तीसरी खुराक को लेकर क्यों परेशान हैं स्वास्थ्यकर्मी: सरकार के इन नियमों ने डाल रखा है दुविधा में
दिल्ली स्थित एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने अमर उजाला से कहा कि कोवॉक्सिन से जुड़े हाल के एक अध्ययन से यह पता चला है कि बूस्टर खुराक छह महीने बाद दिए जाने के बाद ही कारगर होती है। अगर हम सरकारी दिशानिर्देशों की मानें, तो हम लोगों में से कई टीके के लिए पात्र नहीं होंगे...
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देश और दुनिया में कोविड के नए स्वरूप ओमिक्रॉन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसी बीच देश में टीके की तीसरी खुराक भी लगनी शुरू हो चुकी है। हालांकि फिलहाल बूस्टर खुराक की शुरुआत थोड़ी धीमी नजर आ रही है। दूसरी तरफ स्वास्थ्यकर्मी भी बूस्टर डोज लगवाने को लेकर असमंजस में नजर आ रहे हैं। सभी की परेशानी की वजह केंद्र सरकार के नियम बने हुए हैं।
स्वास्थ्यकर्मियों ने की नौ महीने का अंतराल कम करने की मांग
दरअसल, केंद्र सरकार ने स्वास्थ्यकर्मियों, अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर्मियों और अन्य बीमारी से ग्रस्त 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को बूस्टर खुराक देने का पात्र माना है। इस श्रेणी में करीब 5.75 करोड़ लोग आते हैं, जिनमें एक करोड़ स्वास्थ्यकर्मी और दो करोड़ अग्रिम मोर्चे पर डटे कर्मचारी शामिल हैं। इस श्रेणी में ऐसे लोग ही तीसरी खुराक के पात्र हैं, जिन्होंने अपनी दूसरी खुराक नौ महीने पहले ले ली है। हालांकि कई स्वास्थ्यकर्मी तीसरी खुराक फिलहाल नहीं ले पाएंगे क्योंकि बहुत सारे कर्मचारी कोविड संक्रमित हैं। ऐसे में उन्हें टीके के लिए तीन महीने का इंतजार करना होगा। कई चिकित्सकों का कहना है कि तीसरी लहर को देखते हुए स्वास्थ्य कर्मियों के लिए नौ महीने के अंतर को कम करना चाहिए।
दिल्ली स्थित एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने अमर उजाला से कहा कि कोवॉक्सिन से जुड़े हाल के एक अध्ययन से यह पता चला है कि बूस्टर खुराक छह महीने बाद दिए जाने के बाद ही कारगर होती है। अगर हम सरकारी दिशानिर्देशों की मानें, तो हम लोगों में से कई टीके के लिए पात्र नहीं होंगे। क्योकि सरकार के निर्देशों के मुताबिक दूसरी खुराक से नौ महीने का अंतर और कोविड-19 संक्रमण से ठीक होने के बाद कम से कम तीन महीने का अंतर होना चाहिए। हाल में कई स्वास्थ्यकर्मी कोविड की चपेट में आए थे, जिसकी वजह से उन्हें बूस्टर खुराक वाली सूची से बाहर करना पड़ा।
कहां, कितनी एहतियाती खुराक लगी
कोविन पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार पहले दिन 9,36,264 पात्र लोगों को एहतियाती खुराक दी गई। गुजरात में सबसे अधिक 1,50,000 लोगों को तीसरी खुराक लगाई गई। इसके बाद आंध्र प्रदेश में 1,12,000 से ज्यादा लोगों को एहतियाती खुराक दी गई।
गुजरात 1,50,993
आंध्रप्रदेश 1,12,575
राजस्थान 94,327
मध्यप्रदेश 63,200
कर्नाटक 80,227
राज्यों में धीमी रही बूस्टर डोज की शुरुआत
मुंबई में सोमवार सुबह के दौरान कुछ तकनीकी दिक्कतों मसलन कोविन एप पर वॉक-इन पंजीकरण के चलते टीकाकरण की धीमी शुरुआत हुई और कुछ अस्पतालों में भी प्रक्रिया शुरू करने में देरी हुई। शहर के बड़े अस्पताल हिंदुजा हॉस्पिटल ने पहले दिन केवल 200 टीके लगाए। हॉस्पिटल प्रबंधन ने मंगलवार से पूरी रफ्तार से स्वास्थ्यकर्मियों के टीकाकरण की शुरुआत करने की योजना बनाई है। हिंदुजा अस्पताल में 2,800 कर्मचारी हैं और वे शहर के उन स्वास्थ्य कर्मचारियों को एहतियाती तौर पर टीके लगाने की पेशकश कर रहे हैं जिनके संस्थान में टीकाकरण केंद्र नहीं है।
पश्चिम बंगाल में टीकाकरण अभियान की शुरुआत बिना किसी दिक्कत के शुरू हो गई। पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि प्रदेश में जहां भी टीकाकरण हो रहा है, वहां पात्र लोगों को ही टीके की खुराक दी जा रही है। ये सभी सॉफ्टवेयर से संचालित हैं और जिन्हें एसएमएस मिले हैं वे ही लोग टीका लगवाने के लिए आ रहे हैं। राज्य का अपना आकलन है कि नए टीकाकरण अभियान के लिए राज्य में इस महीने 500,000 खुराक की जरूरत है।
तमिलनाडु में डोज के बदले ईनाम
इधर, तमिलनाडु जैसे राज्य बूस्टर खुराक से ज्यादा दूसरी डोज देने को लेकर ज़्यादा चिंतित हैं। तमिलनाडु सरकार का स्वास्थ्य विभाग तीसरी खुराक को लेकर आश्वस्त नहीं है क्योंकि 93 लाख से अधिक आबादी को अभी दूसरी डोज लेना बाक़ी है। हालांकि टीके लेने के लिए निजी तौर पर भी लोगों को मिलकर समझाया जा रहा है और उपहार की पेशकश तक की जा रही है। प्रदेश में इस वक्त कुल 10 लाख लोग तीसरी खुराक के लिए पात्र हैं।
केरल में एहतियात के तौर पर 30,000 से अधिक खुराक दी गई हैं और टीके लेने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों की कतार लगी हुई है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई ने राज्य के बूस्टर टीका अभियान का उद्घाटन किया, जिसके तहत करीब 2.1 करोड़ अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नागरिकों को एहतियात के तौर पर तीसरी खुराक दी जा सके।