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Somnath: यहां भगवान कृष्ण ने किया था अपनी देह लीला का अंत, गुफा के रास्ते पाताल लोक चले गए थे दाऊ बलराम

Thu, 27 Feb 2025 04:09 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Thu, 27 Feb 2025 04:09 PM IST
सार

Somnath: सोमनाथ पहुंचने वाले तीर्थयात्रियों के लिए उन मंदिरों का दर्शन भी सुलभ हो जाता है जहां भगवान कृष्ण ने अपनी इहलीला का अंत किया था और उनके बैकुंठ लोक जाने के बाद उनके बड़े भाई बलराम ने एक गुफा के रास्ते से पाताल लोक गमन किया था।

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Here Lord Krishna had ended his physical life, Dau Balaram had gone to Patal Lok through the cave
भालका तीर्थ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट सोमनाथ को एक आध्यात्मिक तीर्थ की दृष्टि से विकसित कर रहा है। इसके लिए तीर्थयात्रियों को इस बात की भी जानकारी दी जा रही है कि यदि वे सोमनाथ आते हैं तो एक साथ कई अन्य तीर्थों के दर्शन भी कर सकते हैं। सोमनाथ पहुंचने वाले तीर्थयात्रियों के लिए उन मंदिरों का दर्शन भी सुलभ हो जाता है जहां भगवान कृष्ण ने अपनी इहलीला का अंत किया था और उनके बैकुंठ लोक जाने के बाद उनके बड़े भाई बलराम ने एक गुफा के रास्ते से पाताल लोक गमन किया था। ये सभी पुण्य स्थल सोमनाथ के आसपास ही हैं और कोई भी तीर्थयात्री आसानी से इनके दर्शन कर सकता है। 
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Here Lord Krishna had ended his physical life, Dau Balaram had gone to Patal Lok through the cave
भालका तीर्थ - फोटो : अमर उजाला
भालका तीर्थ में भगवान कृष्ण ने किया था शरीर लीला का अंत
सोमनाथ में सरस्वती, कपिला और हिरण नाम की तीन नदियों का संगम है। सरस्वती तो यहां भी प्रयागराज की तरह विलुप्त हैं, जबकि हिरण और कपिला का संगम सोमनाथ के करीब जाकर अरब सागर में मिल जाता है। इसी स्थल को सोमनाथ की त्रिवेणी कहा जाता है। इसी त्रिवेणी से कुछ दूर भालका तीर्थ है जहां भगवान कृष्ण ने अपने शरीर का त्याग किया था।  
 
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Here Lord Krishna had ended his physical life, Dau Balaram had gone to Patal Lok through the cave
भालका तीर्थ - फोटो : अमर उजाला
माना जाता है कि महाभारत के युद्ध के बाद यादव कुल में पुरुष मद्यपान में लिप्त हो गए थे और समाज में बुरे विचारों का प्रभाव ज्यादा फैल गया था। इससे चिंतित भगवान कृष्ण अपने बाएं पैर पर दाहिने पैर को रख विश्राम कर रहे थे जब एक व्याधि ने उन पर तीर चला दिया था। कहते हैं कि जब शिकारी अपना शिकार लेने के लिए उस स्थल पर पहुंचा तो उसने भगवान कृष्ण को तीर से घायल देखा। उसने भगवान से क्षमा मांगी, लेकिन भगवान कृष्ण ने कहा कि राम जन्म में उन्होंने छिपकर अपने मित्र की मदद करने के लिए बाली को मारा था। वह बाली आज व्याध के रूप में उनके सामने है और आज बाली ने एक व्याध के रूप में तीर चलाकर अपना बदला लिया। भगवान ने शिकारी से कहा कि उनका वह ऋण आज समाप्त हुआ।  
 
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Here Lord Krishna had ended his physical life, Dau Balaram had gone to Patal Lok through the cave
बलदेवजी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
भालका तीर्थ के पास गीता मंदिर    
भालका तीर्थ में भगवान कृष्ण के शरीर त्याग के बाद उनका अंतिम संस्कार त्रिवेणी से निकली एक शाखा नदी के किनारे किया गया था। वह स्थल भी भालका तीर्थ से कुछ ही दूर पर है। आज वहां भगवान कृष्ण का एक मंदिर है। इस मंदिर के ठीक पास में ही एक गुफा है। माना जाता है कि भगवान कृष्ण के शरीर के त्याग के बाद उनके बड़े भाई बलराम ने यही पर एक गुफा मार्ग से पाताल लोक चले गए थे। इसे बलदेवजी मंदिर कहा जाता है। 

Here Lord Krishna had ended his physical life, Dau Balaram had gone to Patal Lok through the cave
बलदेवजी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
बलदेवजी मंदिर में एक गुफा आज भी विद्यमान है। गुफा में नागदेवता की एक प्रतिमा दीवार में उकेरी गई है। उसके करीब में ही एक छिद्र भी है। कहते हैं कि हर महाशिवरात्रि को इसके रास्ते से नाग देवता यहां आते हैं। एक नदी के किनारे बना यह स्थल बहुत सुरम्य है और शहर की भागमभाग और आवाज से दूर यहां लोग शांति के कुछ पल बिताने के लिये यहां सपरिवार आते हैं।
 
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