पाकिस्तान में हिंदू घटे लेकिन सिर्फ बंटवारे के वक्त, बांग्लादेश में हालात चिंताजनक
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कुछ दिन पहले ही नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 अस्तित्व में आया है। इसे लेकर पूर्वोत्तर के राज्यों में अब भी बवाल मचा हुआ है। विरोध-प्रदर्शन चरम पर हैं। वहीं इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर बयानबाजी भी हो रही है।
लोकसभा और फिर राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश में अल्पसंख्यक और हिंदुओं की आबादी में गिरावट का मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया था। विधेयक के समर्थन में वोट करने वाले सांसदों का तर्क था कि इन तीनों देशों में हिंदुओं पर काफी अत्याचार हुआ और उनकी आबादी तेजी से कम हो रही है।
टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर के मुताबिक, आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी में जो कमी आई थी वह बंटवारे के समय थी, वहीं बांग्लादेश में यह गिरावट अब भी जारी है। 1941 से 1951 के बीच पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी में जबरदस्त गिरावट आई, इसके बाद यह सिलसिला थम गया था। आकंड़ों पर गौर करें तो 1951 के बाद हिंदुओं की आबादी में थोड़ी-बहुत वृद्धि ही हुई है।
पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी
- 1931 - 15 फीसदी
- 1941 - 14 फीसदी
- 1951 - 1.3 फीसदी
- 1961 - 1.4 फीसदी
- 1981 - 1.5 फीसदी
- 1998 - 1.6 फीसदी (करीब 30 लाख)
नोट: यह आंकड़े पाकिस्तान में 1998 हुए जनगणना के मुताबिक हैं। 1998 में जनगणना के वक्त पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी 21 लाख थी। 2017 की जनगणना के मुताबिक पाकिस्तान की कुल जनसंख्या 207 मिलियन (करीब 20 करोड़ 70 लाख) है। उसमें हिंदुओं की आबादी जस की तस बनी हुई है जो करीब 30 लाख है।
बंटवारे के बाद भारत के पंजाब में भी घटी मुसलमानों की आबादी
बंटवारे के बाद सिर्फ पाकिस्तान में हिंदुओं की जनसंख्या में कमी नहीं आई थी, उस वक्त भारत के पंजाब में भी मुस्लिमों की आबादी में कमी आई थी। 1941 से 1951 के बीच पंजाब से मुसलमानों की आबादी तेजी से कमी आई थी। 1941 में पंजाब में मुसलमानों की आबादी 32.3 फीसदी थी, जोकि 1951 में घटकर 0.8 फीसदी रह गई। 2001 में इनकी आबादी में थोड़ी बढ़त हुई और यह 1.6 फीसदी पहुंच गई। 14 अगस्त 1947 से पहले 21 लाख मुस्लिम पश्चिमी पाकिस्तान जा चुके थे, जबकि 20 लाख हिंदू और सिख भारत आए थे। 1950 तक 65 लाख मुसलमान पाकिस्तान चले गए और 47 लाख हिंदू और सिख भारत आए।
- 1931 - 54.4 फीसदी
- 1941 - 32.3 फीसदी
- 1951 - 0.8 फीसदी
- 1961 - 1.9 फीसदी
- 1971 - 0.8 फीसदी
- 1981 - 1.0 फीसदी
- 1991 - 1.2 फीसदी
- 2001 - 1.6 फीसदी
नोट: यह आंकड़े भारतीय जनगणना में पंजाब में मुस्लिमों की आबादी के मुताबिक है। 1931 के आंकड़े आजादी से पहले के पंजाब प्रांत की है। जबकि 1941, 1951 और 1961 के आंकड़े विभाजन के बाद के भारतीय पंजाब राज्य के हैं।
बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी में जारी है गिरावट
पाकिस्तान के बाद हम बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी पर नजर डाले तो... बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी 1971 मे हुए भारत-पाकिस्तान बंटवारे से लेकर अब तक तेजी से गिरती जा रही है। अब वहां की जनसंख्या में हिंदुओं की हिस्सेदारी 10 फीसदी से भी कम रह गई है, हालांकि यह पाकिस्तान के मुकाबले काफी अधिक है। बांग्लादेश में 1951 में हिंदुओं की आबादी 22 फीसदी थी जो 2011 में मात्र 9.5 फीसदी रह गई। हालांकि कुल हिंदू आबादी 97 लाख से बढ़कर 1.27 करोड़ हो गई है। लेकिन हिंदुओं में जन्म दर कम होने की वजह से आबादी में ज्यादा वृद्धि नहीं हो रही है।
बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी
- 1931 - 29.4 फीसदी
- 1941 - 28.4 फीसदी
- 1951 - 22 फीसदी
- 1961 - 18.4 फीसदी
- 1971 - 13.6 फीसदी
- 1981 - 12.1 फीसदी
- 1991 - 10.5 फीसदी
- 2001 - 9.6 फीसदी
- 2011 - 9.5 फीसदी
बांग्लादेश में हिंदू-मुस्लिम की जनसंख्या
- 1951 में बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी 97 लाख और मुस्लिम तीन करोड़ 40 लाख थे।
- 1981 में बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी एक करोड़ ग्यारह लाख और मुस्लिम 7 करोड़ 79 लाख थे।
- 2011 में हिंदुओं की आबादी 1 करोड़ 27 लाख और मुस्लिम 13 करोड़ 54 लाख थे।
इससे बड़ी बात यह है कि भारत में हिंदुओं की आबादी में गिरावट आ रही है। भारत की जनसंख्या में हिंदुओं का अनुपात अभी 79.6 फीसदी है। एक रिसर्च अध्ययन के मुताबिक 2050 तक यह घटकर 76.7 फीसदी रह जाएगा।
वहीं मुस्लिमों की बात करे तो 1951 में हुए जनगणना मुताबिक इनकी संख्या तीन करोड़ 54 लाख थी। जो 2011 में बढ़कर 17 करोड़ 22 लाख हो गई। वहीं 2050 तक मुस्लिमों की जनसंख्या भारत की कुल आबादी का 18.4 फीसदी हो जाने का अनुमान है।