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Himachal Election: अग्निवीर और बागियों से भाजपा को परेशानी, कांग्रेस जीती तो चमकेंगी प्रियंका गांधी

Fri, 11 Nov 2022 06:40 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Fri, 11 Nov 2022 06:40 PM IST
सार

Himachal Election: पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में भाजपा को अपनी ही पार्टी के बागियों से बड़ी चुनौती झेलनी पड़ रही है। प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा के गृह जिलों में भी पार्टी को बगावत का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश की 68 सीटों में लगभग हर तीसरी सीट पर पार्टी के बागी चुनावी मैदान में हैं...

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Himachal Election: Agniveer and rebels could create trouble for BJP, congress depends on Priyanka Gandhi
Himachal Election - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव (Himachal Election 2022) के लिए शनिवार 12 नवंबर को मतदान होगा। सत्तारूढ़ भाजपा दोबारा सत्ता में लौटकर एक नया इतिहास रचने की कोशिश में है, तो विपरीत परिस्थितियों में वापसी की कोशिश कर रही कांग्रेस को हिमाचल प्रदेश प्रदेश के हर बार सत्ता बदलने के इतिहास पर भरोसा है। राज्य में भाजपा को अपनी ही पार्टी के बाग़ी नेताओं और अग्निवीर योजना से नाराज युवाओं के गुस्से का शिकार होना पड़ सकता है, तो कांग्रेस को बड़े नेताओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि कांग्रेस जीती तो इससे प्रियंका गांधी का राजनीतिक कद बढ़ जाएगा। यह कांग्रेस की वापसी में एक बूस्टर डोज साबित हो सकता है।

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पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में भाजपा को अपनी ही पार्टी के बागियों से बड़ी चुनौती झेलनी पड़ रही है। प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा के गृह जिलों में भी पार्टी को बगावत का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश की 68 सीटों में लगभग हर तीसरी सीट पर पार्टी के बागी चुनावी मैदान में हैं। इससे पार्टी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई अन्य सीटों पर पार्टी के अंदर ही गुटबाजी के कारण भाजपा को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

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राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि पार्टी के हिमाचल प्रदेश से जुड़े दो केंद्रीय नेताओं के बीच में आपस में खींचतान बढ़ गई है। दोनों ही खेमे पार्टी संगठन में अपने-अपने लोगों को आगे बढ़ाने की जुगत भिड़ा रहे हैं। पार्टी ने जयराम ठाकुर को चेहरा बनाकर ही चुनावी मैदान में कूदी है, लेकिन बावजूद इसके पार्टी के इस निर्णय पर कुछ नेताओं को असंतोष है। शीर्ष नेताओं का ‘मनभेद’ कार्यकर्ताओं में खेमेबाजी के रूप में सामने आ रहा है जिसका पार्टी को नुकसान हो सकता है।      

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अग्निवीर से युवाओं में भारी नाराजगी

कांगड़ा के रहने वाले अविनाश शर्मा ने अमर उजाला को बताया कि अग्निवीर योजना को लेकर यहां युवाओं में भारी नाराजगी है। अब तक 16 साल से 25 साल तक का हर युवा फ़ौज में जाने का सपना देखता था, लेकिन अग्निवीर योजना आने से युवाओं को अपने सपने ध्वस्त होते दिख रहे हैं। यही कारण है कि युवाओं में भाजपा के लिए बहुत नाराजगी है और पार्टी को इसका नुकसान हो सकता है।

उत्तराखंड जैसी उम्मीद- भाजपा

भाजपा के एक शीर्ष नेता ने अमर उजाला से कहा कि अग्निवीर योजना की घोषणा के बाद यूपी-उत्तराखंड सहित पांच राज्यों के चुनाव हो चुके हैं और भाजपा इनमें से चार राज्यों में भारी मतों से जीतकर सत्ता में वापस आ चुकी है। ऐसे में उन्हें भरोसा है कि हिमाचल प्रदेश में भी युवा उसके साथ बने रहेंगे। नेता ने कहा कि उत्तराखंड की सामाजिक पृठभूमि लगभग हिमाचल प्रदेश जैसी ही है। यहां भी युवाओं के लिए सेना की नौकरी रोजगार का सबसे बड़ा साधन होती है। लेकिन इसके बाद भी युवाओं ने पीएम नरेंद्र मोदी की राष्ट्र हित के लिए लिए गए निर्णय से सहमति जताई। उन्हें पूरा विश्वास है कि हिमाचल प्रदेश में भी युवा उनके साथ रहेंगे।   

पुरानी पेंशन की घोषणा से कांग्रेस को लाभ की उम्मीद

रिटायर होने के बाद लोगों की जिंदगी पेंशन के पैसे से चलती है। लेकिन नई पेंशन योजना आने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। कांग्रेस ने पुरानी पेंशन योजना लागू करने की घोषणा कर लाखों पेंशनधारक परिवारों को अपने साथ खींच लिया है। चूंकि, कांग्रेस ने राजस्थान और छत्तीसगढ़ में इस योजना को लागू भी कर दिया है, लिहाजा उसके वादे की विश्वसनीयता भी बढ़ गई है। माना जा रहा है कि भाजपा को इसका बड़ा नुकसान हो सकता है।

प्रियंका बनेंगी बड़ी स्टार

राजनीतिक विश्लेषक सुनील पांडेय ने अमर उजाला से कहा कि कांग्रेस इस समय बड़े और विश्वसनीय चेहरों की कमी से जूझ रही है। गांधी परिवार से होने के कारण प्रियंका का राजनीतिक कद पहले भी बड़ा था, लेकिन राजनीतिक मंच पर अब तक वे ऐसा कोई प्रदर्शन नहीं कर पाई हैं जिससे वे एक बड़े, विश्वसनीय और जिताऊ नेता के तौर पर स्थापित हो सकें। यूपी विधानसभा की पूर्ण जिम्मेदारी मिलने के बाद भी कांग्रेस के कुछ न कर पाने से उनके ऊपर एक बड़ा दाग लग गया है।

लेकिन हिमाचल प्रदेश में पार्टी के लिए बहुत अनुकूल परिस्थितियां हैं। यदि यहां पार्टी बड़ी जीत हासिल करने में सफल रहे तो किसी को आश्चर्य नहीं होगा। हिमाचल प्रदेश में जीत मिलने से केवल कांग्रेस को ही लाभ नहीं होगा, इससे प्रियंका गांधी बड़े नेता के तौर पर भी उभरेंगी। इससे आने वाले समय में दूसरे राज्यों के चुनावों के लिए कांग्रेस को एक बड़ा चेहरा मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे राहुल गांधी को अपना साथ निभाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक भरोसेमंद सहयोगी मिल जाएगा जिससे पार्टी को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

राजीव शुक्ला भी उभरेंगे

अहमद पटेल ने कांग्रेस में जो स्थान खाली किया है, अब तक उसे कोई नेता भर नहीं पाया है। गुलाम नबी आज़ाद और कपिल सिब्बल आनंद शर्मा जैसे चेहरे अब अपनी राह पकड़ चुके हैं, तो पार्टी के अंदर दिग्विजय सिंह जैसे अन्य वरिष्ठ नेता वह मुकाम हासिल नहीं कर सके हैं पार्टी को जिसकी आवश्यकता है।

लेकिन इसी बीच राजीव शुक्ला पार्टी के लिए अहम भूमिका निभा रहे हैं। बेहद शांत और मृदुभाषी राजीव शुक्ल अन्य पार्टियों से बातचीत करने और रणनीतिक जोड़तोड़ में भी माहिर हैं। चूंकि, हिमाचल प्रदेश में पार्टी की रणनीति तय करने में उन्होंने सबसे प्रमुख भूमिका निभाई है, प्रियंका गांधी का बेहतर उपयोग करते हुए उन्होंने हिमाचल में पिछड़ रहे चुनाव को ऊंचाई तक पहुंचाया है, हिमाचल में जीत से उनका कद बढ़ेगा। प्रियंका गांधी से उनके करीबी संबंध उन्हें पार्टी के नए अहमद पटेल की भूमिका में लाने में मदद कर सकते हैं। यह राजीव शुक्ल, प्रियंका गांधी और कांग्रेस सबके हित में होगा।

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