करोड़ रुपये से कम हैं। ऐसे में राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत को उनकी शिकायतों पर विचार नहीं करना चाहिए क्योंकि राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत में एक करोड़ रुपये से अधिक के मसले पर सुनवाई होती है। लेकिन इन तमाम दलीलों को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।