{"_id":"57f4bb9a4f1c1bc332270fec","slug":"high-security-planning-decided-for-military-complexs","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सैन्य परिसरों में बिना इजाजत के परिंदा भी नहीं मार सकेगा पर","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
सैन्य परिसरों में बिना इजाजत के परिंदा भी नहीं मार सकेगा पर
शशिधर पाठक
Updated Wed, 05 Oct 2016 02:06 PM IST
विज्ञापन
Air Chief Marshal
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हमारी नींद किसी हादसे के बाद टूटती है। यह कहावत वायुसेना और भारतीय सेना पर बिल्कुल फिट रही है। यही उड़ी और पठानकोट पर हुए आतंकी हमले से सबक लेते हुए नौसेना ने भी सेना और वायुसेना की तरह सैन्य परिसरों की सुरक्षा को लेकर स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर को चपस्त दुरुस्त बनाना शुरू कर दिया है। सूत्र बताते हैं कि जिस तरह से सैन्य परिसरों की सुरक्षा का खाका तैयार हो रहा है, उससे आने वाले समय में परिंदा भी बिना इजाजत के पर नहीं मार सकेगा।
विज्ञापन
सैन्य सूत्रों के अनुसार इसके लिए तीनों सेनाएं अपने स्तर पर समीक्षा करके सैन्य परिसरों की सुरक्षा को दुरुस्त कर रही हैं। हालांकि सैन्य बल समय-समय पर एसओपी की समीक्षा करके उसमें बदलाव करते रहे हैं, लेकिन इस साल की दोनों बड़ी आतंकी घटनाओं के बाद केन्द्र सरकार और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सचिवालय ने इसे काफी प्रमुखता से लिया है। उच्चस्तर पर सैन्य बलों को सैन्य परिसरों की सुरक्षा को चुस्त-दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन
पठानकोट पर सीमापार से आए फिदायीन आतंकियों के हमले के बाद से ही वायुसेना ने यह तैयारी शुरू कर दी थी। सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ-साथ पूरे देश के वायुसैनिक अड्डों, सैन्य परिसरों के लिए नए स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर(एसओपी) लागू हो गए हैं।
विज्ञापन
वायुसेनाध्यक्ष ने कहा
Air Chief Marshal
-वायुसेनाध्यक्ष एयरचीफ मार्शल अरुप राहा के अनुसार पठानकोट वायुसैनिक अड्डे की सुरक्षा को काफी चुस्त कर दिया गया है। वायुसैनिक अड्डे की सीसीटीवी नेटवर्क, इलेक्ट्रानिक उपकरणों, सेंसरों, इंफ्रारेड तकनीक आधारित सेंसरों के जरिए निगरानी की जा रही है।
-लो-फ्लाइंग आब्जेक्ट द्वारा होने वाले हमलों को ध्यान में रखकर भी वायुसेना ने तमाम उपाय शुरू किए हैं। इसके अलावा निगरानी के लिए यूएवी आदि के उपयोग को बढ़ाने का निर्णय लिया है। वायुसैनिक अड्डे की चहरदीवारी के ऊपर की फेंसिंग को ठीक किया गया है तथा बाऊंड्रीवाल के पास के ऊंचे पेड़ों की कटाई-छंटाई की गई है। झाडिय़ों, सरकंडों के जंगल की भी सफाई हुई है और सैन्य परिसर की जमीन, आसमान से भी सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।
आतंकी घुसपैठ और हमले की आशंका को देखते हुए वायुसैनिक अड्डे के प्रवेश द्वार को भी चुश्त-दुरुस्त किया है। सुरक्षा में तैनात डीएससी के जवानों को भी उच्च स्तर का प्रशिक्षण दिया गया है। ताकि इस तरह के हमलों की दशा में पठानकोट हमले जैसी कोई चूक न हो। वायुसेना ने गोलीबारी की स्थिति में अपने विशेष कमांडो दस्ते के आपरेशन शुरू करने की औपचारिकताओं को भी आसान बनाया है। ताकि समय रहते आतंकियों को मार गिराया जा सके।
-लो-फ्लाइंग आब्जेक्ट द्वारा होने वाले हमलों को ध्यान में रखकर भी वायुसेना ने तमाम उपाय शुरू किए हैं। इसके अलावा निगरानी के लिए यूएवी आदि के उपयोग को बढ़ाने का निर्णय लिया है। वायुसैनिक अड्डे की चहरदीवारी के ऊपर की फेंसिंग को ठीक किया गया है तथा बाऊंड्रीवाल के पास के ऊंचे पेड़ों की कटाई-छंटाई की गई है। झाडिय़ों, सरकंडों के जंगल की भी सफाई हुई है और सैन्य परिसर की जमीन, आसमान से भी सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।
आतंकी घुसपैठ और हमले की आशंका को देखते हुए वायुसैनिक अड्डे के प्रवेश द्वार को भी चुश्त-दुरुस्त किया है। सुरक्षा में तैनात डीएससी के जवानों को भी उच्च स्तर का प्रशिक्षण दिया गया है। ताकि इस तरह के हमलों की दशा में पठानकोट हमले जैसी कोई चूक न हो। वायुसेना ने गोलीबारी की स्थिति में अपने विशेष कमांडो दस्ते के आपरेशन शुरू करने की औपचारिकताओं को भी आसान बनाया है। ताकि समय रहते आतंकियों को मार गिराया जा सके।
उड़ी हमले के बाद
Uri Attacks
सेना उड़ी में एडम बेस पर हुए आतंकी हमले की समीक्षा का काम करीब-करीब पूरा कर चुकी है। सेना मुख्यालय के सूत्र बताते हैं कि इस दौरान कुछ खामियां पाई गई हैं और उसे दूर करने के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। समझा जा रहा है सेना ने एडम बेस और ब्रिगेड हेडक्वार्टर समेत अन्य परिसरों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी नेटवर्क, इलेक्ट्रानिक उपकरणों, सेंसरों आदि की उपयोगिता बढ़ाने पर विचार कर रही है।
सेना और वायुसेना की तरह ही नौसेना ने भी अपने परिसरों की सुरक्षा को लेकर विशेष ध्यान देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नौसेना ने तटरक्षक बल के सात तालमेल बनाकर लगातार समुद्री क्षेत्र की निगरानी के साथ-साथ समुद्री क्षेत्र से संभावित हमलों की आशंका को ध्यान में रखकर फुलप्रूफ सेक्योरिटी पर जोर दिया है।
सैन्य सूत्र बताते हैं कि रक्षा क्षेत्र की चुनौतियों को ध्यान में रखकर मानव रहित टोही और हमला करने में सक्षम मानव रहित विमानों की मांग बढ़ेगी। तीनों सेनाओं ने पहले से ही इसकी जरूरत पर जोर दिया है और आने वाले समय में निगरानी के लिए इस फ्लाइंग मशीन की भूमिका बढऩे वाली है।
सेना और वायुसेना की तरह ही नौसेना ने भी अपने परिसरों की सुरक्षा को लेकर विशेष ध्यान देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नौसेना ने तटरक्षक बल के सात तालमेल बनाकर लगातार समुद्री क्षेत्र की निगरानी के साथ-साथ समुद्री क्षेत्र से संभावित हमलों की आशंका को ध्यान में रखकर फुलप्रूफ सेक्योरिटी पर जोर दिया है।
सैन्य सूत्र बताते हैं कि रक्षा क्षेत्र की चुनौतियों को ध्यान में रखकर मानव रहित टोही और हमला करने में सक्षम मानव रहित विमानों की मांग बढ़ेगी। तीनों सेनाओं ने पहले से ही इसकी जरूरत पर जोर दिया है और आने वाले समय में निगरानी के लिए इस फ्लाइंग मशीन की भूमिका बढऩे वाली है।