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शोक में बदल गईं छुट्टियां: ठाणे की महिला ने सड़क हादसे में खोए तीन बच्चे, सात साल पहले हुई थी पति की मौत

Mon, 13 Apr 2026 11:38 PM IST
Nirmal Kant न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ठाणे (महाराष्ट्र)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ठाणे (महाराष्ट्र) Published by: Nirmal Kant Updated Mon, 13 Apr 2026 11:38 PM IST
सार

ठाणे के तीन भाई-बहन छुट्टी मनाने घर से निकले थे और मां से जल्द लौटने का वादा करके गए थे। लेकिन एक भीषण सड़क हादसे ने उनकी जिंदगी छीन ली और पूरे परिवार को उजाड़ दिया। इन भाई-बहनों ने सात साल पहले अपने पिता को भी खो दिया था। पढ़िए रिपोर्ट-

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Holiday turns to heartbreak: 7 years after husband's death, Thane woman loses 3 kids in road cr
ठाणे में भीषण सड़क हादसा - फोटो : आईएएनएस

विस्तार

'मां, हम दो-तीन दिन में वापस आ जाएंगे। ये आखिरी शब्द थे, जो ठाणे जिले के दिवा कस्बे में रहने वाले तीन भाई-बहनों ने घर से निकलते समय अपनी मांग से कहे थे। वे एक रिश्तेदार के यहां छुट्टी मनाने जा रहे थे। लेकिन कुछ ही घंटों बाद एक सड़क हादसे ने सब कुछ बदल दिया। 
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कुछ ही घंटों बाद वहीं शब्द एक टूटी हुई मां को बार-बार याद आने लगे। सोमवार सुबह हुए एक खौफनाक सड़क हादसे में बच्चों की मौत की खबर ने उनकी दुनिया हमेशा के लिए उजाड़ दी। 
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स्नेहा मोहापे (22 वर्षीय), मानसी (20 वर्षीय) और उनका भाई प्रथमेश (17 वर्षीय) उन 11 लोगों में शामिल थे, जिनकी सड़क हादसे में मौत हो गई। यह हादसा एक सवारियों से भरी हुई वैन और सीमेंटर मिक्सर ट्रक की आमने-सामने टक्कर में हुआ। टक्कर उल्हास नदी पर बने नए पुलस पर हुई। यह पुल कल्याण तालुका के रायते गांव के पास है। 
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सात साल पहले हुई थी पति की मौत
इस हादसे ने अंजना मोहापे का पूरा सहारा छीन लिया। वह अकेली मां थीं, जो पिछले सात साल से अपने पति की मौत के बाद हिम्मत और मेहनत से अपने बच्चों को पाल रही थीं। अंजना घरों में काम करती थीं। उन्होंने मेहनत कर अपने बच्चों की पढ़ाई जारी रखी। उन्हें उम्मीद थी कि बच्चे जल्द अपने पैरों पर खड़े होंगे और परिवार को आर्थिक तंगी से बाहर निकालेंगे।

हादसे ने छीन लिया अंजना का सहारा
परिवार के एक सदस्य नाथू मोहापे ने कहा, वह अपने बच्चों के लिए ही जीती थीं। पति की मौत के बाद यही तीन बच्चे उनके जीने का सहारा थे। परिवार का सदस्य यह कहते हुए भावुक हो गया कि वे होशियार बच्चे थे और अपनी मांग की मदद के सपने देखते थे। अब एक पल में सब खत्म हो गया। 


चाचा के घर जा रहे थे तीनों भाई-बहन
तीनों भाई-बहन अपने चाचा के घर जा रहे थे। वे मुरबाड तालुका के पन्हे गांव जा रहे थे। कॉलेज की छुट्टियां बिताने के लिए वे वहां जा रहे थे। हादसा इतना भयानक था कि वैन पूरी तरह लोहे के ढेर में बदल गई। मोहापे के तीनों बच्चों के बचने की कोई संभावना नहीं बची। स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया। लेकिन तब तक इस हादसे में लगभग एक दर्जन यात्रियों की जान जा चुकी थी।

घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश
इस दुर्घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ गया है। कल्याण-अहिल्यानगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारी वाहनों को लेकर लोगों ने नाराजगी जताई है। लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में लगे ट्रक और डंपर अक्सर तेज रफ्तार से चलते हैं और सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करते। इसी वजह से ऐसे हादसे बार-बार हो रहे हैं।

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