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नई शिक्षा नीति में हिंदी के अनिवार्य होने की खबरों का मंत्री जावड़ेकर ने किया खंडन

Thu, 10 Jan 2019 09:45 AM IST
Shani Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shani Mishra Updated Thu, 10 Jan 2019 09:45 AM IST
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Hindi must be mandatory till class 8th says new education policy
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आठवीं क्लास तक हिंदी को अनिवार्य बनाते हुए तीन भाषाई फॉर्मूला, पूरे देश में विज्ञान और गणित का एक समान सिलेबस, जनजातीय समूहों के लिए अलग देवनागरी उपभाषा और हुनर आधारित शिक्षा- यह कुछ मुख्य सिफारिशें हैं जो के. कस्तूरीरंगन की अगुवाई वाली नौ सदस्यीय समिति ने रिपोर्ट में सौंपी है।

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सूत्रों के मुताबिक इस कमेटी ने 31 दिसंबर 2018 को अपना कार्यकाल समाप्त होने से पहले पिछले महीने ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय को सौंप दी है। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि रिपोर्ट तैयार है और कमेटी के सदस्यों ने मुझसे मिलने का समय मांगा था। संसद सत्र के बाद रिपोर्ट मुझे मिलेगी। सूत्रों के मुताबिक सरकार इस पॉलिसी को सार्वजनिक कर इसपर सुझाव मांग सकती है।
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हालांकि मानव संसाधन विकास मंत्री जावड़ेकर ने हिंदी को अनिवार्य किए जाने की खबरों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि कमेटी ने किसी भी भाषा को अनिवार्य करने की सिफारिश नहीं की है।
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बताया जा रहा है कि सामाजिक विज्ञान के अंतर्गत आनेवाले विषयों में स्थानीय चीजें होंगी जबकि सभी बोर्ड में विज्ञान और गणित का एक ही सिलेबस होगा, भले ही विज्ञान और गणित किसी भी भाषा में पढ़ाया जाए। सूत्रों के मुताबिक नई शिक्षा नीति में पांचवीं क्लास तक अवधी, भोजपुरी और मैथली जैसी स्थानीय भाषाओं का भी सिलेबस बनाने को कहा गया है। साथ ही उन जनजातीय इलाकों में जहां लेखन की कोई लिपि नहीं है या मिशनरियों के प्रभाव के कारण रोमन लिपि का उपयोग होता है वहां देवनागरी लिपि का विस्तार करने की बात कही गई है। यह शिक्षण नीति एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था की बात करती है जिसके केंद्र में भारत हो।

नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट तीन भाषाई नीति के साथ-साथ आठवीं क्लास तक हिंदी को अनिवार्य करने की वकालत करता है। वर्तमान में गैर हिंदी भाषी राज्यों तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, गोवा, पश्चिम बंगाल और असम में में हिंदी अनिवार्य नहीं है।

सूत्रों के मुताबिक अगस्त 2018 के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय से मिले सुझावों और मैराथन चर्चा के बाद नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट तैयार किया गया है। इसके अलावा पैनल ने सात राज्यों के प्रतिनिधि और मानव संसाधन मंत्री प्रकश जावड़ेकर से भी चर्चा की है। सूत्रों की मानें तो 20 दिसंबर को दिल्ली में आरएसएस संस्थानों के शिक्षा समूह में भी इसको लेकर चर्चा हुई थी। अक्टूबर में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी नई शिक्षा नीति में हो रही देरी पर चिंता जाहिर की थी। 2015 के आरएसएस के अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में भी प्राथमिक शिक्षा स्थानीय भाषा में कराने को लेकर प्रस्ताव पास हुआ था।

पिछली शिक्षा नीति 1986 में लाई गई थी जिसमें 1992 में बदलाव किए गए थे। शिक्षा नीति के आधार पर ही 2005 में राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा तैयार किया गया था जिसे दस साल बाद फिर से जारी होना था मगर एनडीए सरकार ने नई शिक्षा नीति लाने का फैसला किया।

कमेटी का हिस्सा थे यह लोग 

इसरो प्रमुख कस्तूरीरंगन के अलावा इस कमेटी में मुंबई की शिक्षाविद वसुधा कामत, केंद्रीय राज्यमंत्री ए.जे. अल्फोंस, प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और गणितज्ञ मंजुल भार्गव, बाबा साहेब आंबेडकर यूनिवर्सिटी ऑफ सोशल साइंस इंदौर के पूर्व वाइस चांसलर राम शंकर कुरील, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय यूनिवर्सिटी अमरकंटक के पूर्व वाइस चांसलर टीवी कट्टीमनी, यूपी इंटरमीडिएट एजुकेशन के पूर्व निदेशक कृष्ण मोहन त्रिपाठी, गुवाहाटी के गणितज्ञ मजहर आसिफ और शिक्षाविद एम.के श्रीधर शामिल थे। 
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