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North Bengal Landslide: भारी बारिश का परिणाम थी आपदा, GSI ने उच्च जोखिम के भूस्खलन की पहले ही दी थी चेतावनी
Wed, 08 Oct 2025 04:03 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 08 Oct 2025 04:03 PM IST
सार
North Bengal Landslide: जीएसआई ने चार अक्तूबर को दार्जिलिंग में भारी बारिश के चलते भूस्खलन का उच्च जोखिम वाला पूर्वानुमान जारी किया था। चेतावनी बारिश शुरू होने से कुछ घंटे पहले दी गई थी और यह जीएसआई के वैज्ञानिक आकलन व मौसम विभाग के रियल-टाइम डाटा पर आधारित थी। जीएसआई के उप महानिदेशक ने यह जानकारी दी।
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दार्जिलिंग में भारी बारिश से तबाही
- फोटो : X @RajuBistaBJP
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विस्तार
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने बुधवार को दावा किया कि उसने चार अक्तूबर को दार्जिलिंग के लिए उच्च जोखिम के भूस्खलन का पूर्वानुमान जारी किया था। क्षेत्र में भारी बारिश के कारण कई इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं हुईं। जीएसआई ने कहा कि यह आपदा भारी बारिश का परिणाम थी, जिसने हिमालयी भूभाग की प्राकृतिक स्थिरता को काफी कमजोर कर दिया था।
जीएसआई के अधिकारियों ने बताया कि दार्जिलिंग में मूसलाधार बारिश शुरू होने से कुछ घंटे पहले चार अक्तूबर को दोपहर सवा दो बजे ऑरेंज स्तर (उच्च जोखिम) की चेतावनी जारी की गई थी। जीएसएआई के उप महानिदेशक सैबल घोष ने बताया, हमने चार अक्तूबर की दोपहर दार्जिलिंग जिले के पुलबाजार, जोरेबंगलो, सुकियापोखरी, कुर्सियांग, मिरिक और रंगली रंगलियोट ब्लॉकों में भूस्खलन का पूर्वानुमान जारी किया था। यह दोपहर करीब सवा दो बजे जारी किया गया एक ऑपरेशनल बुलेटिन था।
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इंजीनियरिंग भूविज्ञान और भूस्खलन विज्ञान के विशेषज्ञ घोष ने कहा कि जीएसआई देश के चार जिलों दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, नीलगिरी (तमिलनाडु) और रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड) के लिए दैनिक बुलेटिन जारी कर रहा है। उन्होंने बताया कि ये अलर्ट जीएसआई के 'भूसंकेत' वेब पोर्टल और 'भूस्खलन' मोबाइल ऐप पर उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा, हम मानसून के दौरान हर दिन यह बुलेटिन जारी करते हैं। इन चार जिलों के अलावा, हम आठ राज्यों के 17 अन्य जिलों को भी बुलेटिन उपलब्ध कराते हैं, लेकिन केवल संबंधित राज्य सरकारों को सत्यापन और डाटा संग्रह के लिए।
उन्होंने कहा, भूस्खलन से कुछ घंटे पहले पूर्वानुमान जारी किया गया था। यह भारी बारिश की संभावना, मौजूदा खतरे की स्थिति और इस समझ पर आधारित था कि उस क्षेत्र की ढलानें पहले से ही पानी से संतृप्त और कमजोर थीं। हिमालय पर तीन दशक तक काम करने का अनुभव रखने वाले घोष ने कहा कि ऐसी चेतावनियां भारत मौसम विज्ञान विभाग की ओर से प्रदान किए गए रियल-टाइम वर्षा पूर्वानुमानों और जीएसआई के भूवैज्ञानिक आकलन पर आधारित होती हैं।
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जीएसआई के अधिकारियों ने बताया कि दार्जिलिंग में मूसलाधार बारिश शुरू होने से कुछ घंटे पहले चार अक्तूबर को दोपहर सवा दो बजे ऑरेंज स्तर (उच्च जोखिम) की चेतावनी जारी की गई थी। जीएसएआई के उप महानिदेशक सैबल घोष ने बताया, हमने चार अक्तूबर की दोपहर दार्जिलिंग जिले के पुलबाजार, जोरेबंगलो, सुकियापोखरी, कुर्सियांग, मिरिक और रंगली रंगलियोट ब्लॉकों में भूस्खलन का पूर्वानुमान जारी किया था। यह दोपहर करीब सवा दो बजे जारी किया गया एक ऑपरेशनल बुलेटिन था।
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इंजीनियरिंग भूविज्ञान और भूस्खलन विज्ञान के विशेषज्ञ घोष ने कहा कि जीएसआई देश के चार जिलों दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, नीलगिरी (तमिलनाडु) और रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड) के लिए दैनिक बुलेटिन जारी कर रहा है। उन्होंने बताया कि ये अलर्ट जीएसआई के 'भूसंकेत' वेब पोर्टल और 'भूस्खलन' मोबाइल ऐप पर उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा, हम मानसून के दौरान हर दिन यह बुलेटिन जारी करते हैं। इन चार जिलों के अलावा, हम आठ राज्यों के 17 अन्य जिलों को भी बुलेटिन उपलब्ध कराते हैं, लेकिन केवल संबंधित राज्य सरकारों को सत्यापन और डाटा संग्रह के लिए।
उन्होंने कहा, भूस्खलन से कुछ घंटे पहले पूर्वानुमान जारी किया गया था। यह भारी बारिश की संभावना, मौजूदा खतरे की स्थिति और इस समझ पर आधारित था कि उस क्षेत्र की ढलानें पहले से ही पानी से संतृप्त और कमजोर थीं। हिमालय पर तीन दशक तक काम करने का अनुभव रखने वाले घोष ने कहा कि ऐसी चेतावनियां भारत मौसम विज्ञान विभाग की ओर से प्रदान किए गए रियल-टाइम वर्षा पूर्वानुमानों और जीएसआई के भूवैज्ञानिक आकलन पर आधारित होती हैं।
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