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हाईकोर्ट के जज महज 5 मिनट में कर देते हैं एक केस का फैसला

Thu, 07 Apr 2016 05:32 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 07 Apr 2016 05:32 PM IST
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High Court judges get just 5-6 minutes to decide cases, says study
अदालतों में लंबित पड़े हैं लाखों मामले - फोटो : Getty

देश की अदालतों में लगातार बढ़ते मामलों और न्यायाधीशों की कमी को लेकर एक नया शोध सामने आया है। इस रिपोर्ट में पहली बार न्यायिक प्रक्रिया के समय जजों की कठिन कार्यप्रणाली का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक हाईकोर्ट के जजों के पास किसी भी मामले की सुनवाई के लिए पांच मिनट से भी कम समय होता है।

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टीओआई के मुताबिक इस रिपोर्ट में जजों की संख्यात्मक एनालिसिस का आधार बनाते हुए उन पर काम के दबाव को दिखाने की कोशिश की गई है। यह शोध 'दक्ष' नामक एक सामाजिक संगठन ने कराया है। बेंगलुरु स्थित इस संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, 'किसी हाईकोर्ट के सबसे ज्यादा व्यस्ततम जज के पास एक सुनवाई के लिए औसतन ढाई मिनट का समय और सबसे ज्यादा आरामदायक जज के पास अधिकतम 15 से 16 मिनट का समय होता है।'
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रिपोर्ट के मुताबिक देश की 21 हाईकोर्ट में सबसे व्यस्ततम कलकत्ता हाईकोर्ट है जहां एक जज प्रतिदिन करीब 163 मामलों की सुनवाई करता है जिसमें करीब साढ़े पांच घंटे का वक्त लगता है। प्रत्येक सुनवाई के लिए जज को महज दो मिनट का समय मिलता है।

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हाईकोर्ट में 594 जज हैं जबकि सुप्रीम कोर्ट में 25 जज

High Court judges get just 5-6 minutes to decide cases, says study
महज तीन मिनट में एक मामले की हो जाती है सुनवाई - फोटो : Getty

कलकत्ता हाईकोर्ट के बाद पटना, हैदराबाद, झारखंड और राजस्थान हाईकोर्ट का नंबर आता है जहां जजों को प्रतिदिन हर सुनवाई के लिए महज दो से तीन मिनट का समय मिलता है। वहीं इलाहाबाद, गुजरात, कर्नाटक, मध्यप्रदेश और उड़ीसा के हाईकोर्ट जजों को प्रत्येक सुनवाई के लिए 4 से 6 मिनट का वक्त मिलता है।

दक्ष संस्था के सह-संस्थापक किशोर मंडयम ने बताया कि देश के 21 हाईकोर्ट में जनवरी 2015 से अब तक करीब 19 लाख मामले आए। इस दौरान 95 लाख बार सुनवाई हुई। उनके मुताबिक, 'समय की कमी की वजह से हाईकोर्ट के जज अपने दिमाग का इस्तेमाल अच्छी तरह से निर्णय लेने में नहीं कर पाते। उनका ज्यादा समय भारी संख्या में लंबित मामले और अगले दिन होने वाली सुनवाईयों को सूचीबद्ध करने में समाप्त हो जाता है।'

1 अप्रैल 2016 तक के आंकड़ो पर गौर किया जाए तो देश के तमाम हाईकोर्ट में 594 जज हैं जबकि सुप्रीम कोर्ट में 25 जज कार्यरत हैं। इसके तहत देश की शीर्ष अदालतों में फिलहाल 619 जज तैनात है जो सवा अरब आबादी वाले देश के मामलों की सुनवाई करते हैं। यह आंकड़ा इस बात का गवाह है कि सवा करोड़ की आबादी के मुकाबले जजों की संख्या कितनी कम है।

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