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Visa: हिंदी विदुषी फ्रांसेस्का ओरसिनी को भारत का वीजा नहीं, इस इतालवी महिला से जुड़ा विवाद क्या? जानिए सबकुछ
Wed, 22 Oct 2025 04:01 AM IST
लव गौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: लव गौर
Updated Wed, 22 Oct 2025 04:01 AM IST
सार
Hindi Scholar Francesca Orsini: प्रसिद्ध हिंदी विदुषी फ्रांसेस्का ओरसिनी को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर प्रवेश करने से रोका। इसके बाद उन्होंने वापस भेजा गया। जिसके कुछ घंटों बाद सरकारी सूत्रों ने पुष्टि की है कि भारतीय अधिकारियों ने उन्हें उनके पर्यटक वीजा की शर्तों का कथित रूप से उल्लंघन करने के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
प्रसिद्ध हिंदी विदुषी फ्रांसेस्का ओरसिनी को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर प्रवेश से रोका गया। उनको वापस भेजे जाने के कुछ ही घंटों बाद सरकार के सूत्रों ने पुष्टि की है कि उन्हें भारत के अधिकारियों द्वारा ब्लैकलिस्ट किया गया है, क्योंकि उन्होंने अपने टूरिस्ट वीजा की शर्तों का कथित रूप से उल्लंघन किया।
मार्च 2025 से ब्लैकलिस्ट किया
इस घटनाक्रम से अवगत अधिकारियों ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि फ्रांसेस्का ओरसिनी को इससे पहले मार्च 2025 में भारत की ब्लैकलिस्ट में डाला गया था, जब यह पाया गया था कि उन्होंने अपनी पिछली यात्रा के दौरान अपने वीजा की शर्तों के अनुरूप गतिविधियां नहीं की थीं। सूत्र ने कहा, “फ्रांसेस्का ओरसिनी टूरिस्ट वीजा पर थीं, लेकिन वीजा की शर्तों का उल्लंघन पाया गया। इन्हें इन उल्लंघनों के कारण मार्च 2025 से ब्लैकलिस्ट किया गया है।”
सूत्रों ने यह भी बताया कि वीजा उल्लंघन के कारण विदेशियों को ब्लैकलिस्ट करना वैश्विक प्रचलन है और कई देशों द्वारा अपनाया जाता है ताकि इमिग्रेशन नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा, "यदि कोई व्यक्ति वीज़ा शर्तों का उल्लंघन करता है, तो उसे ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।"
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भारतीय कानून के तहत देश में आने वाले विदेशी नागरिकों को अपने वीजा में उल्लिखित श्रेणी और उद्देश्य का सख्ती से पालन करना होता है। पर्यटक वीजा धारकों को भारत में रहते हुए पेशेवर कार्य, शोध, मिशनरी गतिविधियां या किसी भी प्रकार का रोजगार करने से प्रतिबंधित किया गया है। ब्लैकलिस्टिंग का मतलब है कि उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर व्यक्ति को निर्धारित अवधि या स्थायी रूप से देश में प्रवेश से रोका जा सकता है। यह प्रक्रिया गृह मंत्रालय और इमिग्रेशन अधिकारियों के समन्वय से होती है।
हांगकांग से दिल्ली पहुंची थी ओरसिनी
ओरसिनी, जो लंदन विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज (SOAS) में प्रोफेसर एमेरिटा हैं, उनके पास मान्य 5 वर्षीय ई-वीजा था, लेकिन उन्हें तुरंत देश वापस भेज दिया गया। वो 20 अक्टूबर की रात हांगकांग से दिल्ली पहुंची थी, जहां वे चीन में एक अकादमिक सम्मेलन में शामिल हुई थीं। एयरपोर्ट पर आने पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने उन्हें रोका और कहा कि उन्हें तुरंत निर्वासित किया जाएगा और उन्हें अपनी वापसी की यात्रा की व्यवस्था करनी होगी।
उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान दोस्तों से मिलने की योजना बनाई थी और आखिरी बार अक्टूबर 2024 में भारत की यात्रा की थी। ओरसिनी ने अपने जीवन को हिंदी भाषा और साहित्य के अध्ययन के लिए समर्पित किया है। उन्होंने SOAS, लंदन विश्वविद्यालय में कई वर्षों तक उल्लेखनीय सेवा की है और अब प्रोफेसर एमेरिटा के पद पर हैं।
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मार्च 2025 से ब्लैकलिस्ट किया
इस घटनाक्रम से अवगत अधिकारियों ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि फ्रांसेस्का ओरसिनी को इससे पहले मार्च 2025 में भारत की ब्लैकलिस्ट में डाला गया था, जब यह पाया गया था कि उन्होंने अपनी पिछली यात्रा के दौरान अपने वीजा की शर्तों के अनुरूप गतिविधियां नहीं की थीं। सूत्र ने कहा, “फ्रांसेस्का ओरसिनी टूरिस्ट वीजा पर थीं, लेकिन वीजा की शर्तों का उल्लंघन पाया गया। इन्हें इन उल्लंघनों के कारण मार्च 2025 से ब्लैकलिस्ट किया गया है।”
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सूत्रों ने यह भी बताया कि वीजा उल्लंघन के कारण विदेशियों को ब्लैकलिस्ट करना वैश्विक प्रचलन है और कई देशों द्वारा अपनाया जाता है ताकि इमिग्रेशन नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा, "यदि कोई व्यक्ति वीज़ा शर्तों का उल्लंघन करता है, तो उसे ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।"
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भारतीय कानून के तहत देश में आने वाले विदेशी नागरिकों को अपने वीजा में उल्लिखित श्रेणी और उद्देश्य का सख्ती से पालन करना होता है। पर्यटक वीजा धारकों को भारत में रहते हुए पेशेवर कार्य, शोध, मिशनरी गतिविधियां या किसी भी प्रकार का रोजगार करने से प्रतिबंधित किया गया है। ब्लैकलिस्टिंग का मतलब है कि उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर व्यक्ति को निर्धारित अवधि या स्थायी रूप से देश में प्रवेश से रोका जा सकता है। यह प्रक्रिया गृह मंत्रालय और इमिग्रेशन अधिकारियों के समन्वय से होती है।
हांगकांग से दिल्ली पहुंची थी ओरसिनी
ओरसिनी, जो लंदन विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज (SOAS) में प्रोफेसर एमेरिटा हैं, उनके पास मान्य 5 वर्षीय ई-वीजा था, लेकिन उन्हें तुरंत देश वापस भेज दिया गया। वो 20 अक्टूबर की रात हांगकांग से दिल्ली पहुंची थी, जहां वे चीन में एक अकादमिक सम्मेलन में शामिल हुई थीं। एयरपोर्ट पर आने पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने उन्हें रोका और कहा कि उन्हें तुरंत निर्वासित किया जाएगा और उन्हें अपनी वापसी की यात्रा की व्यवस्था करनी होगी।
उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान दोस्तों से मिलने की योजना बनाई थी और आखिरी बार अक्टूबर 2024 में भारत की यात्रा की थी। ओरसिनी ने अपने जीवन को हिंदी भाषा और साहित्य के अध्ययन के लिए समर्पित किया है। उन्होंने SOAS, लंदन विश्वविद्यालय में कई वर्षों तक उल्लेखनीय सेवा की है और अब प्रोफेसर एमेरिटा के पद पर हैं।