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मी टू के समर्थन में हाईकोर्ट के जज बोले- अनुभव बताने वाली महिलाओं का करता हूं समर्थन

Fri, 12 Oct 2018 02:56 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 12 Oct 2018 02:56 PM IST
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High Court judge supports Me Too campaign and said judiciary also plagued with it
बॉम्बे उच्च न्यायालय

बॉम्बे उच्च न्यायालय के जज देश में चल रहे मी टू अभियान के समर्थन में आए हैं। उन्होंने कहा कि पितृसत्तात्मक समाज महिलाओं को खुलकर बोलने की इजाजत नहीं देता है। जस्टिस पटेल ने गुरुवार को कहा कि वह उन महिलाओं का पूरी तरह से समर्थन करते हैं जिन्होंने यौन शोषण को लेकर अपने अनुभवों को और अपने आरोपियों का नाम साझा करने का फैसला लिया है।

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इंडियन मर्चेंट चेंबर की महिला विंग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए जस्टिस पटेल ने अमेरिकी अभिनेता और कॉमेडियन बिल कॉस्बी का जिक्र किया। जिन्हें पिछले महीने यौन शोषण के 14 साल पुराने मामले में दोषी पाया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कॉस्बी के मामले में सबूत इकट्ठा किए गए और कानून की प्रक्रिया का पालन किया गया।
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जस्टिस पटेल ने कहा कि भारतीय अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन मामलों में कानून की प्रक्रिया का पालन हो जिसमें महिलाएं शोषित करने वालों का नाम बता रही हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई चाहती हैं। उन्होंने कहा, 'मैं उन महिलाओं का पूरी तरह से समर्थन करता हूं जो सामने आकर बोलने की हिम्मत कर रही हैं क्योंकि किसी भी समय इसपर बोलने के लिए काफी हौसले की जरूरत है।' 
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उन्होंने कहा, ‘अब हमें इस पर चर्चा करने की आवश्यकता है कि पूरी तरह इस छिन्न भिन्न और हास्यास्पद बन चुकी व्यवस्था से कैसे निजात पाई जाए और हमें ही इसकी पहचान करनी है।' जस्टिस पटेल ने कहा कि न्यायपालिका में भी बड़े पैमाने पर इस तरह की घटनाएं हो रही हैं और यह भी पितृसत्तात्मक संस्कृति से घिरी हुई हैं।


पटेल ने इस दौरान अदालतों में बढ़ते बोझ की तरफ भी ध्यान आकर्षित कराने की कोशिश की जो देश की न्यायपालिका के समक्ष एक अन्य समस्या है। उन्होंने कहा, ‘दिसंबर 2019 तक बंबई उच्च न्यायालय के 11 न्यायाधीश अवकाश ग्रहण करेंगे और अभी केवल चार नामो को अंतिम रूप दिया गया है । हम एक बड़ी समस्या का सामना करने जा रहे हैं।’

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