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हाईकोर्ट : नर्सरी में दाखिले टालने पर विचार करे दिल्ली सरकार
Mon, 11 Jan 2021 05:37 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Mon, 11 Jan 2021 05:37 PM IST
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दिल्ली सरकारी स्कूल
- फोटो : Atishi Facebook
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दिल्ली हाईकोर्ट ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर 2021-22 के शैक्षणिक सत्र में नर्सरी की कक्षाओं में दाखिले टालने पर विचार करने को कहा है। इस संबंध में एक वकील ने आवेदन किया है।
न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील का बयान दर्ज किया कि नर्सरी में दाखिले के संबंध में किसी भी फैसले के पहले याचिकाकर्ता द्वारा मुहैया कराई गई सूचना या राय पर विचार किया जाएगा। हाईकोर्ट ने कहा कि उसने याचिका के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
याचिकाकर्ता सह वकील रजत वत्स द्वारा आदेश पर संतोष जताने के बाद याचिका का निपटारा कर दिया गया। वत्स ने कहा कि उन्होंने पिछले साल 12 दिसंबर को प्राधिकारों के सामने आवेदन दिया था, लेकिन उस पर अब तक कोई जवाब नहीं आया है, इसलिए उन्होंने अदालत का रुख किया। सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के स्थायी वकील रमेश सिंह ने कहा कि आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए नर्सरी या प्रवेश स्तर पर दाखिले के लिए सरकार ने अब तक कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किया है।
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निजी स्कूलों ने शुरू की प्रक्रिया
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि दिशा-निर्देश जारी हुए बिना ही कुछ निजी स्कूलों ने नर्सरी में दाखिले की शुरू कर दी है। याचिका में कहा गया, ‘‘नर्सरी कक्षा में दाखिले के संबंध में तीन-चार साल के बच्चों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए कुछ निर्देश जारी करना जरूरी है। ऐसा इसलिए कि दिल्ली सरकार बच्चों के हितों पर विचार किए बिना स्कूल प्रबंधनों को वित्तीय फायदा पहुंचाने के लिए प्रत्यक्ष या ऑनलाइन कक्षाओं की अनुमति दे सकती है।’’ याचिका में कहा गया कि नर्सरी शिक्षा का मकसद बच्चों को स्कूल के वातावरण और कक्षाओं से अवगत कराना है और ऑनलाइन पाठ्यक्रमों या स्कूलों को खोलकर यह उद्देश्य पूरा नहीं होने वाला है।
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न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील का बयान दर्ज किया कि नर्सरी में दाखिले के संबंध में किसी भी फैसले के पहले याचिकाकर्ता द्वारा मुहैया कराई गई सूचना या राय पर विचार किया जाएगा। हाईकोर्ट ने कहा कि उसने याचिका के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
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याचिकाकर्ता सह वकील रजत वत्स द्वारा आदेश पर संतोष जताने के बाद याचिका का निपटारा कर दिया गया। वत्स ने कहा कि उन्होंने पिछले साल 12 दिसंबर को प्राधिकारों के सामने आवेदन दिया था, लेकिन उस पर अब तक कोई जवाब नहीं आया है, इसलिए उन्होंने अदालत का रुख किया। सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के स्थायी वकील रमेश सिंह ने कहा कि आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए नर्सरी या प्रवेश स्तर पर दाखिले के लिए सरकार ने अब तक कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किया है।
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निजी स्कूलों ने शुरू की प्रक्रिया
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि दिशा-निर्देश जारी हुए बिना ही कुछ निजी स्कूलों ने नर्सरी में दाखिले की शुरू कर दी है। याचिका में कहा गया, ‘‘नर्सरी कक्षा में दाखिले के संबंध में तीन-चार साल के बच्चों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए कुछ निर्देश जारी करना जरूरी है। ऐसा इसलिए कि दिल्ली सरकार बच्चों के हितों पर विचार किए बिना स्कूल प्रबंधनों को वित्तीय फायदा पहुंचाने के लिए प्रत्यक्ष या ऑनलाइन कक्षाओं की अनुमति दे सकती है।’’ याचिका में कहा गया कि नर्सरी शिक्षा का मकसद बच्चों को स्कूल के वातावरण और कक्षाओं से अवगत कराना है और ऑनलाइन पाठ्यक्रमों या स्कूलों को खोलकर यह उद्देश्य पूरा नहीं होने वाला है।