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आंख खराब होने के मामले में पीड़ितों का पूरा खर्च उठाए बीएचयू: हाईकोर्ट

Sat, 02 Apr 2016 01:59 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, इलाहाबाद
ब्यूरो/ अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Sat, 02 Apr 2016 01:59 PM IST
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High court strict on blind eye issue, says BHU will bear all expenses of patients
डॉक्टर की लापरवाही से चली गई थी मरीजों के आंख की रोशनी - फोटो : Getty

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में गलत इलाज से सात मरीजों की आंख खराब होने के मामले में हाईकोर्ट ने कुलपति को निर्देश दिया है कि वह पीड़ितों का इलाज एसजीपीजीआई में कराएं। कोर्ट ने कहा कि यदि पीड़ित तैयार हों तो उनका इलाज पीजीआई में कराया जाए और इसका पूरा खर्च विश्वविद्यालय उठाएगा। यह भी साफ किया कि मरीजों के पीजीआई आने-जाने का खर्च भी बीएचयू ही उठाएगा। विधि छात्रा दीक्षा द्विवेदी और अन्य द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार से इस मामले की जांच रिपोर्ट मांगी है।

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इसके अलावा बीएचयू को निर्देश दिया है कि वह स्वतंत्र विशेषज्ञों की टीम से इस घटना की अलग से जांच कराएं। हालांकि कोर्ट को बताया गया कि बीएचयू ने घटना की जांच के लिए एक कमेटी बना दी है जिसने अपनी रिपोर्ट भी दी है। इन सभी निर्देशों का पालन कर दो सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जबकि इलाज के लिए एक सप्ताह की मोहलत दी है।
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उल्लेखनीय है कि बीएचयू के सर सुंदर लाल अस्पताल में ‘अवेस्टीन’ नामक इंजेक्शन लगाने से सात मरीजों की आंख की रोशनी चली गई। इस घटना को लेकर काफी बवाल मचा था। बीएचयू ने घटना की जांच के लिए समिति गठित कर दी। विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि आंख की रोशनी इंजेक्शन की वजह से जा सकती है। इंजेक्शन बेहद कम कीमत और क्वालिटी का था। बीएचयू के अधिवक्ता ने बताया कि पांच मरीजों की आंख इलाज के बाद अब ठीक हो रही है जबकि दो मरीज शंकर नेत्रालय चेन्नई में इलाज करा रहे हैं। कोर्ट ने अगली सुनवाई 22 अप्रैल को प्रदेश सरकार और बीएचयू को रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। याचिका में अखबारों में प्रकाशित समाचारों को आधार बताते हुए कहा गया कि गरीब मरीजों को डॉक्टरों की लापरवाही से गलत इंजेक्शन लगाया गया, जिससे उनकी आंख खराब हो गई और अब उनका इलाज भी नहीं कराया जा रहा है।

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